ट्रम्प ने भारत में बाइक चलाने का AI-वीडियो शेयर किया:शेर की सवारी करते, चांद पर झंडा भी लगाया
3 hours ago
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर AI-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह भारत की सड़कों पर बाइक चलाते नजर आ रहे हैं। इस एक मिनट के AI वीडियो में ट्रम्प अलग-अलग अंदाज में दिखते है। वीडियो में उन्हें रेगिस्तान में ऊंट की सवारी करते, पैराग्लाइडिंग करते और एक शेर पर बैठे दिखाया गया है। एक सीन में वह स्पेससूट पहनकर चांद पर अमेरिकी झंडा लगाते भी नजर आते हैं। वीडियो में उनका चेहरा पिज्जा, बस, होर्डिंग, नॉर्दर्न लाइट्स और माउंट रशमोर पर भी दिखाया गया। वीडियो के बैकग्राउंड में खुद की तारीफ वाला गाना चल रहा है। इसमें लगातार ‘सब डोनाल्ड ट्रम्प को पसंद करते है’ और ‘धन्यवाद प्रेसिडेंट ट्रम्प’ जैसे लिरिक्स सुने जा सकते हैं। वीडियो में भारत से लेकर चीन तक का जिक्र वीडियो के गाने में दावा किया गया कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग ट्रम्प को पसंद करते हैं। गाने की लाइन में कहा गया कि मेक्सिको, मिडिल ईस्ट, चीन और भारत में सब ट्रम्प को पसंद करते है। हालांकि यह वीडियो सिर्फ एक मिनट का था, लेकिन इसके बोल में ‘ट्रम्प’ शब्द का इस्तेमाल पूरे 45 बार और 'डोनाल्ड' नाम का 29 बार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ‘एवरीबडी लव्स डोनाल्ड ट्रम्प’ गाना ट्रुथ सोशल पर ‘ac132’ नाम के यूजर ने बनाया था। वीडियो के आखिर में गाने का क्रेडिट एंथनी कॉन्स्टैंटिनो को दिया गया है। वह न्यूयॉर्क से ट्रम्प समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। वीडियो शेयर होने के बाद कॉन्स्टैंटिनो ने कहा कि उन्हें गर्व है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने उनके गाने को शेयर किया। यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ यूजर्स ने इसे मजाकिया बताया, जबकि कई लोगों ने इसे ट्रम्प की खुद की तारीफ करने वाला प्रचार वीडियो कहा। एक यूजर कहा कि ट्रम्प इस वीडियो में कॉमिक बुक कैरेक्टर जैसे लग रहे हैं। ट्रम्प पहले भी शेयर कर चुके हैं AI तस्वीरें यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने AI-जनरेटेड कंटेंट शेयर किया हो। कुछ दिन पहले उन्होंने खुद को जेम्स बॉन्ड के अंदाज में ‘ट्रम्प 007’ कैप्शन के साथ दिखाया था। इससे पहले वह खुद को ‘ग्रेटेस्ट अट्रैक्शन’ बताते हुए भी तस्वीर शेयर कर चुके हैं। पिछले महीने ट्रम्प ने एक AI-जनरेटेड फोटो पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने खुद को जीसस के रूप में दिखाया गया था। उस पोस्ट को लेकर काफी विवाद हुआ था। बाद में पोस्ट हटा ली गई, लेकिन ट्रम्प ने माफी नहीं मांगी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें लगा था कि तस्वीर में वह डॉक्टर की तरह दिख रहे हैं। ट्रम्प पहले भी कई बार कह चुके हैं कि वह पारंपरिक मीडिया से ज्यादा सोशल मीडिया को अपनी बात रखने का अहम जरिया मानते हैं। इसी वजह से ट्रुथ सोशल पर उनकी लगभग हर पोस्ट कुछ ही देर में राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का हिस्सा बन जाती है। ईरान युद्ध से जुड़ी AI तस्वीरें भी शेयर कीं ईरान युद्ध की शुरूआत से ही ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर सैन्य ताकत से जुड़ी कई AI-जनरेटेड तस्वीरें भी पोस्ट कीं है। इनमें ईरान की नौसेना को तबाह हालत में दिखाया गया था। एक तस्वीर में समुद्र में बड़ी संख्या में युद्धपोत डूबते नजर आए, जबकि दूसरी तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य ताकत को बेहद आक्रामक अंदाज में दिखाया गया था। इन तस्वीरों के जरिए ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की सेना कमजोर पड़ चुकी है और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक इलाके में अमेरिका बढ़त बना रहा है। हालांकि इन तस्वीरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं थी और इन्हें AI से तैयार किया गया विजुअल कंटेंट माना गया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा और डर पैदा करने वाला कंटेंट बताया, जबकि ट्रम्प समर्थकों ने इसे उनकी मजबूत नेतृत्व वाली छवि से जोड़कर देखा। एक्सपर्ट्स बोले- डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट बनाने की कोशिश ट्रम्प पिछले कुछ समय से AI का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक ब्रांडिंग के बड़े हथियार के तौर पर कर रहे हैं। राजनीतिक एक्सपर्ट्स इसे “डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट” बनाने की कोशिश मानते हैं, जिसमें नेता को असाधारण और सर्वशक्तिमान दिखाया जाता है। यानी सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए किसी व्यक्ति (जैसे- इन्फ्लुएंसर, नेता या सेलिब्रिटी) को एक निर्दोष, अलौकिक या ईश्वर जैसी छवि में पेश किया जाता है, और प्रशंसक बिना किसी तर्क के उन्हें फोलो करते हैं। ट्रम्प का यह मॉडल पारंपरिक राजनीतिक प्रचार से अलग है क्योंकि इसमें मीम कल्चर, वायरल वीडियो और AI विजुअल्स का मिश्रण दिखाई देता है। इसका मकसद सिर्फ समर्थकों को उत्साहित करना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बने रहना भी होता है। आलोचकों का कहना है कि AI कंटेंट के जरिए वास्तविकता और कल्पना की सीमा धुंधली हो रही है, जिससे गलत नैरेटिव और भ्रम फैलने का खतरा बढ़ता है।
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