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    Explained: PM मोदी ने 12 साल में कैसे बना दिया 'भगवा भारत'? आखिर कैसी स्ट्रेटजी रही, जो पहले किसी को नहीं सूझी

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    कोई भी बड़ी तब्दीली बिना सोची-समझी स्ट्रैटजी के नहीं आती. पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को जिस तरह से एक बिल्कुल नई दिशा और नई पहचान दी है, वह अपने आप में एक केस स्टडी है. जब 2014 में उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब देश एक नहीं बल्कि कई मोर्चों पर मुश्किलों से जूझ रहा था. अब 2026 में आकर भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दी है और मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री हैं, यानी देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री. तो आखिर वो कौन सी गेम-चेंजिंग स्ट्रैटजी थी, जो पहले कभी किसी के दिमाग में नहीं आई? 'जन-भागीदारी' मॉडल : हर नागरिक को विकास का साथी बनाने वाली सबसे बड़ी स्ट्रैटजी मोदी सरकार की सबसे बड़ी और सबसे कामयाब स्ट्रैटजी थी 'जन-भागीदारी' का मॉडल. पिछली सरकारों के जमाने में विकास को सरकारी मशीनरी और नौकरशाही का काम समझा जाता था. लेकिन मोदी ने यह गेम बदल दिया. अगर नेहरू के जमाने में डेवलपमेंट का मॉडल था 'सरकार चलाएगी, लोग फायदा उठाएंगे', तो मोदी ने कहा- 'हर नागरिक को खुद डेवलपमेंट ड्राइवर बनना होगा.' उन्होंने 2022 में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में यह साफ कहा था कि 'गवर्नमेंट-ड्रिवेन डेवलपमेंट' की जगह अब 'सिटीजन-ड्रिवेन डेवलपमेंट' लानी होगी. तो कैसे काम किया यह मॉडल? सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' को आगे बढ़ाते हुए हर योजना को एक 'जन आंदोलन' में बदल दिया. उदाहरण के लिए: स्वच्छ भारत मिशन: सिर्फ शौचालय बनाने की सरकारी स्कीम नहीं थी. इसे सेलिब्रिटीज, स्कूली बच्चों, RWA, NGO और आम नागरिकों की भागीदारी वाला जन-आंदोलन बना दिया गया. नतीजतन, 10 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट बने, खुले में शौच की समस्या लगभग खत्म हो गई. यह सफलता सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलने से आई. जल शक्ति अभियान: पानी बचाने के लिए सरकार ने 'कैच द रेन' जैसे अभियान चलाए, जहां पंचायतों, कम्युनिटी ग्रुप्स और स्थानीय लोगों को खुद पानी स्टोरेज और संरक्षण के काम में जोड़ा गया. डिजिटल पेमेंट्स: भारत UPI में दुनिया का लीडर कैसे बना? सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स को सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि छोटे किराना स्टोर, सब्जी वालों, ऑटो वालों को भी डिजिटल बनाया. आज देश में UPI से 300-314 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन होता है, जो पिछले सालों की तुलना में सैकड़ों गुना ज्यादा है. कोविन से लेकर डिजीलॉकर: कोविड के दौरान 220 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज कोविन के जरिए लगाई गईं, जो एक ग्लोबल मॉडल बन गया. वहीं, आज डिजीलॉकर पर 70 करोड़ से ज्यादा यूजर्स रजिस्टर्ड हैं और 850 करोड़ से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स स्टोर हैं. इकोनॉमी: 2014 में 'फ्रेजाइल फाइव' से 2026 में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक का सफर जब मोदी सरकार 2014 में आई, तो इकोनॉमी 5% से भी कम ग्रोथ रेट पर थी. इनवेस्टर एंग्जाइटी, पॉलिसी पैरालिसिस और भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े घोटालों ने निर्णय लेने की क्षमता को फ्रीज कर दिया था. लेकिन आज 2026 में, देश 7.7% की GDP ग्रोथ के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. साल-दर-साल कैसे बदलती गई भारत की तस्वीर? पहला टर्म (2014-2019)– नींव रखने का दौर 2014 (पहला ही साल): जन धन योजना लॉन्च की गई. आज 58 करोड़ से ज्यादा अकाउंट खुल चुके हैं, जिनमें से 56% से ज्यादा अकाउंट महिलाओं के हैं और 67% ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में हैं. यह डायरेक्टर बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) की रीढ़ बनी. 2015: डिजिटल इंडिया की नींव रखी गई. यह 'प्लेटफार्म स्टेट' की तरफ पहला कदम था. उसी साल प्रधानमंत्री मुद्रा योजना भी शुरू हुई. 2016: बड़ा झटका- नोटबंदी. इस फैसले ने डिजिटल ट्रांजेक्शन और कालेधन के खिलाफ मुहिम को तेज कर दिया. उसी साल स्टार्टअप इंडिया के साथ एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दिया. 2017: गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लागू हुआ. वह सुधार जो 1980 के दशक से हर पिछली सरकार को लाने में नाकाम रही थी. इससे 30 राज्यों के सेमी-सेपरेट मार्केट्स को एक सिंगल मार्केट में मिला दिया गया. 