क्यों $5 ट्रिलियन GDP का टारगेट नहीं छू पाया देश, किसने तोड़ा भारत का सपना? समझें कारण
11 hours ago
India 5 Trillion Dollar GDP Target: भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बीच 5 ट्रिलियन डॉलर (5 लाख करोड़ डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था, जो पूरा नहीं हो पाया है. साल 2026 के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था इस वक्त लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर है. यानी कि भारत अपने तय किए गए लक्ष्य से करीब 850 अरब डॉलर पीछे है. हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2025-26 में भारत की जीडीपी 2018-19 के 189 लाख करोड़ से लगभग दोगुना 346 लाख करोड़ रुपये है. फिर भी 2019 में भाजपा के संकल्प पत्र में तय किए गए लक्ष्य को पूरा करने में कहां दिक्कतें आ रही हैं? आइए जानते हैं. क्यों टूट रहे हैं सपने? जीडीपी के लक्ष्य को अमेरिकी डॉलर में मापा जाता है. 2019 में जब जीडीपी को 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट सेट किया गया था, तब डॉलर के मुकाबले रुपया 70 के आसपास था. यानी एक अमेरिकी डॉलर 70 रुपये के बराबर थी. अब यही रुपया टूटकर डॉलर के मुकाबले 95.63 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है. घरेलू स्तर पर अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद डॉलर के टर्म में भारत की जीडीपी का साइज छोटा हो जाता है. साल 2020 में कोरोना महामारी के दौर में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर -5.8% के स्तर पर चली गई थी. वैश्विक महामारी के चलते साल 2020 और 2021- इन दो सालों में अर्थव्यवस्था को इतना नुकसान पहुंचा कि इससे उबरने में लंबा वक्त लग गया. कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें ईरान-अमेरिका में जंग, पश्चिम एशिया में तनाव और फलस्वरूप होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए एनर्जी सप्लाई रुकने की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के रेंज को पार कर चुकी है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल दूसरे देशों से आयात करता है. ऐसे में कच्चा तेल के महंगा होने से आयात पर पहले के मुकाबले खर्च बढ़ जाता है, विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से कम होता जाता है, जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ता है. कुल मिलाकर रुपये पर दबाव बढ़ता जाता है और डॉलर के मुकाबले उसकी वैल्यू कम होती जाती है. एक्सपोर्ट की धीमी रफ्तार रूस-यूक्रेन में जंग और इधर मिडिल-ईस्ट में तनाव के चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है. वैश्विक मांग घटने की वजह से भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाया, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी ग्रोथ हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कब 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचेगी भारत की इकोनॉमी? यह ग्रोथ और एक्सचेंज दोनों पर निर्भर करता है. वर्तमान समय में भारत 6.5%-6.6% की वार्षि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है. SBI रिसर्च और मुख्य आर्थिक सलाहकार के लगाए गए अनुमान के मुताबिक, अगर रुपया 95 डॉलर के स्तर पर स्थिर रहता है, तो भारत वित्त वर्ष 2028-29 या 2029-30 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के इस मील के पत्थर को आसानी से हासिल कर सकता है. ये भी पढ़ें: EU Ban: रूस से दोस्ती पड़ी भारी! यूरोपियन यूनियन ने भारत-चीन की कंपनियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध
Click here to Read more

.png)