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    मोदी लगातार सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री:नेहरू के 4398 दिन का रिकॉर्ड तोड़ा; आज NDA में शामिल दलों को संबोधित करेंगे

    18 hours ago

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    नरेंद्र मोदी ने 10 जून को सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। मोदी ने 26 मई 2014 को पीएम पद की शपथ ली थी। आज उनके कार्यकाल के 4399 दिन पूरे हो गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के पास था। वे 4398 दिनों तक इस पद रहे। मोदी का पीएम के तौर पर यह लगातार तीसरा कार्यकाल है। दरअसल, 15 अगस्त 1947 को देश के आजाद होने के बाद जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। वे 15 अगस्त 1947 से 13 मई 1952 तक कुल 1732 दिन पीएम रहे। इसके बाद 1952 में देश में पहला आम चुनाव हुआ। कांग्रेस सत्ता में आई। संसदीय दल ने नेहरू को अपना नेता चुना। इसके बाद नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित पीएम रहे। दिल्ली में आज NDA संसदीय दल की बैठक मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर बुधवार को एनडीए की अहम बैठक होगी। भारत मंडपम में होने वाली बैठक में एनडीए शासित 22 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के सीएम, डिप्टी सीएम, भाजपा नेतृत्व और सहयोगी दलों के प्रमुख नेता शामिल होंगे। बैठक में मोदी के इस रिकॉर्ड पर बधाई प्रस्ताव पारित होगा। इसके साथ ही 'विकसित भारत-2047' के रोडमैप, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, विकास परियोजनाओं, 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। पहले ‘लगातार कार्यकाल’ और ‘कुल कार्यकाल’ में अंतर समझें लगातार कार्यकाल और कुल कार्यकाल में मुख्य अंतर यह है कि कोई पद बीच में छोड़ा ना गया है या नहीं। 1. जब कोई नेता बिना किसी रुकावट के एक ही पद पर बना रहता है, तो उसे लगातार कार्यकाल कहते हैं। उदाहरण: नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 से लगातार भारत के प्रधानमंत्री हैं। इसलिए उनका वर्तमान कार्यकाल लगातार कार्यकाल माना जाएगा। 2. जब किसी नेता ने एक ही पद पर अलग-अलग अवधियों में काम किया हो, तो उन सभी अवधियों को जोड़कर कुल कार्यकाल निकाला जाता है। उदाहरण: अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार देश के पीएम रहे। तीनों अवधि को जोड़कर जो अवधि निकलेगी, वह कुल कार्यकाल मानी जाएगी। मोदी को मिले 31 देश के सर्वोच्च्य सम्मान प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी को अब तक 31 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सबसे पहले 3 अप्रैल 2016 को सऊदी अरब ने 'ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज' सम्मान से नवाजा था। इसी साल मई में नॉर्वे के दौरे के दौरान मोदी को वहां के राजा ने हेराल्ड पंचम ने ‘ग्रांड क्रॉस ऑफ रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया था। इसके अलावा साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र से यूएन चैंपियन ऑफ द अर्थ अवॉर्ड भी मिल चुका है। मोदी ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, समेत दुनिया के 15 देशों की संसद को संबोधित किया है। मोदी सरकार के 13 बड़े फैसले 2025: भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बना साल 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक साबित हुआ। भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। दूसरी तिमाही (Q2) में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 8.2% रही। नवंबर में खुदरा महंगाई दर गिरकर 0.71% पर आई। वहीं, नवंबर में बेरोजगारी दर कम होकर 4.7% रही, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर था। भारत की जीडीपी का कुल वैल्यूएशन तब 4.18 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹350 लाख करोड़) हो गया था। इंटरनेशनल मॉनिटरिंग फंड ने अनुमान लगाया था कि जापान को पीछे छोड़ने के बाद अगले 2.5 से 3 साल में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा और साल 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर (₹655 लाख करोड़) की इकोनॉमी के साथ दुनिया में तीसरे नंबर पर आ जाएगा। मोदी सरकार के 2 फैसले, जिन्हें वापस लिया प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में 2 फैसले ऐसे रहे, जिन्हें विरोध, न्यायिक हस्तक्षेप और अन्य परिस्थितियों की वजह से वापस लेना पड़ा या उनमें बड़ा बदलाव करना पड़ा। 