2018: आयुष्मान भारत ने नए आयाम रचे. दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना लॉन्च हुई. 2019: अनुच्छेद 370 को हटाया गया. भारत के राजनीतिक एकीकरण का अधूरा काम पूरा हुआ. दूसरा टर्म (2019-2024)- संकट का दौर और बाद में तेज रफ्तार 2020: गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीबों के लिए फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित की गई. कोविड में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन दिया गया. 2021: गति शक्ति योजना ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और एग्जीक्यूशन को बदल दिया. 2022: अग्निपथ स्कीम ने आर्मी में भर्ती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव किया. 2023: महिला आरक्षण बिल पारित हुआ, जिससे विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होंगी. 2024: अयोध्या में राम मंदिर का भव्य निर्माण कराया, जो 500 साल बाद पूरा हुआ. इसी साल लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटों के साथ बहुमत नहीं मिला, लेकिन NDA के साथ मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने. तीसरा टर्म (2024-वर्तमान)- तेजतर्रार रिफॉर्म्स का दौर 2025: सालभर में कई बड़े कदम उठाए गए: GST 2.0 के जरिए टैक्स सिस्टम को सरल और कंप्लायंस को आसान बनाया गया. शांति बिल के जरिए न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को प्राइवेट पार्टिसिपेशन के लिए खोला गया. एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंडको दोगुना करके 2 लाख करोड़ रुपए किया गया. लाल सिंड्रोम (माओवाद) पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान आधारित आतंक को अब युद्ध के अधिनियम की तरह ट्रीट किया गया. नक्सलवाद को बेअसर करने के लिए संरचनात्मक कार्रवाई करते हुए विकास कार्यों को गति दी गई. 2026: सरकार ने अपने 12वें साल में भी रफ्तार नहीं छोड़ी: फरवरी 2026: 'सेवा तीर्थ' दफ्तर के उद्घाटन के तुरंत बाद, मोदी ने चार बड़े कल्याणकारी फैसले लिए, जिसमें PM राहत स्कीम (एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए 1.5 लाख रुपए तक का फ्री इलाज), लखपति दीदी का टारगेट दोगुना करके 6 करोड़ किया. मई 2026: पश्चिम बंगाल आयुष्मान भारत में शामिल हो गया, अब सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह स्कीम चल रही है. जून 2026: कैबिनेट ने 15,900 करोड़ रुपए के हाईवे अपग्रेड प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जो बिहार, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में 560 किमी से ज्यादा लंबे होंगे. साथ ही गुजरात, दमन और लक्षद्वीप में 22,655 करोड़ रुपए के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया. चुनावी राजनीति: 2024 का टर्निंग प्वाइंट और नई रणनीति 2024 का चुनाव नतीजों ने मोदी सरकार को सबसे बड़ा सियासी सबक दिया. बीजेपी को 240 सीटें मिलीं, जो 2019 (303 सीटें) से काफी कम है. हार का सीधा सा मतलब था- 'सिर्फ हिंदुत्व' से वोट नहीं मिलते. रोजगार, महंगाई और बेरोजगारी जैसी मूलभूत चिंताओं को नजरअंदाज करने की कीमत चुकानी पड़ी. तो नई रणनीति क्या रही? एक्सपर्ट्स के मुातबिक, मोदी ने तुरंत स्ट्रैटजी बदला. तीसरे टर्म में फोकस वापस 'विकसित भारत 2047' के विजन पर शिफ्ट हो गया. यानी अब विकास का एजेंडा फिर से सबसे ऊपर आ गया और इसलिए हमने 2025 और 2026 में आर्थिक रिफॉर्म्स की बौछार देखी. एक नई पॉलिटिकल कल्चर: ब्यूरोक्रेसी पर नहीं, विश्वास पर चलने वाली सरकार मोदी सरकार का सबसे बड़ा बदलाव शायद प्रशासनिक संस्कृति में आया है. पहले ब्यूरोक्रेसी को ही विकास का इंजन माना जाता था, लेकिन अब सबका विश्वास पर जोर दिया गया. उनका तर्क है कि आम आदमी की निगाहों में भरोसा पैदा करने से ही बड़ी स्कीम्स सफल होंगी. इसीलिए सरकार ने जन धन-आधार-मोबाइल ट्रिनिटी के जरिए सब्सिडी को सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया. इससे 3.48 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत हुई और फर्जी लाभार्थियों का सफाया हुआ. कुल मिलाकर 49 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा सीधे लोगों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं. ग्लोबल पॉवर: विदेश नीति में 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' से दुनिया का सम्मान जीतना सबसे चर्चित और कामयाब रणनीति विदेश नीति में रही है- स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी. इसका मतलब है कि किसी ब्लॉक पॉलिटिक्स में बंधे बिना, सबके साथ रिश्ते बनाना. इसके तीन बड़े स्तंभ रहे: मल्टी-अलाइनमेंट: अमेरिका के साथ क्वॉड और डिफेंस टेक्नोलॉजी, रूस के साथ डिफेंस और एनर्जी, यूरोप