Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    विदेश से MBBS,नौकरी कर पा रहे, न प्राइवेट प्रैक्टिस:गाइडलाइन का कन्फ्यूजन, राजस्थान मेडिकल काउंसिल नहीं कर रही रजिस्ट्रेशन

    2 days ago

    1

    0

    विदेश से MBBS करके लौटे राजस्थान के 1 हजार डॉक्टर्स के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं करने के कारण न तो नौकरी मिल पा रही है, न ही प्राइवेट प्रैक्टिस कर पा रहे हैं। इधर, RMC का कहना है कि नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) की गाइडलाइन के चलते कंफ्यूजन हुआ है। कंफ्यूजन क्लियर होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी। पढ़िए क्या है पूरा विवाद… विदेश से MBBS करके लौटे FMG यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट स्टूडेंट परमानेंट रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण RMC और NMC के बीच चक्कर काटने को मजबूर हैं। परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं होने के पीछे कारण बताया जा रहा है इसी साल 18 मार्च को NMC की ओर से जारी एक नोटिफिकेशन। इस नोटिफिकेशन को जारी कर NMC ने 6 मार्च के नोटिफिकेशन को वापस लेते हुए नई गाइडलाइन जारी की। इसका मुख्य उद्देश्य उन फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स की समस्याओं और शंकाओं को दूर करना है, जिन्होंने कोविड-19 या युद्ध के कारण अपनी पढ़ाई का कुछ हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया था। समझिए गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु… ऑनलाइन पढ़ाई के बदले फिजिकल क्लास से भरपाई नोटिफिकेशन के अनुसार, अगर किसी छात्र ने विदेश में मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ऑनलाइन क्लासेस ली थीं तो भारत में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए उसकी भरपाई करना अनिवार्य है। इसके दो तरीके हैं… पहला : छात्र ने जिस विदेशी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है, वहीं अतिरिक्त कक्षाएं लेकर या कोर्स की अवधि बढ़ाकर उस ऑनलाइन समय की भरपाई फिजिकल उपस्थिति के साथ। इसके लिए कॉलेज का कंपनसेटरी सर्टिफिकेट और ट्रांसक्रिप्ट दिखाना होगा। दूसरा : अगर विदेशी कॉलेज में फिजिकल क्लास के जरिए भरपाई नहीं हो पाई तो स्टूडेंट्स को भारत में 1 या 2 साल की क्लर्कशिप (लॉ और मेडिसिन में उपयोग किया जाने वाला खास प्रशिक्षण कार्यक्रम) करनी होगी। एक साल की क्लर्कशिप उन छात्रों के लिए जिनकी पढ़ाई फाइनल ईयर में छूटी थी। दो साल की क्लर्कशिप उन छात्रों के लिए जिनकी पढ़ाई पेनल्टीमेट ईयर यानी फाइनल से पिछले साल में छूटी थी। 18 नवंबर 2021 या उसके बाद एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट : इन पर CRMI रेगुलेशन 2021 लागू होगा। इन्हें FMGE परीक्षा पास करने के बाद भारत में 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होगी। 18 नवंबर 2021 से पहले एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट : इन पर स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन 2002 लागू होगा। अगर ऐसे छात्रों ने अपने विदेशी कॉलेज में ही फिजिकल मोड में पूरी पढ़ाई, भरपाई और इंटर्नशिप पूरी कर ली है। उनका वैलिड सर्टिफिकेट है, तो उन्हें भारत में दोबारा अतिरिक्त इंटर्नशिप करने की जरूरत नहीं है। भारत में क्लर्कशिप और इंटर्नशिप की शर्तें व फीस भारत के मेडिकल कॉलेज FMG छात्रों से क्लर्कशिप के लिए अधिकतम हजार रुपए प्रति महीना ही फीस ले सकते हैं। क्लर्कशिप खत्म होने के बाद जब छात्र अपनी 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शुरू करेंगे तो उन्हें भारतीय मेडिकल