Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    'फलों की तस्वीर लगाकर ट्रेटा पैक में बेची जा रही शराब', SC ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

    2 weeks ago

    1

    0

    टेट्रा पैक में शराब की बिक्री के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया. कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग नाम की संस्था की याचिका में कहा गया था कि शराब की बोटलिंग से जुड़े नियमों में अस्पष्टता के चलते ऐसा हो रहा है. टेट्रा पैक में स्वास्थ्य चेतावनी नहीं छापी जा रही. पैकेट पर फलों की तस्वीर लगाकर उसे जूस की तरह दिखाया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने इस तरह से बेची जा रही शराब पर बैन लगाने का अनुरोध किया है. कुछ दिन पहले ऐसी ही एक और जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक में बेची जा रही देसी शराब पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. इसमें उत्तर प्रदेश के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत यूपी की नई एक्साइज पॉलिसी के तहत टेट्रा पैक में देसी शराब की बिक्री को अनिवार्य कर दिया गया है. यह भी पढ़ें:- 'प्रदर्शन करो, पर सड़कों पर उतरकर लोगों को परेशान मत करो', नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग पर बोले CJI 16 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) के सामने यह याचिका लगी थी, जिस पर सीजेआई ने याचिकाकर्ता को सीधे कोर्ट आने के बजाय अपनी शिकायत के लिए राज्य के अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा था. याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह टेट्रा पैक में बेची जा रही शराब आसानी से शैक्षणिक संस्थानों में पहुंच रही है, जिसकी वजह से अपराध और शराब के दुरुपयोग की घटनाएं बढ़ रही हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका बचाव करते हुए कहा था कि पहले देसी शराब बोतलों में बेची जाती थी, लेकिन नई एक्साइज पॉलिसी के तहत टेट्रा पैकिंग में शराब बेचे जाने का फैसला लिया गया है, ताकि सुरक्षा मानकों को बढ़ाया जा सके और मिलावट को रोका जा सके. यह भी पढ़ें:- आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 'बिना डर के जीना और घूमना नागरिकों का मौलिक अधिकार, राज्य करें नियमों के मुताबिक कार्रवाई' (निपुण सहगल के इनपुट के साथ)
    Click here to Read more
    Prev Article
    Explained: रात का पारा 5 डिग्री बढ़ने का मतलब और शरीर पर असर क्या, कैसे 50% बढ़ जाता मौत का जोखिम?
    Next Article
    Delhi HC: जेपी नड्डा के घर के बाहर ऐसा क्या हुआ, आरोपी को HC ने नहीं दी राहत, कहा-' विरोध का अधिकार है, लेकिन...'

    Related भारत Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment