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    AI बढ़ा रहा साइबर हमलों का खतरा, अब कोई भी बन सकता है हैकर! CrowdStrike CEO की चेतावनी

    3 hours ago

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    CrowdStrike CEO on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने लोगों के काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है. आज AI का इस्तेमाल कंटेंट बनाने, तस्वीरें तैयार करने और कई जटिल कार्यों को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है. लेकिन जहां यह तकनीक नई संभावनाएं खोल रही है वहीं इसके साथ कुछ गंभीर खतरे भी सामने आ रहे हैं. CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा कंपनी CrowdStrike के CEO जॉर्ज कर्ट्ज ने चेतावनी दी है कि AI साइबर अपराधियों के लिए शक्तिशाली हथियार बन सकता है और इससे डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. AI बदल रहा है साइबर सुरक्षा की दुनिया जॉर्ज कर्ट्ज के अनुसार AI अब केवल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का साधन नहीं रह गया है. यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों को पहचानने और उनका फायदा उठाने के प्रोसेस को भी बेहद आसान बना रहा है. पहले जिन साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए विशेषज्ञ हैकर्स और वर्षों का अनुभव चाहिए होता था अब वही काम AI टूल्स की मदद से काफी हद तक स्वचालित हो सकता है. उनका कहना है कि AI की वजह से साइबर अपराध का स्तर पूरी तरह बदल रहा है और भविष्य में हमले पहले से कहीं अधिक तेज, जटिल और खतरनाक हो सकते हैं. बिना तकनीकी ज्ञान के भी हो सकते हैं बड़े साइबर हमले कर्ट्ज़ ने बताया कि CrowdStrike और AI कंपनी Anthropic के सहयोग से विकसित एक AI मॉडल सॉफ्टवेयर में मौजूद गंभीर खामियों को पहचानने में सक्षम है. इतना ही नहीं, यह विभिन्न कमजोरियों को जोड़कर संभावित हमले के रास्ते भी खोज सकता है. इसका मतलब यह है कि जिन कामों के लिए पहले अनुभवी हैकरों की जरूरत पड़ती थी उन्हें अब AI की मदद से कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी अंजाम दे सकते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ AI को साइबर सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती मान रहे हैं. करोड़ों कमजोरियां आईं सामने रिपोर्ट के मुताबिक CrowdStrike ने हाल ही में कई बड़ी कंपनियों के डिजिटल सिस्टम का मूल्यांकन किया. इस दौरान लगभग 4.5 करोड़ संभावित कमजोरियों की पहचान की गई. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधुनिक सॉफ्टवेयर सिस्टम कितने बड़े पैमाने पर सुरक्षा जोखिमों का सामना कर रहे हैं. विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि उनकी अधिकांश सेवाएं डिजिटल नेटवर्क और सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती हैं. सुरक्षा से तेज रफ्तार में अपनाया जा रहा है AI कर्ट्ज़ का मानना है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI तकनीक को तेजी से अपना रही हैं लेकिन उसकी सुरक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा. उन्होंने इस स्थिति की तुलना Y2K संकट से की, जब पूरी दुनिया को कंप्यूटर सिस्टम से जुड़े संभावित खतरे का सामना करना पड़ा था. उनके अनुसार अभी से पर्याप्त निवेश और तैयारी नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में साइबर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आ सकती हैं. सरकारों और समाज के लिए नई चुनौती सामान्य उपयोगकर्ता भले ही AI का उपयोग फोटो बनाने या रोजमर्रा के काम आसान करने के लिए कर रहे हों लेकिन इसके साथ गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के जोखिम भी जुड़े हुए हैं. दूसरी ओर, सरकारें, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और सामाजिक संस्थाएं AI के बढ़ते प्रभाव से पैदा नई चुनौतियों से निपटने के तरीके तलाश रही हैं. जैसे-जैसे AI अधिक शक्तिशाली होता जाएगा वैसे-वैसे साइबर अपराधों का स्वरूप भी बदलता जाएगा. ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक माना जा रहा है. यह भी पढ़ें: 2026 में Instagram पर Reach क्यों गिर रही है? ये 5 गलतियां चुपचाप खत्म कर रही हैं आपकी ग्रोथ
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