गांव की बुजुर्ग महिलाएं गर्मी में ठंढी हवा के लिए तैयार करती थी बेना, आज भी बिजली गुल होने पर सहारा
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गर्मी के मौसम में लोग अपने परिवार के साथ गर्मियों की छुट्टी बिताने बाहर किसी टूरिस्ट प्लेस पर जाते हैं या फिर किसी धार्मिक स्थल पर दर्शन करने जाते हैं, लेकिन आज से लगभग 30 साल पहले ग्रामीण संस्कृति में गर्मियों का या महीना काफी रचनात्मक होता था. ऐसे में गांव की लड़कियां और महिलाएं एक साथ मिलकर पेड़ के नीचे बैठकर फटी बोरी और गेट गेहूं के डंठल से हाथ का पंखा बनती थी. जिसे बेना भी कहा जाता है.
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