जब कोर्ट केस के बीच में ही किराएदार बन बैठा मकान मालिक, 24 साल पुराने मुकदमे में आया दिलचस्प मोड़
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एक मकान मालिक ने साल 2002 में अपने किराएदार को अवैध निर्माण, सबलेटिंग और किराया न चुकाने के आरोप में बेदखल करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामला सालों तक चलता रहा, लेकिन सुनवाई के दौरान किराएदार ने उसी संपत्ति में 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली और खुद को-ओनर यानी सह मालिक बन गया. इसके बाद मामला पूरी तरह बदल गया. बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने माना कि जब कोई किराएदार संपत्ति में मालिकाना हक हासिल कर लेता है तो उसका दर्जा सिर्फ किराएदार का नहीं रहता. ऐसे में उसके खिलाफ चल रही बेदखली की कार्रवाई जारी नहीं रह सकती. अदालत का यह फैसला किराएदारों और संपत्ति विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है.
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