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    एमपी- भाजपा ने तीनों राज्यसभा सीटें निर्विरोध जीतीं:राहुल बोले- मीनाक्षी का नामांकन रद्द होना सीट चोरी, दिग्विजय ने कहा- इसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल

    16 hours ago

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    मध्य प्रदेश में भाजपा ने तीनों राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को पार्टी उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचन सर्टिफिकेट दे दिए हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के खिलाफ पार्टी की याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी थी। मामले पर चुनाव आयोग ने भी कोई फैसला नहीं दिया है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए। राहुल गांधी ने कहा, भाजपा और चुनाव आयोग की जुगलबंदी ने सीट चोरी की है। कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन मामूली आपत्ति पर खारिज कर दिया गया, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार को त्रुटियां सुधारने का मौका दिया गया। चुनाव आयोग ने दो उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया और कांग्रेस की आपत्तियों का जवाब भी नहीं दिया। दरअसल, MP की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल भी था, लेकिन 9 जून को उनका नामांकन फॉर्म निरस्त कर दिया गया। कांग्रेस ने रिजल्ट पर रोक लगाने की मांग की थी इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामले की सुनवाई आज ही की जाए, क्योंकि नाम वापस लेने की आखिरी समय-सीमा आज दोपहर 3 बजे तक है। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें अभी तक याचिका की कॉपी नहीं मिली है, इसलिए जवाब देने के लिए समय चाहिए। सिंघवी ने जवाब में कहा कि अगर सुनवाई अगले दिन भी हो, तो तब तक चुनाव का नतीजा घोषित नहीं किया जाए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून पहले से स्पष्ट है और याचिका को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। सुनवाई टलने के बाद कांग्रेस ने फिर मांग की कि कोर्ट के फैसले तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। कांग्रेस ने यह याचिका बुधवार और गुरुवार की रात 1:48 बजे ऑनलाइन दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन रद्द करने का फैसला गैरकानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से लिया। कांग्रेस ने कोर्ट से इस फैसले को रद्द करने की मांग की है। वेणुगोपाल बोले- लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन गलत आधारों पर खारिज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार के मामले में अलग रवैया अपनाया गया। वेणुगोपाल ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपना संघर्ष जारी रखेगी। सिंघार बोले- न्याय में देरी क्यों? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया? सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर चुनाव आयोग ने कोई विचार नहीं किया। उनके रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाईं। सुप्रीम कोर्ट ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की लास्ट डेट है अब आगे क्या हो सकता है… 1. आयोग नामांकन बहाल करता है तो चुनाव फिर मुकाबले में बदल जाएगा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के अनुसार, यदि चुनाव आयोग यह मानता है कि रिटर्निंग ऑफिसर से त्रुटि हुई है तो वह स्पष्ट आदेश जारी कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन वैध घोषित कर सकता है। ऐसे में फिर से वोटिंग होगी। 2. आयोग राहत नहीं देता तो भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन होगा यदि आयोग हस्तक्षेप नहीं करता या रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को बरकरार रखता है, तो कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव से बाहर मानी जाएंगी। ऐसे में भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीतेंगे। 3. राष्ट्रपति के पास जाने से कांग्रेस को क्या मिलेगा? राष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस गलत तरीके से नामांकन निरस्त करने का मुद्दा उठा सकती है। राष्ट्रपति मामले का संज्ञान लेकर चुनाव आयोग या संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से जानकारी मांग सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति सीधे चुनाव आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव प्रक्रिया के किसी फैसले को रद्द नहीं कर सकते। इस मुलाकात का महत्व संवैधानिक और राजनीतिक संदेश के रूप में अधिक माना जा रहा है। कोर्ट में मामला लंबित होने की शिकायत हुई थी राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाई है। कांग्रेस की दलील- यह केस नहीं, सिर्फ नोटिस है चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस की ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है। सिंघवी के मुताबिक, तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि संज्ञान क्यों न लिया जाए? कांग्रेस का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए इसे हलफनामे में लिखना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैर-कानूनी और सीटों की चोरी करार दिया है। खबर के मिनट टु मिनट अपडेट के लिए नीचे दिए ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…
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