50 साल पुराना यह जादुई सोलर बॉक्स, बिना गैस-लकड़ी के मिनटों में पकता है खाना! देखें वीडियो
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बढ़ती महंगाई और एलपीजी गैस सिलेंडरों की समस्या के बीच एक समय ऐसा भी था जब लोग सूरज की रोशनी से खाना पकाते थे. सतना के पतेरी निवासी डॉ. रवि तिवारी के घर आज भी 50-60 साल पुराना एक बॉक्स-टाइप सोलर कुकर सुरक्षित रखा हुआ है. डॉ. तिवारी के अनुसार यह कुकर उनके दादा जी ने लगभग 45 से 50 रुपये में खरीदा था. उस दौर में यह कोई सामान्य घरेलू उपकरण नहीं था, बल्कि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा विकसित एक नई तकनीक मानी जाती थी. बाद में 1980 के दशक में भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ईंधन की बचत और वनों की कटाई रोकने के उद्देश्य से सोलर कुकर को बढ़ावा दिया. इसके बाद यह बड़े अधिकारियों और संपन्न परिवारों के घरों में लोकप्रिय हुआ. बिना गैस, कोयला या लकड़ी के केवल सूर्य की ऊर्जा से चलने वाला यह सोलर कुकर आज भी स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है.
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