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    केरलम में निपाह वायरस लौटा, संक्रमित वेंटिलेटर पर:संपर्क में आए 15 लोग क्वारंटीन; शिगेला इंफेक्शन के भी 55 मरीज एडमिट, इनमें बच्चे ज्यादा

    12 hours ago

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    केरलम में इस साल निपाह वायरस का पहला केस सामने आया। 43 साल मरीज कोझिकोड का रहने वाला है। मरीज को हल्का बुखार आने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। बाद में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज भेजा गया। उसकी हालत गंभीर है और वह वेंटिलेटर पर है। राज्य सरकार ने रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया। निपाह के अलावा चार जिलों वायनाड, तिरुवनंतपुरम, कोझिकोड और कोल्लम में शिगेला इंफेक्शन का असर है। 20 लोगों में शिगेला की पुष्टि हुई है। 55 मरीज अस्पतालों में एडमिट हैं। कुल 578 लोग शिगेला के संदिग्ध पाए गए हैं। सबसे ज्यादा असर वायनाड में दिखा है। यहां संक्रमितों में बड़ी संख्या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के छात्रों की है। अस्पताल में भर्ती 55 मरीजों में से 47 भी वायनाड के हैं। इसके अलावा सात सैंपलों की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। कोझिकोड के अस्पताल में बैरेकेडिंग मरीज के संपर्क में आए 77 लोग, इनमें दो हाईएस्ट रिस्क कैटेगरी में निपाह वायरल के मामले पर स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि मरीज कई लोगों के संपर्क में आया था। इनमें परिवार, जान-पहचान के लोग और अस्पताल स्टाफ शामिल है। कुल 77 कॉन्टैक्ट्स में से 58 हेल्थकेयर वर्कर्स 14 परिवार के सदस्य, 5 दोस्त और सहकर्मी हैं। कुल 15 लोग क्वारंटीन हैं, इनमें से 2 लोगों को हाईएस्ट रिस्क और 13 को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। 2018 के बाद से केरलम में छठी बार संक्रमण फैला है। आखिरी बार दो साल पहले 2024 में दो केस मिले थे। इनमें एक मरीज की जान चली गई थी। मरीज निपाह वायरस की चपेट में कैसे आया अधिकारियों के मुताबिक, मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और खुद उसकी सफाई की थी। आशंका है कि इसी दौरान वह संक्रमण की चपेट में आया। निपाह वायरस मुख्य रूप से फ्रूट बैट (फल खाने वाले चमगादड़ों) से फैलता है। केरलम में शिगेला इंफेक्शन का भी असर केरलम में निपाह के अलावा शिगेला इंफेक्शन का भी असर है। 20 लोगों में इसकी पुष्टि हुई है, जिनमें वायनाड से 9, तिरुवनंतपुरम से 6, कोझिकोड से 3 और कोल्लम से 2 मामले शामिल हैं। शिगेला के कारण 55 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। इनमें सबसे ज्यादा वायनाड में 47, तिरुवनंतपुरम में 3, कोझिकोड में 3 और कोल्लम में 2 मरीज हैं। वायनाड के 47 मरीजों में ज्यादातर स्कूली बच्चे हैं। फिलहाल 7 सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है। राज्य में 578 लोग ऐसे हैं जिनमें शिगेला जैसे लक्षण पाए गए हैं। इन्हें संदिग्ध या लक्षण वाले मरीज माना जा रहा है। जांच में वायनाड के प्रभावित स्कूल के कुएं के पानी में भारी मात्रा में बैक्टीरिया मिल है। हालांकि स्कूल के बोरवेल के पानी में बैक्टीरिया नहीं मिला। वहीं, जहां-जहां शिगेला के केस सामने आएं हैं, वहां के प्रभावित और आसपास के इलाकों के स्कूलों में 14 जून तक छुट्टी की गई है। वहीं, स्वास्थ विभाग ने बताया कि शिगेला एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जिससे दस्त, बुखार और पेट में ऐंठन होती है। यह आमतौर पर दूषित भोजन, दूषित पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। केरलम में निपाह के अब तक 30 केस अब आगे क्या... 1998 में मलेशिया में निपाह का पहला केस सामने आया 1998-99 में पहली बार मलेशिया के सुंगाई निपाह गांव में इस वायरस की पहचान हुई। इसी गांव के नाम पर इसका नाम निपाह वायरस रखा गया। यह वायरस चमगादड़ से फैला था। चमगादड़ों से वायरस सूअरों तक पहुंचा। सूअरों के फार्म में काम करने वाले लोग संक्रमित हुए। मलेशिया में 100 लोगों की मौत हुई मलेशिया में लगभग 265 लोग संक्रमित हुए हुए थे। 100 से अधिक लोगों की मौत हुई। संक्रमण रोकने के लिए सरकार को 10 लाख से ज्यादा सूअरों को मारना पड़ा। इससे मलेशिया के पोर्क इंडस्ट्री को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। मलेशिया के बाद निपाह वायरस 6 देशों में फैला मलेशिया के बाद यह वायरस बांग्लादेश, भारत, सिंगापुर, फिलीपींस में फैला। कंबोडिया और थाईलैंड में भी वायरस के कुछ केस मिले थे। हालांकि, यह ज्यादा नहीं फैल पाया। भारत में 2001 में पहला निपाह केस सामने आया भारत में 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पहली बार निपाह फैला था। तब 66 मामले सामने आए थे जिसमें 45 मौतें हो गईं थीं। इसके बाद 2007 में बंगाल के नादिया में पांच केस सामने आए, सभी की मौत हो गई। 2018 मे केरलम में निपाह ने एंट्री ली। राज्य में 8 सालों में छह बार निपाह के केस सामने आ चुके हैं। भारत में संक्रमण का पैटर्न अलग क्यों है मलेशिया में वायरस मुख्य रूप से सूअरों के जरिए फैला था। लेकिन भारत और बांग्लादेश में अधिकतर मामलों में यह चमगादड़ों से फैला। निपाह फैलता कम है लेकिन कोरोना से ज्यादा खतरानाक कोरोना ज्यादा तेजी से फैलता है, इसलिए दुनिया भर में करोड़ों लोग संक्रमित हुए हैं। निपाह उतनी तेजी से नहीं फैलता लेकिन संक्रमित होने पर जान का खतरा कहीं ज्यादा होता है। कोरोना फेफड़ों पर हमला करता है जबकि निपाह दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) पैदा कर सकता है। कोरोना में अधिकांश लोग ठीक हो जाते हैं, लेकिन निपाह में मृत्यु दर काफी अधिक है। ----------------------- फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… डिप्थीरिया से 2 बच्चों की मौत: इन 6 लक्षणों को इग्नोर न करें, बच्चों को वैक्सिन जरूर लगवाएं बीते दिनों महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव से डिप्थीरिया (गलघोंटू) के तीन मामले सामने आए। इनमें छह महीने और 11 साल के दो बच्चों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों बच्चों को डिप्थीरिया के टीके नहीं लगे थे। पूरी खबर पढ़ें…
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