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    TMC के 19 बागी लोकसभा सांसदों में शत्रुघ्न सिन्हा-यूसुफ पठान:ममता की करीबी सयोनी भी; अब तक 58 विधायक, 2 राज्यसभा सांसद अलग हुए

    9 hours ago

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    ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में लगातार टूट जारी है। न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, काकोली घोष के नेतृत्व वाले टीएमसी बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों के नाम की लिस्ट जारी कर दी। इसमें ममता की करीबी मानी जाने वाली जादवपुर से सांसद सयोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा का भी नाम शामिल है। 8 जून को काकोली घोष ने दावा किया था कि उन्होंने 20 लोकसाभा सांसदों के समर्थन वाला पत्र स्पीकर ओम बिरला को भेजा है। बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले 3 दिनों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी। इसके बाद टीएमसी के लोकसभा में 28 में से 20 सांसद और राज्यसभा में 13 में से 2 सांसद यानी कुल 22 सांसद टूट चुके हैं। 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने के लिए स्पीकर को पत्र दिया था। ऋतब्रत ने बुधवार को कहा कि हमारे पास 64 विधायक हैं। बाकी के 6 विधायक भी स्पीकर को चिट्ठी सौंपेंगे। पार्टी छोड़ने के बाद सुष्मिता बोलीं- अब मैं आजाद हूं सवाल: आपने टीएमसी पार्टी छोड़ दी है, क्या वजह है? जवाब: मैं सिर्फ अपने बारे में जवाब दे सकती हूं। मैंने टीएमसी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा सीट मुझे पार्टी ने ही दी थी। अब अगर पार्टी छोड़ रही हूं तो राज्यसभा की सीट भी छोड़नी चाहिए। मेरे कुछ पर्सनल और राजनीतिक कारण हैं। सवाल: टीएमसी में आने वाले समय में और इस्तीफे हो सकते हैं? जवाब: कौन क्या कर रहा है या करने वाला है। मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं। मैं बंगाल की राजनीति से सीधे तौर पर नहीं जुड़ी हूं। मैं असम से हूं। सवाल: आपने हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की है, क्या कहना है? जवाब: देखिए, अब मैं आजाद हूं। हिमंता जी के साथ मेरे कांग्रेस के समय से अच्छे संबंध हैं। मैंने बस एक औपचारिक मुलाकात की। सवाल: क्या अब आप भाजपा जॉइन करने वाली हैं? जवाब: देखिए अब कुछ दिन रिलैक्स रहूंगी। कल मैं असम जा रही हूं, अपनी बहनों और माता जी से मिलने। राहुल गांधी से मिले अभिषेक बनर्जी इस बीच ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। एक दिन पहले ममता सोनिया गांधी से मिलीं थीं। मुलाकात के बाद अब ममता कोलकाता लौट चुकी हैं। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 19 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से दो सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 11 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीतीं थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। TMC बचाने के लिए ममता-अभिषेक की 3 कोशिशें… TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे। दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है। संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है। ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है। नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है। INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी? आने वाले दिनों में असली लड़ाई सिर्फ विधायकों की संख्या की नहीं, बल्कि पार्टी के नाम, संगठन और राजनीतिक विरासत की होगी। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… TMC नेता जहांगीर खान नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार: अवैध वसूली का आरोप पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने सोमवार को TMC नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी नेपाल बॉर्डर के पास से हुई। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फालता पुलिस स्टेशन में खान के खिलाफ 7 FIR की गई थीं। पूरी खबर पढ़ें…
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