नेहरू के सामने चीन, मोदी के सामने कोविड... आखिर संकट की घड़ी में किसकी हुई बड़ी परीक्षा?
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Nehru Era vs PM Modi: 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के लिए खास दिन माना जा रहा है. इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे. लेकिन किसी भी नेता की असली परीक्षा सिर्फ लंबे कार्यकाल से नहीं होती. असली परीक्षा संकट के समय लिए गए फैसलों से होती है. नेहरू के सामने 1962 का चीन युद्ध सबसे बड़ी चुनौती था. इस युद्ध ने देश की सुरक्षा और रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े किए. वहीं मोदी सरकार के दौर में कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया. इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां भी सामने आईं. महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया. करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन दिया गया. डिजिटल सेवाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ. सरकार का दावा है कि वैश्विक संकटों के बीच भी भारत ने विकास की रफ्तार बनाए रखी. ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी फोकस रखा गया. समर्थकों का कहना है कि यह मजबूत संकट प्रबंधन का उदाहरण है. वहीं आलोचकों का मानना है कि दोनों दौर की परिस्थितियां अलग थीं, इसलिए तुलना भी उसी संदर्भ में होनी चाहिए. हालांकि एक बात साफ है. नेहरू हों या मोदी, दोनों के नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा संकट के दौर में ही हुई. इतिहास भी नेताओं को अक्सर ऐसे ही मुश्किल समय में लिए गए फैसलों के आधार पर याद रखता है.
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