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    कश्मीर में जोजिला टनल के दोनों छोर आपस में जुड़े:दुनिया की सबसे लंबी सिंगल ट्यूब टनल; कश्मीर से लद्दाख डेढ़ घंटे की जगह 15 मिनट में पहुंचेंगे

    2 hours ago

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    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही जोजिला टनल की खुदाई मंगलवार को पूरी हो गई। टनल के बीच 2.5 मीटर के ब्लॉक को ब्लास्ट करके हटा दिया गया। इसके साथ ही टनल के दोनों छोर आपस में जुड़ गए। 13.15 किमी लंबाई वाली यह दुनिया की सबसे लंबी सड़क टनल है। जिसमें एक ही सुरंग से दोनों डायरेक्शन में गाड़ियां चल सकेंगी। यह टनल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऑल वैदर कनेक्टिविटी बनाए रखेगी। सुरंग को फरवरी 2028 तक चालू कर दिया जाएगा। यह सुरंग मध्य कश्मीर के बालटाल (गांदरबल) को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमार्ग से जोड़ेगी। इसके साथ लगभग 18km की एप्रोच रोड भी बनाई जा रही है। पहले इस हिस्से को पार करने में 1 से 1.5 घंटे लगते थे, वहीं टनल शुरू होने के बाद यह सफर करीब 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। ब्लास्ट के लिए पहुंचे केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा- यह आधुनिक टनल है, इसे पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से तैयार किया जा रहा है। जोजिला टनल 4 तस्वीरें… टनल की खासियत… टनल को फरवरी 2028 तक आम लोगों के लिए खोले जाने की संभावना करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही इस टनल की लागत लगभग ₹6,500 करोड़ है। अधिकारियों के अनुसार, टनल का लगभग 80% काम हो गया है। वहीं, टनल को फरवरी 2028 तक आम लोगों के लिए खोले जाने की संभावना है। यह टनल 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है। यह 31 किलोमीटर लंबी परियोजना का मुख्य हिस्सा है, जिसमें सोनमर्ग से मिनीमार्ग तक एप्रोच रोड और पुल भी शामिल हैं। इस परियोजना का निर्माण मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) कर रही है। अधिकारी बोले - टनल का काम तय समय से छह महीने पहले ही पूरा हो गया MEIL ने नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NHIDCL) से यह प्रोजेक्ट हासिल किया और अक्टूबर 2020 में सुरंग का निर्माण शुरू किया। NHIDCLके अधिकारियों ने बताया कि यह काम तय समय से छह महीने पहले ही पूरा हो गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा, वह एडवांस्ड 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) का इस्तेमाल करके सुरंग बना रही है, जिसे पहाड़ी इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत की सबसे अहम इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक माना जाता है। पिछले पांच सालों में, इस साइट पर बर्फ खिसकने (एवलांच) की पांच घटनाएं हुई हैं। इनमें जनवरी 2023 की एक गंभीर घटना भी शामिल है, जब भारतीय सेना ने इलाके में फंसे 172 मजदूरों को बचाया था।
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