2 जून के अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, "अपने खर्चों का प्रबंधन करना प्रतिवादी यानी पति की जिम्मेदारी है. वह केवल बेरोजगारी या अन्य जिम्मेदारियों का हवाला देकर अपनी कानूनी रूप से ब्याही पत्नी और नाबालिग बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से खुद को मुक्त नहीं कर सकता.
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