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    Children's Screen Time: पीएम ने बताए स्क्रीन टाइम से जुड़े ये 4 रूल्स, हर बच्चे के पैरेंट्स को करने चाहिए फॉलो

    2 days ago

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    How To Reduce Screen Time In Children: आज के समय में बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है. पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, मोबाइल और डिजिटल डिवाइस उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन असली चुनौती यह है कि बच्चे स्क्रीन का इस्तेमाल कैसे और कितना कर रहे हैं. कई माता-पिता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चों की स्क्रीन टाइम की आदत को कैसे नियंत्रित किया जाए ताकि इसका असर उनकी सेहत और व्यवहार पर न पड़े. मोबाइल देखने से क्या होता है नुकसान? एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम सिर्फ आंखों तक सीमित समस्या नहीं है. हाल ही में मार्च 2025 में पब्लिश एक अध्ययन में 3 से 7 साल के बच्चों की डिजिटल आदतों का एनालिसिस किया गया. रिसर्चर ने पाया कि स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की नींद, फिजिकल एक्टिविटी और डेली रूटीन को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. समस्या तब गंभीर हो जाती है जब मोबाइल और टैबलेट बच्चों के खेल, बातचीत, परिवार के साथ समय बिताने और पर्याप्त नींद की जगह लेने लगते हैं. यही वजह है कि दुनिया भर में विशेषज्ञ माता-पिता को बच्चों की डिजिटल आदतों पर शुरू से ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं. क्या कहा प्रधानमंत्री ने? हाल ही में लॉरेंस वोंग जो सिंगापुर के प्रधानमंत्री हैं, ने बच्चों में स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करने के लिए स्क्रीन स्मार्ट फ्रॉम द स्टार्ट अभियान की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने माता-पिता, स्कूलों और समुदायों से मिलकर बच्चों के लिए बेहतर डिजिटल माहौल बनाने की अपील की. उन्होंने सबसे पहले परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय को स्क्रीन से मुक्त रखने पर जोर दिया. उनका कहना है कि खाने की मेज पर या परिवार के साथ बिताए जाने वाले खास पलों में मोबाइल फोन दूर रखने चाहिए. जब हर कोई अपनी स्क्रीन में व्यस्त रहता है, तो परिवार के बीच संवाद और जुड़ाव कमजोर होने लगता है. इसे भी पढ़ेंः कॉन्सर्ट्स और शाही शादियों से इवेंट इंडस्ट्री में बूम, तकनीक में भी चीन को टक्कर दे रहा भारत बेडरूम को मोबाइल-फ्री रखना चाहिए एक और महत्वपूर्ण सलाह बच्चों के बेडरूम को मोबाइल-फ्री रखने की है. एक्सपर्ट के मुताबिक अगर छोटे बच्चों के कमरे में रात के समय फोन मौजूद रहेगा तो वे देर तक स्क्रीन देखते रह सकते हैं, जिससे उनकी नींद प्रभावित हो सकती है. अच्छी नींद बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी होती है. बच्चों को स्मार्टफोन देने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि बच्चों को स्मार्टफोन देने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. अगर किसी बच्चे को सिर्फ माता-पिता से संपर्क करने के लिए फोन की जरूरत है, तो शुरुआत में साधारण फोन दिया जा सकता है. इससे बच्चे धीरे-धीरे तकनीक का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना सीखते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि डिजिटल युग में बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर रखना व्यावहारिक नहीं है. लेकिन उन्हें शुरुआत से डिजिटल जिम्मेदारी सिखाई जा सकती है. इसे भी पढ़ें- समर वैकेशन पर अपने बच्चों को कराएं ये 5 एक्टिविटी, पढ़ाई-लिखाई में शार्प हो जाएगा दिमाग
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