Smart Prepaid Meter: यूपी में प्रीपेड मीटर का नया दौर, करोड़ों घरों में लगेंगे स्मार्ट बिजली मीटर, 3000 करोड़ खर्च करेंगे अडानी
3 days ago
Smart Prepaid Meter: दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) को अर्जेंटीना के पहले LNG एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट मिला है. जिसके बाद कंपनी ने एक और बड़ा दांव खेला है. अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एनर्जी सोल्यूशंस लिमिटेड (AESL) अब उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने जा रही है. 3 हजार करोड़ का दांवदरअसल अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने भारत की स्मार्ट मीटर कंपनी इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को 3,050 करोड़ रुपये में खरीदने के लिए समझौता किया है. इस सौदे के तहत अडानी कंपनी इंटेलीस्मार्ट की पूरी 100 प्रतिशत की हिस्सेदारी अपने नाम करेगी. हालांकि, इस डील को पूरा होने से पहले कुछ जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिलना बाकी हैं. ये भी पढ़ें: इस मल्टीबैगर स्टॉक पर आया मोतलाल ओसवाल का दिल, 5 साल में 690% रिटर्न देकर निवेशकों को बनाया मालामाल उत्तर प्रदेश समेत इन राज्यों में लगेंगे स्मार्ट मीटरइंटेलीस्मार्ट, नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की पार्टनर कंपनी है. ये कंपनी उत्तर प्रदेश के लाखों घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स लगाने जा रही है. ना केवल यूपी बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और असम जैसे राज्यों में भी ये स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे. ये मीटर लगाए जाने का उद्देश्य है कि देशभर में बिजली वितरण कंपनियां बिलिंग व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके, बिजली चोरी व नुकसान को कम किया जा सके. इससे स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत पर रियल टाइम नजर रखना भी आसान होता है. स्मार्ट मीटर कारोबार होगा बड़ाAESL के इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को टेकओवर करने के बाद कंपनी का स्मार्ट मीटर कारोबार काफी बड़ा हो जाएगा. कंपनी के पास पहले से मौजूद और नए जुड़े स्मार्ट मीटरों को मिलाकर कुल संख्या 4.7 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी. इसके साथ ही अडानी एनर्जी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी बन जाएगी. अडानी एनर्जी के लिए ये सौदा उसके पारंपरिक ट्रांसमिशन कारोबार से आगे बढ़कर तकनीक आधारित ऊर्जा सेवाओं में विस्तार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है. कंपनी का कहना है कि इससे परिचालन क्षमता बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर काम करने से रखरखाव की लागत भी कम होगी. ये भी पढ़ें: 8वां वेतन आयोग: क्या पेंशन कर पाएगी सैलरी की बराबरी? पेंशनर्स ने उठाई बड़ी डिमांड
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