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    Sleep Cycle For Women: रात 11 बजे के बाद जागना पड़ सकता है भारी, महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर

    5 hours ago

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    Sleep Cycle For Women: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं घर, नौकरी और परिवार सब संभालते-संभालते खुद की नींद से सबसे ज्यादा समझौता करती हैं. रात को देर तक मोबाइल, काम या घर के काम और फिर सुबह जल्दी उठना. यह सिलसिला हर रोज चलता रहता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि यह अधूरी नींद सिर्फ थकान नहीं, बल्कि आपके पीरियड्स, आपके शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का लेवल, शरीर में इंसुलिन कि कार्य क्षमता और मां बनने की क्षमता तक को नुकसान पहुंचा सकती है? डॉक्टरों का कहना है कि रात 11 बजे से पहले सो जाना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद जरूरी है और इसे नजरअंदाज करना धीरे-धीरे शरीर के अंदर कई परेशानियां पैदा करता है. नींद और हार्मोन्स का सीधा रिश्ता हमारा शरीर एक घड़ी की तरह काम करता है और नींद उस घड़ी की चाबी है. विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं के हार्मोंस और उनकी नींद का आपस में बहुत गहरा नाता है. आप रात में कुल कितने घंटे सोते हैं, यह तो जरूरी है ही. लेकिन आप किस समय पर सोते हैं, यह बात भी उतनी ही जरूरी है. साथ ही दिमाग का वही हिस्सा जो नींद और जागने के हार्मोन्स को कंट्रोल करता है, वही हिस्सा महिलाओं में ओवुलेशन यानी अंडे बनाने की प्रक्रिया को भी चलाता है. ओवुलेशन को शुरू करने वाला हार्मोन LH यानी Luteinizing Hormone गहरी नींद के दौरान बनता है. अगर नींद में बार-बार रुकावट आए तो LH का बनना कम हो जाता है जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ओवुलेशन छूट सकता है. यह भी पढ़ेंः Nipah Outbreak in Kerala: केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक? कम नींद से क्या-क्या हो सकता है जानकर चौंक जाएंगी जब महिलाएं अच्छी नींद नहीं लेती हैं या गलत समय पर सोती हैं, तो इसका सीधा असर उनके उन हार्मोन्स पर पड़ता है जो मां बनने की क्षमता को संभालते हैं. यानी एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मेलाटोनिन, कोर्टिसोल, LH और FSH का संतुलन बिगड़ जाता है. इनमें से मेलाटोनिन हार्मोन महिलाओं के अंडों की क्वालिटी को अच्छा रखता है और उन्हें सुरक्षित रखता है, लेकिन नींद की कमी के कारण यह ठीक से नहीं बन पाता है. दूसरी तरफ, पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिसे मुख्य रूप से तनाव का हार्मोन कहा जाता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने के कारण दिमाग और ओवरी के बीच का आपसी संपर्क टूट जाता है, जिससे एलएच (LH) और एफएसएच (FSH) हार्मोन का बहाव रुक जाता है. ये दोनों हार्मोन अंडाशय में अंडों को विकसित करने और उन्हें सही समय पर बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो, कम सोने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन बढ़ते हैं और अंडों को सुरक्षित रखने वाले हार्मोन कम हो जाते हैं, जिससे महिलाओं को आगे चल कर कंसीव करने या प्रेगनेंसी में परेशानी आ सकती है. महिलाओं को कितनी नींद लेनी चाहिए डॉक्टर्स के अनुसार, 7 से 8 घंटे की नींद महिलाओं की प्रजनन सेहत के लिए सबसे सही मानी जाती है. American Society of Reproductive Medicine के एक अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं इतने घंटे सोती थीं उनमें गर्भधारण की संभावना उन महिलाओं से काफी ज्यादा थी जो 7 घंटे से कम या 9 घंटे से ज्यादा सोती थीं. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात 11 बजे तक जरूर सो जाए. यह भी पढ़ेंः Daily Walking Distance: एक दिन में कितने किलोमीटर चलना होता है ठीक, इससे ज्यादा चले तो कितना खतरा?
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