Screen Time In Children: बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए फोन मत छीनें, पहले सुधारें ये 5 चीजें
1 hour ago
How To Reduce Screen Time In Children: 'बस पांच मिनट और...' अगर आपके घर में भी यह वाक्य अक्सर सुनाई देता है, तो आप अकेले नहीं हैं. आज के समय में कई माता-पिता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनके बच्चे मोबाइल, टैबलेट या टीवी से चिपके रहते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग सबसे पहले स्क्रीन टाइम कम करने के नियम बनाने लगते हैं. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि समस्या सिर्फ स्क्रीन नहीं है. कई बार स्क्रीन बच्चों की किसी दूसरी जरूरत को पूरा कर रही होती है, इसलिए वे बार-बार उसकी ओर आकर्षित होते हैं. अगर आप सच में बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं, तो पहले इन पांच बातों पर ध्यान देना जरूरी है. बोरियत को समझें, सिर्फ स्क्रीन को दोष न दें पहले बच्चे खाली समय में बाहर खेलते थे, साइकिल चलाते थे या दोस्तों के साथ समय बिताते थे. अब जैसे ही उन्हें कुछ करने को नहीं मिलता, वे मोबाइल उठा लेते हैं. लेकिन बोरियत भी बच्चों के विकास का एक हिस्सा है. इसी दौरान उनकी कल्पनाशक्ति विकसित होती है और वे नए तरीके से सोचने लगते हैं. इसलिए बच्चों को किताबें पढ़ने, चित्र बनाने, खेलकूद, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश करें. जब उनके पास बेहतर विकल्प होंगे, तो स्क्रीन का आकर्षण अपने आप कम हो सकता है. परिवार के साथ समय बढ़ाएं कई बार बच्चे स्क्रीन में इसलिए डूब जाते हैं क्योंकि उन्हें परिवार के साथ जुड़ाव कम महसूस होता है. आजकल एक ही कमरे में बैठे लोग भी अपने-अपने फोन में व्यस्त रहते हैं. ऐसे में बच्चे भी डिजिटल दुनिया में अपना मनोरंजन और साथ ढूंढने लगते हैं. दिन में कुछ समय ऐसा जरूर निकालें जब पूरा परिवार बिना फोन के साथ बैठे. रात का खाना, शाम की सैर या सोने से पहले की बातचीत बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत कर सकती है. अपनी आदतों पर भी नजर डालें बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं. अगर माता-पिता हर समय फोन पर व्यस्त रहेंगे, तो बच्चों से स्क्रीन छोड़ने की उम्मीद करना मुश्किल होगा. कोशिश करें कि खाने के दौरान, बातचीत करते समय या परिवार के साथ समय बिताते हुए फोन का इस्तेमाल कम करें. जब बच्चे आपको ऐसा करते देखेंगे, तो वे भी इससे सीखेंगे. इसे भी पढ़ें- भूलकर भी बच्चों के अजीब सवालों पर न हंसें, ये 4 गलतियां पैरेंट्स को पड़ती हैं भारी बच्चे की नींद पूरी हो रही है या नहीं? नींद की कमी बच्चों को अधिक चिड़चिड़ा और थका हुआ बना सकती है. ऐसे में स्क्रीन उनके लिए सबसे आसान मनोरंजन बन जाती है. वहीं सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट देखने से नींद और भी खराब हो सकती है. इसलिए यह सुनिश्चित करें कि बच्चा पर्याप्त नींद ले रहा हो और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित हो. तनाव और भावनाओं को समझें हर बच्चा जो घंटों स्क्रीन पर समय बिताता है, वह स्क्रीन का आदी नहीं होता. कई बार पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता, सामाजिक तनाव या भावनात्मक परेशानियां भी बच्चों को डिजिटल दुनिया की ओर धकेल देती हैं. बच्चों से खुलकर बात करें और उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका दें. जब उन्हें घर में सहयोग और समझ मिलेगी, तो वे आराम और खुशी के लिए सिर्फ स्क्रीन पर निर्भर नहीं रहेंगे. इसे भी पढ़ें- समर वैकेशन पर अपने बच्चों को कराएं ये 5 एक्टिविटी, पढ़ाई-लिखाई में शार्प हो जाएगा दिमाग
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