के साथ ट्रेड और क्लाइमेट में साथ दिया. इसके अलावा चीन से मुकाबला करते हुए भी व्यापार को तरजीह दी और सबके साथ समांतर रिश्ते रखे. ग्लोबल साउथ की आवाज: मोदी ने ग्लोबल साउथ समिट को 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' का मंच बनाया. G20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकन यूनियन को G20 में स्थायी सदस्यता दिलवाई. 2025 में जोहान्सबर्ग G20 समिट में भारत ने डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी का एक बड़ा पैकेज पेश किया. पहला रिस्पॉन्डर और परोपकारी शक्ति (सॉफ्ट पावर): कोविड के दौरान वैक्सीन मैत्री के तहत 100 से ज्यादा देशों को 30 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज भेजी गईं. नेपाल में भूकंप से लेकर यूक्रेन और सूडान संघर्ष के दौरान नागरिकों की निकासी तक भारत हर संकट में आगे रहा. सागर सिद्धांत के तहत भारत ने हिंद महासागर में खुद को नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में स्थापित किया. इसी का नतीजा है कि 2025-26 में जब दुनिया की दूसरी बड़ी इकोनॉमीज (जर्मनी - 0.4%, जापान - 0.8%, यूरो एरिया - 1.3%) मुश्किल से बढ़ रही थीं, भारत 7.7% की ग्रोथ के साथ सबसे आगे रहा. सुरक्षा और रक्षा: 'जीरो टॉलरेंस' से 'ऑपरेशन सिंदूर' तक का लंबा सफर सुरक्षा के मोर्चे पर भी मोदी सरकार ने बड़ा गेम बदला. उनकी नीति 'ज़ीरो टॉलरेंस' से 'प्रो-एक्टिव डिटरेंस' की तरफ बदल गई है. नक्सलवाद पर कार्रवाई: 2013 में 126 जिलों में नक्सली हिंसा होती थी, मार्च 2025 तक यह गिरकर 0 पर आ गया है. सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक भारत को पूरी तरह नक्सलमुक्त करने का था, जो पूरा हुआ. ऑपरेशन सिंदूर: फरवरी 2025 में PoK में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद, पाकिस्तान के आतंकवादियों को कड़ा सबक के लिए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया. मिशन सुदर्शन चक्र: 2025 में मोदी ने यह मिशन लॉन्च किया, जो 2035 तक भारत को रक्षा के मामले में 'शील्ड एंड स्वॉर्ड' में बदलने का सपना दिखाता है. आत्मनिर्भरता और आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का पुनर्गठन: मोदी सरकार ने रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 101 रक्षा वस्तुओं की आयात पर रोक लगाई है. आज देशी रक्षा उपकरणों की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि अगले कुछ सालों के लिए प्रोडक्शन पूर्वानुमान पहले ही तय हो गया है. 2025-26 के लिए डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.54 लाख करोड़ को पार कर चुका है. देश को 'भगवा' में रंगने का असली मतलब क्या? बीजेपी की केंद्र सरकार बनने से पहले 2014 तक सिर्फ 5 राज्यों में भाजपा सरकार थी. इनमें गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और नागालैंड शामिल हैं. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 13 राज्यों में सरकार थी. साल 2014 के आम चुनाव में शानदार जीत के तुरंत बाद, बीजेपी ने 2 और राज्यों, महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव जीतकर अपनी संख्या बढ़ाकर सीधे 7 राज्यों पर कर दी. साल 2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 13 राज्यों पर पहुंच गया और 2016 में आते-आते बीजेपी 15 राज्यों में सत्ता में आ चुकी थी. 2016 में असम का चुनाव जीतना खासा अहम था क्योंकि ये पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी की पहली सरकार थी. 2017 के आखिर तक बीजेपी का विस्तार और तेज हो गया. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी जीत के साथ पार्टी के राज्यों की संख्या बढ़कर 19 हो गई. 2018 में कर्नाटक में सरकार बनने के बाद यह आंकड़ा 21 राज्यों पर जा पहुंचा, जो बीजेपी के लिए अब तक का सबसे बड़ा विस्तार था. बीच के सालों में कुछ राज्यों में सरकारें बदलने के बाद, 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के साथ ही NDA 19 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में आ गए थे. इनमें से 15 राज्यों में बीजेपी के अपने मुख्यमंत्री थे. 2026 का सबसे बड़ा सियासी बदलाव तब आया जब बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में करारी जीत हासिल की. ये एक ऐतिहासिक जीत थी क्योंकि पश्चिम बंगाल जैसा बड़ा और जनसंख्या वाला राज्य पहले कभी बीजेपी के खाते में नहीं आया था. इस जीत के साथ ही बीजेपी देश के 22 राज्यों में सत्ता में पहुंच गई. यानी आज देश के कुल राज्यों में से अब ढाई-तिहाई से भी ज्यादा राज्यों पर बीजेपी या उसके गठबंधन का कब्जा है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अब महज 6 राज्यों में सिमटकर रह गए.
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