OPINION: जिम ट्रेनर के इश्क में धर्म का भूगोल बदला, पर क्या ब्रेनवॉश से कोई अपनी पहचान मिटा सकता है? क्या है मनोवैज्ञानिक सच
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Opinion: इश्क बेसाख्ता होता है, बिला-तकल्लुफ और बिला-इरादा. इश्क हकीकी में इरादा मुहब्बत की तौहीन है और अगर ऐसा होता है तो फिर वह रिश्ता टारगेटेड रिलेशनशिप है. शामली में एक हिन्दू लड़के के धर्म परिवर्तन ने उबाल ला दिया. लेकिन अगर इसे हिन्दू-मुसलमान के चश्मे से अलग होकर देखें तो क्या यह मामला अतिरंजित नहीं दिखता. क्या कोई पढ़ा लिखा इंसान इश्क में अपना होश इस तरह से गंवा बैठता है कि वह अपनी जड़ें भूल जाए.निःसंदेह आस्था व्यक्तिगत विषय है लेकिन मनोविज्ञान की धरातल पर देखें तो यह गैसलाइटिंग, थॉट रिफॉर्म और कोर्सिव कंट्रोल का मामला दिखता है.
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