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    कभी काबा से सुर्खियों में आईं तो कभी खेला होबे के तेवर से मिली जेल..अब सत्ता की गोद में जा बैठीं सयोनी घोष कौन हैं?

    3 hours ago

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    Who is Saayoni Ghosh: पश्चिम बंगाल की सियासत बदलने के साथ ही और सत्ता परिवर्तन के बाद से टीएमसी के लिए दिन ब दिन मुश्किलें खड़ी होती जा रही हैं. ऐसे में अभी फिलहाल राज्य का सबसे चर्चित चेहरा और टीएमसी से बगावती हुई सयानी घोष कभी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बेहद ही खास मानी जाती रही थीं. लेकिन अब वह उन सांसदों में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने पत्र लिखकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से सदन में अलग बैठने की मांग की है, साथ ही एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है. 17 साल की उम्र में बंगाल फिल्मी दुनिया में कदम सयानी घोष पेशे से बंगाल फिल्म इंडस्ट्री का नामचीन चेहरा रह चुकी हैं. उन्होंने 17 साल की उम्र में बंगाली फिल्मी दुनिया में एंट्री की. इसके बाद उन्हें एक शानदार कलाकार की पहचान राज्य में मिली. इसके बाद 28 साल की उम्र में उन्होंने राजनीति में कदम रखा. वह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की भरोसेमंद नेताओं में से एक मानी जाती रहीं. उनके भाषण भी लोकसभा में सुर्खियां बटोर चुके हैं. एक्टर सयानी किस वक्त राजनीति में आ गए, इसके पीछे उनके जीवन की पटकथा को खंगाला जरूरी है. उन्होंने बंगाल फिल्मों में काम करने के बाद टॉलीवुड में अपनी छाप छोड़ी. 2011 में फिल्म शत्रु में उन्होंने एक अहम रोल निभाया. इसने उन्हें काफी बड़ा बना दिया. सयानी थियेटर से लेकर फिल्में करती रहीं, यही खासियत ने एक लोकप्रिय कलाकार की तरह उनकी छवि को विकसित किया. 2021 में सयानी ने पॉलिटिक्ल एंट्री की. वह एक युवा नेता के तौर पर टीएमसी से जुड़ीं. टीएमसी के 19 बागी सांसदों की लिस्ट आयी सामने, सयानी घोष-शत्रुघ्न सिन्हा समेत जानें किस-किसका नाम 2021 में चुनाव लड़ा, 2024 में हार का करना पड़ा सामना सबसे पहले साल 2021 में उन्होंने आसनसोल विधानसभा से चुनाव लड़ा. वहां वो बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल से हार गईं. लेकिन राजनीति में कदम रखने के बाद भी सयानी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह चर्चा में तब आईं, जब त्रिपुरा में बीजेपी की एक नुक्कड़ सभा के दौरान उन्होंने खेला होबे का नारा लगाया. इसी पर उन्हें त्रिपुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उनपर अगरतला में एक मुकदमा दर्ज किया गया. ममता बनर्जी ने तराशा, अब बगावत गुट में शामिल राजनीतिक चपलता को देखते हुए ममता बनर्जी ने उन्हें टीएमसी की यूथ विंग का प्रेसीडेंट बनाया. इसके बाद पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले में उनका नाम आया. ईडी ने 10 घंटे उनसे पूछताछ की. इसके बाद 2024 में ममता बनर्जी ने उन्हें जादवपुर संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया. यहां से सयानी सांसद बनीं. उन्होंने कई बार मोदी सरकार को लोकसभा में अपने भाषण के दौरान जमकर घेरा है. उनके भाषण ने लोगों की तरफ ध्यान खींचा. इस बार के विधानसभा चुनाव में भी सयानी घोष क्राउड पुलर की भूमिका में टीएमसी का प्रचार करती रहीं. उनकी सभाओं में भारी भीड़ आती थी. उनकी गाई बंगाली नज्म लोगों के बीच चुनाव के दौरान लोकप्रिय बनी. इसका मतलब मेरे दिल में काबा है, आंखों में मदीना है. हालांकि, सयानी के इस गीत को विरोधी पक्ष ने तुष्टीकरण बताया. राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक ट्विटर पर शिवलिंग का आपत्तिजनक तस्वीर को साझा किया था. जिसपर उन्हें काफी ट्रोल किया था. हालांकि राजनीति में आने के बाद उन्होंने माफी मांग ली थी. सयानी उस गुट में शामिल हैं, जो संसदीय नेता के तौर पर अभिषेक बनर्जी को हटाने की मांग कर रहा है. सायनी घोष ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ! कभी बताया था भविष्य का PM अब बागी सासंदों के साथ खड़ीं
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