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    एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो हुई:अब 22% से 30% मिश्रण पर नहीं लगेगा टैक्स, सरकार की क्रूड इम्पोर्ट घटाने की तैयारी

    2 hours ago

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    केंद्र सरकार ने E20 (20% एथेनॉल ब्लेंडिंग) से अधिक स्तर के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर भी एक्साइज ड्यूटी जीरो कर दी है। सरकारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 22% से लेकर 30% एथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। केंद्र सरकार ने देश में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के इम्पोर्ट को कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं कि सरकार के इस फैसले का मतलब क्या है और इससे आम आदमी और देश को क्या फायदा होगा। सवाल 1: सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर क्या नया नोटिफिकेशन जारी किया है? जवाब: भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर पेट्रोल में हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर दिया है। इसके तहत जिस पेट्रोल में 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिला होगा, उस पर कोई केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) नहीं लगाया जाएगा। इस टैक्स छूट के दायरे में पेट्रोल के चार नए वेरिएंट्स— E22, E25, E27 और E30 शामिल होंगे। यह पहली बार है जब सरकार ने E20 से ऊपर के ब्लेंड्स के लिए इतने बड़े फाइनेंशियल सपोर्ट (फिस्कल इंसेंटिव) देने की घोषणा की है। सवाल 2 : क्या होता है एथेनॉल? जवाब: एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। सवाल 3: सरकार के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह क्या है? जवाब: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (करीब 87%) विदेशों से इम्पोर्ट करता है। विदेशी तेल पर देश की निर्भरता को कम करने और घरेलू स्तर पर बनने वाली प्रदूषण-मुक्त ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस टैक्स छूट से तेल कंपनियां पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलाने के लिए प्रेरित होंगी, जिससे देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा। सवाल 4: क्या सरकार के पास इन नए वेरिएंट्स (E22 से E30) के लिए कोई तकनीकी ढांचा तैयार है? जवाब: हां, सरकार ने इसकी पूरी तैयारी पहले ही कर ली है। कुछ हफ्ते पहले ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने आधिकारिक तौर पर E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल ब्लेंड्स के लिए फ्यूल-क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (ईंधन की गुणवत्ता के मानक) अधिसूचित किए थे। IS 19850:2026 के तहत ये मानक 15 मई, 2026 से लागू हो चुके हैं। इनमें एथेनॉल की मात्रा, ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर की सीमा, टेस्टिंग प्रोसेस और सेफ्टी नियमों को तय किया गया है। अब टैक्स छूट मिलने से तकनीकी और वित्तीय दोनों तरह के रास्ते साफ हो गए हैं। सवाल 5: भारत में अभी एथेनॉल ब्लेंडिंग की क्या स्थिति है, क्या हम टारगेट के करीब हैं? जवाब: भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम तय समय से काफी तेजी से आगे बढ़ा है। नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स (2018) में संशोधन करके पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य पहले 2030 रखा गया था, जिसे बाद में घटाकर एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 कर दिया गया। सरकारी तेल कोशिकाओं ने जून 2022 में ही समय से 5 महीने पहले 10% ब्लेंडिंग का टारगेट हासिल कर लिया था। सवाल 5: गाड़ियों के इंजन और परफॉर्मेंस पर एथेनॉल के असर को लेकर क्या विवाद रहा है? जवाब: जैसे-जैसे देश भर में E20 फ्यूल मिलना शुरू हुआ, कुछ गाड़ी मालिकों ने इंजन की क्षमता, माइलेज और गाड़ियों के पुराने पार्ट्स के खराब होने को लेकर चिंता जताई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। हालांकि, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में E20 फ्यूल लागू करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट में सरकार ने दलील दी थी कि यह बदलाव पूरी तरह से जांच-परख के बाद और गन्ना किसानों के आर्थिक फायदे को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार ने बिना एथेनॉल वाले (प्योर) पेट्रोल की समानांतर सप्लाई जारी रखने की मांग को भी ठुकरा दिया था। सवाल 7: क्या एथेनॉल मिक्स होने से गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है? ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का क्या कहना है? जवाब: इस पर ऑटोमोबाइल निर्माताओं की संस्था 'सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स' (SIAM) ने स्थिति साफ की थी। SIAM के मुताबिक, कुछ पुरानी गाड़ियों में E20 ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन इससे गाड़ी की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। सवाल 8: आम तौर पर माना जाता है कि एथेनॉल सस्ता होता है, तो क्या ब्लेंडेड पेट्रोल की कीमत कम होगी? जवाब: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल कंपनियों से खरीदना रिफाइंड पेट्रोल के मुकाबले सस्ता नहीं पड़ रहा है। पिछले साल पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया था कि एथेनॉल की औसत खरीद लागत (वेटेड एवरेज प्रोक्योरमेंट कॉस्ट) रिफाइंड पेट्रोल की लागत से अधिक हो गई है। 31 जुलाई, 2025 तक, ट्रांसपोर्टेशन और GST मिलाकर कंपनियों को एथेनॉल की औसत खरीद लागत 71.32 रुपए प्रति लीटर पड़ रही थी। यही वजह है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के बावजूद रिटेल प्राइस (खुदरा कीमत) को कम करना फिलहाल पेचीदा बना हुआ है।
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