Cancer Drug Prices: कैंसर मरीजों को लगा तगड़ा झटका, किल्लत की वजह से बढ़ाए जाएंगे इन दो दवाओं के दाम
5 hours ago
Government Approves Price Hike For Cisplatin And Carboplatin: ईरान और इजरायल- अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है. देश में खाने- पीने की चीजों से लेकर पेट्रोल- डीजल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं और अब इसका असर दवाइयों पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे कैंसर मरीजों को परेशानी हो सकती है. दरअसल, सरकार ने कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दो अहम दवाओं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में विशेष बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. इन दवाओं की देशभर में लगातार कमी देखी जा रही थी, जिससे कैंसर मरीजों के इलाज पर असर पड़ने लगा था. देशभर में इसका असर मामला इतना गंभीर हो गया था कि देश के प्रमुख कैंसर संस्थानों और अस्पतालों में भी इन दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने लगी. दिल्ली स्थित एम्स और मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर जैसे संस्थानों ने भी इस कमी को लेकर चिंता जताई थी. डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं का इस्तेमाल लंग्स, सिर और गर्दन, सर्वाइकल, ओवरी और टेस्टिकुलर कैंसर समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है. खास बात यह है कि इनकी जगह इस्तेमाल करने के लिए कोई पूरी तरह समान विकल्प उपलब्ध नहीं है. क्यों हो रही है दवाओं की कमी? जानकारों के मुताबिक, दवाओं की कमी का सबसे बड़ा कारण प्लेटिनम की बढ़ती कीमतें हैं. प्लेटिनम वह मुख्य कच्चा माल है जिससे इन दवाओं का निर्माण किया जाता है. पिछले कुछ वर्षों में प्लेटिनम की कीमतों में 225 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि बीते छह महीनों में ही इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है. दक्षिण अफ्रीका में उत्पादन संबंधी चुनौतियां और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है. इसे भी पढ़ें - Summer Fatigue: गर्मियों में बार-बार महसूस हो रही थकान, जान लें यह किस बीमारी का संकेत? सरकार ने क्यों बढ़ाई कीमत? दूसरी ओर, इन दवाओं की कीमतें लंबे समय से सरकारी नियंत्रण में थीं. ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के तहत निर्धारित मूल्य सीमा के कारण कंपनियां बढ़ती लागत के बावजूद दाम नहीं बढ़ा पा रही थीं. नतीजतन कई दवा कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया या कुछ मामलों में बंद भी कर दिया, जिससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने डीपीसीओ 2013 के पैरा 19 का इस्तेमाल करने का फैसला किया है. यह एक विशेष प्रावधान है, जिसके तहत किसी आवश्यक दवा की उपलब्धता प्रभावित होने पर सरकार सामान्य मूल्य नियंत्रण नियमों से अलग फैसला ले सकती है. इसी प्रावधान के जरिए सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में संशोधन का रास्ता साफ हुआ है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक समिति ने सिफारिश की है कि पिछली मूल्य निर्धारण तिथि के बाद हर साल 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को आधार माना जा सकता है, जबकि कुल वृद्धि 50 प्रतिशत से अधिक न हो. हालांकि, कीमतों में अंतिम संशोधन का निर्णय दवा निर्माण लागत में हुई वास्तविक बढ़ोतरी के आंकड़ों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. इलाज में देरी हो सकती थी एक्सपर्ट का मानना है कि यदि इन दवाओं की कमी लंबे समय तक बनी रहती, तो मरीजों के इलाज में देरी हो सकती थी. इससे कैंसर दोबारा लौटने का खतरा बढ़ने के साथ-साथ मरीजों की रिकवरी और जीवित रहने की संभावना पर भी असर पड़ सकता था. सरकार को उम्मीद है कि कीमतों में संशोधन के बाद घरेलू कंपनियां दोबारा बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करेंगी. इससे सप्लाई में सुधार होगा और कैंसर मरीजों को समय पर जरूरी दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी. इसे भी पढ़ें - Weight Loss Drug: मोटापा कम करने का नया कमाल, 52 नहीं अब सिर्फ 12 इंजेक्शन में चलेगा काम, जानें कैसे?
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