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    Airtel Priority Postpaid का नाम अब Fast Lane हुआ, कंपनी बोली- बंद नहीं होगी सर्विस

    7 hours ago

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    Airtel Fast Lane: टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने पिछले महीने देश की पहली Priority Postpaid सर्विस लॉन्च की थी. अब कंपनी ने इसका नाम बदलकर 'Fast Lane' कर दिया है. साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि इस सर्विस को बंद नहीं किया जाएगा. दरअसल, इस सर्विस ने नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर फिर से बहस शुरू कर दी है और टेलीकॉम रेगुलेटर ऑफ इंडिया (TRAI) ने भी इस पर कंपनी से सफाई मांगी थी. इसी बीच ऐसे कयास लगाए जाने लगे थे कि एयरटेल ने यह सर्विस बंद कर दी है, लेकिन अब कंपनी ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है. सर्विस वहीं, सिर्फ नाम चेंज हुआ नाम बदलने की जानकारी देते हुए एयरटेल की तरफ से कहा गया है कि कंपनी का लॉन्च कैंपेन खत्म हो गया है और 'फास्ट लेन' नाम इस सर्विस को बेहतर तरीके से पेश करता है. जिन यूजर्स ने पोस्टपेड प्लान चुने हैं और जिनके पास 5G कैपेबल डिवाइस हैं, उन्हें फास्टर स्पीड, अनलिमिटेड डेटा और शानदार सर्विस मिलती रहेगी. नाम में यह बदलाव सिर्फ ब्रांडिंग तक है और इसमें पहले वाले प्लान ही जारी रहेंगे. सर्विस बंद होने के सवाल पर कंपनी ने कहा कि इसे बंद करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. हमें ग्राहकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. स्टैंडअलोन 5G नेटवर्क और स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी से सभी यूजर्स के लिए नेटवर्क एफिशिएंसी बेहतर हुई है. प्रीपेड यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है और उन्हें पहले की तरह ही सर्विस मिल रही है. क्या है स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी? नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी की बात करें तो यह 5G टेक्नोलॉजी में यूज होने वाला ऐसा फीचर है, जो एक नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में स्प्लिट कर देता है. यूजर ग्रुप या किसी खास पर्पज के लिए नेटवर्क स्लाइसेस तैयार किए जा सकते हैं. नेटवर्क स्लाइसिंग के कारण नेटवर्क एफिशिएंटली काम कर पाता है. एयरटेल के उदाहरण से समझें तो कंपनी किसी नेटवर्क स्लाइस को प्रीमियम यूजर के लिए असाइन कर सकती है, जिससे उससे नेटवर्क पर लोड बढ़ने के बावजूद कंटिन्यूस कनेक्टिविटी मिलती रहेगी. अमेरिका, यूके और मलेशिया समेत कई देशों में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है. इस पर विवाद क्यों हो रहा है? एयरटेल की इस सर्विस पर काफी विवाद हुआ है. कई लोग इसे नेट न्यूट्रैलिटी के उल्लंघन से जोड़कर देख रहे हैं. उनका कहना है कि कंपनी अपने यूजर्स में फर्क कर रही है. इस सर्विस के जरिए पोस्टपेड यूजर्स को बेहतर 5G एक्सपीरियंस मिलेगा, जिससे प्रीपेड यूजर्स को भी पोस्टपेड में कन्वर्ट करने पर भी विचार करना पड़ सकता है. इसके अलावा संसदीय समिति का भी कहना था कि ऐसी सर्विस से गरीब और प्रीपेड यूजर्स के हक मारे जा रहे हैं. इन विवादों के बीच TRAI ने कंपनी से जवाब मांगा था. ये भी पढ़ें- सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए खतरे की घंटी! AI Agents से काम करवाएगी यह भारतीय कंपनी
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