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    Cancer Drug Shortage: कैंसर मरीजों के लिए बढ़ी चिंता, जरूरी कीमो दवाओं की कमी से इलाज पर मंडराया संकट

    2 hours ago

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    Cancer Drug Shortage: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए इन दिनों एक नई चिंता सामने आ गई है. देश के कई अस्पतालों में कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ जरूरी दवाओं की कमी की खबरें सामने आ रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि Cisplatin और Carboplatin जैसी दवाएं कई तरह के कैंसर के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं. इस कमी के कारण देश भर में कैंसर के मरीजों के इलाज में रुकावटें आ रही हैं. बता दें कि ये दोनों दवाएं फेफड़े, Cervix, Ovary, और सिर-गर्दन के कैंसर के इलाज के लिए बहुत जरूरी मानी जाती हैं. कई जगह मरीज और उनके परिजन दवा की तलाश में एक मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर तक भटक रहे हैं. डॉक्टरों की चिंता यह है कि अगर समय पर दवा नहीं मिली मरीजों के कीमोथेरेपी सेशन को टालना पड़ रहा है या फिर इलाज का कोई दूसरा तरीका ढूंढना पड़ रहा है. आखिर क्यों खास हैं ये दवाएं? Cisplatin और Carboplatin जैसी प्लैटिनम आधारित दवाएं कैंसर के इलाज में रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं. इनका इस्तेमाल फेफड़ों, स्तन, सर्वाइकल, ओवेरियन, मुंह और कई अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है. कई मामलों में ये दवाएं मरीज के इलाज का मुख्य हिस्सा होती हैं. लेकिन इस समय देश में इनकी भारी कमी हो गई है. माना जा रहा है कि इस संकट की मुख्य वजह कच्चे माल (API) की कमी, कंपनियों की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग लागत और दुनिया भर में सप्लाई चेन का प्रभावित होना है. साथ ही जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और प्लैटिनम की कीमतों में आई भारी तेजी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है. शुरुआत में अस्पतालों ने अपने पुराने स्टॉक से काम चलाया, लेकिन अब वह भी खत्म हो चुका है. डॉक्टरों को मजबूरी में मरीजों के कीमोथेरेपी शेड्यूल और इलाज के तरीकों में बदलाव करना पड़ रहा है, जो मरीजों के ठीक होने की संभावनाओं के लिहाज से बेहद चिंताजनक है. यह भी पढ़ेंः Summer Health Tips: दिनभर धूप में करते हैं काम तो जा सकती है जान, इन स्मार्ट तरीकों से खुद का रखें ख्याल डॉक्टरों और विशेषज्ञों के बयानों पर केंद्रित पैराग्राफ फॉर्मेट दवाओं की इस कमी से देश के बड़े अस्पतालों में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है. दिल्ली के एम्स (AIIMS) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. एमडी रे ने बताया कि इन जरूरी दवाओं के न मिलने से कैंसर रोगियों का पूरा ट्रीटमेंट प्लान बिगड़ सकता है, जिससे मरीजों का सर्वाइवल रेट पर बुरा असर पड़ सकता है और बीमारी दोबारा लौटने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्याम गर्ग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि स्थिति इतनी गंभीर है कि अस्पताल में मुश्किल से केवल एक या दो दिन का ही स्टॉक बचा है. मरीजों और परिवारों के लिए सबसे जरूरी बात डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है. यदि किसी मरीज का इलाज इन दवाओं से चल रहा है तो उसे अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए और दवा की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर जानकारी लेते रहना चाहिए. किसी भी स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज में बदलाव नहीं करना चाहिए. यह भी पढ़ेंः Best Drinks for Liver Health: फैटी लिवर में बड़े काम की हैं ये पांच ड्रिंक, पीते ही जिगर को मिलेगी जोरदार ठंडक
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