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    केरलम का वर्कला दुनिया की 20 ‘जीरो वेस्ट सिटी’ में:262 महिलाओं की टीमें घर-घर पहुंचीं, बदली लोगों की आदत; 95% कचरे का पुनर्प्रबंधन

    2 hours ago

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    केरलम के तिरुवनंतपुरम जिले का तटीय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन शहर वर्कला अभी तक बेमिसाल सुंदरता, अरब सागर, चट्टानों, 2000 साल पुराने जनार्दन स्वामी मंदिर और मस्जिदों के लिए मशहूर रहा है। अब यह खूबसूरत शहर दुनिया भर में ‘जीरो वेस्ट सिटी’ के तौर पर भी पहचाना जा रहा है। यूएन-हैबिटैट और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने दुनिया के 20 शहरी इलाकों में वर्कला नगर पालिका को ‘जीरो वेस्ट सिटी’ के तौर पर चुना है। 20 शहरों में वर्कला अकेला भारतीय शहर है। 40 हजार की आबादी वाले वर्कला की स्थिति भी पांच साल पहले अन्य भारतीय शहरों जैसी थी। फिर 2020 में कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए महिलाओं की ‘हरिता कर्म सेना’ के 262 सदस्यों को तैनात किया गया। ये महिलाएं घर-घर जाकर कचरा एकत्र करती हैं, लोगों को समझाती हैं और निगरानी करती हैं। इससे 12,695 घरों और 2,601 संस्थानों से कचरा उनके दरवाजे से इकट्ठा किया जाने लगा। धीरे-धीरे लोगों की आदतें बदलीं। अब हर घर में पूर तरह से गीला और सूखा कचरा 100% अलग-अलग घर पर किया जाता है। नगर पालिका ने 5 टन सैनिटरी वेस्ट का अनोखा प्लांट शुरू किया, जो सैनिटरी वेस्ट और बायोमेडिकल वेस्ट को बिजली में बदलता है। इससे 60 किलोवॉट बिजली बन रही है। वर्कला हर साल लगभग 6 हजार टन कचरा उत्पन्न करता है, जिसमें 81 प्रतिशत जैविक और लगभग 95% गैर-जैविक कचरे का पुनर्प्रबंधन किया जाता है। सरकारी योजना को नहीं माना, जन आंदोलन से मिली सफलता अभियान की शुरुआत करने वाले वर्कला नगर पालिका (नपा) के पूर्व चेयरमैन केएम लाली कहते हैं, ‘इसे सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन बनाया। राजनीतिक पार्टियां, वैज्ञानिक, एनजीओ, युवा, छात्र और सभी लोगों ने दिल से इसमें हिस्सा लिया। यही सफलता का असल राज है।’ नपा की मौजूदा चेयरपर्सन गीता हेमाचंद्रन के मुताबिक, इस छोटे लेकिन खूबसूरत शहर में रोज 2000 पर्यटक आते हैं। छुट्टियों में पर्यटक संख्या 10,000 पहुंच जाती है। वर्कला नपा के सचिव को रविवार को इस्तांबुल में यूएन के कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया है जानिए- अन्य शहरों ने क्या अनूठा किया सैन फ्रांसिस्को : कम कचरा पैदा करने के लिए प्रोत्साहन। योकोहामा : लोगों को 20 से ज्यादा श्रेणियों में कचरा अलग करना सिखाया। बोलोन्या : ज्यादा मिश्रित कचरा देने वालों पर ज्यादा शुल्क लगाया। कुआलालंपुर : चीजों को फेंकने के बजाय दोबारा उपयोग पर जोर।
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