छात्रों के बराबर ही स्टाइपेंड मिलेगा। पुराने मेडिकल कॉलेजों में एफएमजी स्टूडेंट्स के लिए कुल स्वीकृत एमबीबीएस सीटों का केवल 7.5% हिस्सा ही इंटर्नशिप/क्लर्कशिप के लिए उपलब्ध होगा, जबकि नए कॉलेज जहां अभी अपना इंटर्नशिप बैच नहीं है वहां यह 100 फीसदी तक हो सकता है। पासपोर्ट और वेरिफिकेशन स्थायी रजिस्ट्रेशन देने की पूरी जिम्मेदारी राज्यों की स्टेट मेडिकल काउंसिल की होगी। काउंसिल छात्रों के पासपोर्ट में दर्ज एंट्री-एग्जिट के रिकॉर्ड से यह अच्छी तरह जांच करेगी कि छात्र ने वास्तव में विदेश में जाकर फिजिकल क्लास की है या नहीं। नियमों को पूरा किए बिना किसी भी छात्र को परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं दिया जाएगा। टाइम लिमिट सभी FMG छात्रों को अपनी विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने की तारीख से 10 साल के भीतर अपनी इंटर्नशिप समेत पूरा कोर्स खत्म करना होगा, तभी उनकी डिग्री भारत में मान्य होगी। अब पढ़िए डॉक्टर्स की पीड़ा डॉ. अभिषेक गोयल : 3 महीने बाद भी परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं जयपुर निवासी अभिषेक गोयल ने सितंबर 2023 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लौटे। जुलाई 2024 में एफएमजी का एग्जाम क्लियर किया। इसके बाद फरवरी 2025 से लेकर इस साल तक इंटर्नशिप पूरी की। अभिषेक ने बताया कोरोना काल के दौरान वे इंडिया वापस आ गए थे। इस दौरान उन्होंने 6 महीने ऑनलाइन क्लास ली थी, लेकिन बाद में वापस जाकर जितने समय ऑनलाइन क्लास ली थी, उसे ऑफलाइन में कन्वर्ट कर कंपनसेट कर लिया था। इसका सर्टिफिकेट भी जमा है। इसके बावजूद परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा। न नौकरी कर पा रहा हूं, न निजी प्रैक्टिस। डॉ. शुभम भारद्वाज : इंटर्नशिप भी पूरी कर ली जयपुर के डॉ.शुभम भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने जॉर्जिया से साल 2024 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद एफएमजी क्लीयर करने के साथ ही सवाईमाधोपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप भी पूरी कर ली। इसके बाद से अप्लाई कर रखा है, लेकिन परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं मिल रहा। डॉ. अभिषेक : हमारे साथ भेदभाव क्यों सवाईमाधोपुर के डॉ.अभिषेक ने बताया कि एनएमसी ने विदेश की जिन यूनिवर्सिटीज को वेरिफाई कर रखा है, हमने वहां पढ़ाई की है। कोरोना काल में हमने यहां रहकर ऑनलाइन पढ़ाई की। जब हमारी पढ़ाई पूरी हुई तो एंबेसी ने भी वेरिफाई किया। यहां आने के बाद एफएमजी का एग्जाम दिया। इस एग्जाम में पास होने के बाद भी हमारी डिग्री पर संदेह क्यों किया जा रहा है। RMC का तर्क : नोटिफिकेशन में क्लियरिटी नहीं, NMC से गाइडलाइन मांगी राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोपाल गोयल ने कहा- NMC ने जो आदेश निकाले हैं, उससे एफएमजी के रजिस्ट्रेशन को लेकर परेशानी आ रही है। ऑनलाइन स्टडी और 10 साल में कोर्स कम्पलीशन को लेकर हमने NMC से गाइडलाइन मांगी है। गाइडलाइन आने के बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तेज कर देंगे। NMC ने 6 मार्च और 18 मार्च को दो नोटिफिकेशन निकाले थे,उनमें क्लियरिटी नहीं थी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    तुला राशिफल 6 जून 2026: आज पार्टनर संग हो सकता है मनमुटाव, चंद्रमा की स्थिति दे सकती है तनाव
    Next Article
    नेहा कक्कड़@38, समोसे बेचते थे पिता:4 साल में जगराता गाया, 10X10 के कमरे में रहीं, वैन में सोईं, नशे में कंटेस्टेंट ने किया प्रपोज

    Related भारत Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment