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    जेल में 'द प्रेग्नेंट किंग' किताब पढ़ती मिलीं गिरिबाला सिंह:महिला आयोग से बोलीं- कोई परेशानी नहीं; CBI को मिली ट्विशा डेथ की दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

    2 hours ago

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    मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल में ट्विशा शर्मा मौत मामले में बंद रिटायर्ड जज और सास गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। जेल में गिरिबाला सिंह देवदत्त पटनायक की किताब 'द प्रेग्नेंट किंग' पढ़ रही थीं। टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने उनसे भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। गिरिबाला सिंह ने किसी तरह की शिकायत नहीं की और कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, सब ठीक है। रेखा यादव ने बताया- गिरिबाला सिंह शांत रहीं। निरीक्षण में आयोग को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में कोई विशेष सुविधा दी जा रही है।आयोग की टीम ने महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और ब्यूटी पार्लर का निरीक्षण किया। ‘द प्रेग्नेंट किंग’ में राजा युवनाश्व की कथा गिरिबाला सिंह जिस किताब को पढ़ रही थीं, वह देवदत्त पटनायक की पुस्तक 'द प्रेग्नेंट किंग' है। यह पौराणिक कथा राजा युवनाश्व से प्रेरित मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, संतान की इच्छा में किए गए यज्ञ के बाद राजा युवनाश्व ने अनजाने में मंत्रयुक्त पेय पी लिया था, जिसके बाद वे गर्भवती हुए और समय आने पर उनके शरीर से पुत्र मांधाता का जन्म हुआ। CBI जुटा रही मेडिकल और डिजिटल सबूत ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच कर रही सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच में गर्भावस्था, गर्भपात, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर फोकस किया जा रहा है। वहीं गिरिबाला सिंह की ओर से जिला कोर्ट में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया है। दोनों अधिवक्ता विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी से अनुमति मांगी है। सीबीआई मोबाइल, लैपटॉप से मिले चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और डिलीट डेटा की भी जांच कर रही है, ताकि मामले की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके। डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई जोड़ रही कड़ियां एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तथ्यों को जोड़कर जांच कर रही है। सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश दस्तावेज में सामने आया है कि जांच से जुड़े तथ्य पहले ही उनके पास पहुंच रहे थे। ट्विशा के परिजन के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि इसी के चलते वह अग्रिम जमानत लेने में सफल हो गईं। मामले की प्रारंभिक जांच और रस्सी जब्त करने वाले एसआई दिनेश शर्मा से दोबारा पूछताछ की जाएगी। इन्होंने घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और क्राइम सीन का नक्श मुआयना तैयार किया था। घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की। एसआई ने रस्सी जब्त की और कार में रख ली वकील अंकुर पांडे ने कहा– कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा 13 मई 2026 को सुबह करीब 9:42 बजे ट्विशा के घर पहुंचे। उन्होंने गिरिबाला और समर्थ के सामने रस्सी जब्त की, लेकिन जब्ती पत्रक में किसी को साक्षी नहीं बनाया। इसीलिए दस्तावेज में रस्सी पहचानने वाले का जिक्र नहीं किया। उन्होंने रस्सी अपनी कार में रख ली, जबकि ये तत्काल एम्स के डॉक्टरों को देना था। 13 मई को पीएम कराने भी दिनेश शर्मा ही एम्स पहुंचे थे। ट्विशा के परिजन ने इस पर 14 मई को हंगामा कर दिया। इसके बाद एसआई ने 15 मई को ये रस्सी डॉक्टरों को दी। वकील कहते हैं, ऐसे साक्ष्य जुटाते समय गवाह बनाना कानूनी रूप से जरूरी है। पुलिस को शुरुआत में ही गिरिबाला और पति समर्थ को संदिग्ध के रूप में चिह्नित करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बता दें, 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। एक जून को गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर उनके घर पहुंची थी। रस्सी की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं वकील का दावा है कि प्रारंभिक जांच करने वाले एसआई दिनेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध है। अग्रिम जमानत के लिए दिए गए आवेदन में जब्ती से जुड़े दस्तावेज में हुई गलतियों का जिक्र था। इसी आधार पर जमानत मांगी गई। इससे संकेत मिलता है कि केस डायरी से जुड़ी अहम जानकारी गिरिबाला सिंह तक पहुंच रही थी। अंकुर ने बताया कि ट्विशा के परिजन शुरू से ही पुलिस की मंशा पर सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप था कि पुलिस जानबूझकर गंभीर त्रुटियां कर रही है, जिससे केस कमजोर हो सकता है। एम्स में परीक्षण के बाद 16 मई को रस्सी को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया। फिलहाल सीबीआई केवल ट्विशा की मौत की जांच कर रही है। 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था। दो बेल्ट थे, पुलिस ने एक की जब्ती की ट्विशा मामले में घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की। जब्ती पंचनामा में यह स्पष्ट नहीं है कि बेल्ट किसकी निशानदेही पर मिली। इसके बावजूद पुलिस ने उसी बेल्ट को मौत में इस्तेमाल हुई लिगेचर बेल्ट मानकर जांच में शामिल किया और एम्स भोपाल भेजा। केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने के आरोप अग्रिम जमानत खारिज कराने लगाई गई याचिका के जवाब में गिरिबाला की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया है कि रस्सी से संबंधित जब्ती दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा था। उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए कानूनी रूप से उन्हें उस दस्तावेज तक पहुंच का अधिकार नहीं था। यह अधिकार सिर्फ पुलिस को रहता है। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के जवाब के साथ यह दस्तावेज दाखिल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। ट्विशा के परिजन के वकील का आरोप है कि इससे जांच से जुड़े दस्तावेज आरोपियों तक पहले ही पहुंच रहे थे। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एक ही दिन तैयार हुए अन्य जब्ती दस्तावेज गिरिबाला की ओर से हाईकोर्ट में पेश जवाब में यह भी जिक्र है कि उसी दिन (13 मई) कार्रवाई संबंधी तीन अन्य दस्तावेज भी तैयार किए गए थे। इनमें समर्थ और गिरिबाला की मौजूदगी का जिक्र है। रस्सी की जब्ती वाले दस्तावेज में इसका जिक्र नहीं है। इसे आधार बनाते हुए जांच प्रक्रिया में अंतर होने का दावा वकील अंकुर पांडे ने किया है। मामले में उठाए गए सभी बिंदु गिरिबाला की ओर से 27 मई को हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका के दौरान प्रस्तुत जवाब से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब जांच एजेंसियां सबूतों की जब्ती, उनकी सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही हैं। गिरिबाला की ओर से पेश दस्तावेज की हकीकत की पड़ताल आरोपी गिरिबाला की ओर से ट्विशा को मानसिक रूप से परेशान और मनोरोग से जुड़ी समस्या होने का दावा करते हुए भोपाल कोर्ट में उसके इलाज से संबंधित कुछ दस्तावेज पेश किए गए थे। इसके बाद उनको अग्रिम जमानत मिली थी। सीबीआई टीम मेडिकल दस्तावेज की वास्तविकता की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्विशा का इलाज हुआ था या नहीं? यदि हुआ था तो उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी? इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की गई। ट्विशा मानसिक बीमार थी या नहीं? सीबीआई पता कर रही सीबीआई सूत्रों के मुताबिक यह भी जांच चल रही है कि ट्विशा वास्तव में किसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थी या उसके इलाज से जुड़े दस्तावेज का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य से किया गया। डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई पूछताछ की पुष्टि की है। भास्कर के सवाल पर डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि मरीज की निजी जानकारी साझा करना उसके अधिकारों का उल्लंघन है। वह ट्विशा की काउंसलिंग के दौरान हुई व्यक्तिगत बातों का खुलासा नहीं कर सकते। गिरिबाला ने जिन्हें सजा सुनाई ऐसे 29 कैदी भी जेल में गिरिबाला और समर्थ को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के आरोप लगे थे। इसके बाद जेल प्रबंधन ने दोनों को अस्पताल वार्ड से बैरक में शिफ्ट कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद गिरिबाला की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट है। अतिरिक्त प्रहरी तैनात किए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों भी बढ़ाए गए हैं। सुरक्षा बढ़ाने की वजह यह बताई जा रही है कि गिरिबाला ने जज रहते हुए जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से 29 इसी जेल में बंद हैं। गिरिबाला 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल जिला कोर्ट में जज रही थीं। केस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
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