1. तीन कृषि कानून (2020–2021) लागू: सितंबर 2020 वापसी: 19 नवंबर 2021 (घोषणा), 29 नवंबर 2021 (संसद से निरस्तीकरण) सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन नए कानून लागू किए थे। लेकिन इनका किसानों ने विरोध किया। दिल्ली के आसपास करीब एक साल तक आंदोलन चला। इसके बाद पीएम मोदी ने 19 नवंबर 2021 को कानून वापस लेने की घोषणा की। संसद ने 29 नवंबर 2021 को इन्हें औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया। 2. भूमि अधिग्रहण अध्यादेश (2014-2015) लाया गया: दिसंबर 2014 वापसी/समाप्त: अगस्त 2015 सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 में बदलाव के लिए अध्यादेश लाया। विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने इसका विरोध किया। विधेयक लोकसभा से पारित हो गया, लेकिन राज्यसभा में मंजूरी नहीं मिल सकी। लगातार विरोध के बीच सरकार ने अगस्त 2015 में अध्यादेश को आगे नहीं बढ़ाया और उसे समाप्त होने दिया। मोदी के 2 चर्चित कार्यक्रम मोदी के कार्यकाल की 3 तस्वीरें, जो चर्चा में रहीं मोदी का पाकिस्तान दौरा: 25 दिसंबर 2015 को काबुल से दिल्ली लौटते वक्त मोदी ने अचानक पाकिस्तान जाने का प्लान बना लिया। उसी शाम मोदी लाहौर एयरपोर्ट पर उतरे, जहां पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने उनकी अगवानी की।। मोदी नवाज शरीफ के घर भी गए थे। पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक: 5 जनवरी 2022 को पंजाब के फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के समय उनकी सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी। खराब मौसम के कारण पीएम को बठिंडा से सड़क मार्ग से हुसैनीवाला के शहीद स्मारक ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में प्रदर्शनकारियों द्वारा हाईवे जाम करने के कारण उनका काफिला एक फ्लाईओवर पर लगभग 15-20 मिनट तक फंसा रहा था। पापुआ न्यू गिनी के पीएम ने मोदी के पैर छुए: 21 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पापुआ न्यू गिनी पहुंचे थे। वहां के पीएम जेम्स मारेपे ने मोदी के पैर छूकर उनका स्वागत किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी को एयरपोर्ट पर ही गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। इस इंडो पैसिफिक रीजन में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला दौरा था। मोदी सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेताओं में पीएम मोदी के X पर 10 करोड़ 69 लाख फॉलोअर्स हैं। वे दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेताओं में शामिल हैं। पहले नंबर पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और दूसरे नंबर पर डोनाल्ड ट्रम्प हैं। मोदी जब सत्ता में आए थे तब एनडीए 8 राज्यों में थी, अब 22 में मोदी जब 2014 में प्रधानमंत्री बने तब भाजपा और NDA की सिर्फ 8 राज्यों में सरकार थी। 2026 तक 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा या NDA की सरकार हैं। एक आंकड़े के मुताबिक वर्तमान में भाजपा के प्राथमिक सदस्यों की संख्या 14 करोड़ से ज्यादा है। मोदी ने 12 साल में 100 विदेश यात्राएं कीं मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर साल 2014 से अब तक 100 विदेश यात्राएं की हैं। इनमें द्विपक्षीय दौरे और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बैठकें शामिल हैं। मोदी सबसे ज्यादा 8-8 बार अमेरिका, यूएई और जापान गए। अब भाजपा के भविष्य से जुड़े ये 4 सवाल जानिए… 1. 2029 चुनाव: क्या मोदी फैक्टर उतना ही असरदार रहेगा? नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2014 में 282, 2019 में 303 और 2024 में 240 सीटें जीतीं। लगातार तीन चुनावों में मोदी पार्टी का सबसे बड़ा चुनावी चेहरा रहे, लेकिन 2024 के नतीजों ने यह भी दिखाया कि मोदी की लोकप्रियता बरकरार रहने के बावजूद भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। ऐसे में 2029 का बड़ा सवाल यह होगा कि क्या मोदी फैक्टर अकेले भाजपा को फिर से पूर्ण बहुमत तक पहुंचा सकता है या पार्टी को क्षेत्रीय सहयोगियों पर निर्भर होना पड़ेगा। 2. भाजपा की अगली पीढ़ी: क्या राज्यों से निकलेगा नया राष्ट्रीय नेतृत्व? पिछले दो सालों में भाजपा ने राजस्थान में भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश में मोहन यादव, ओडिशा में मोहन चरण माझी और हरियाणा में नायब सिंह सैनी जैसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया। यह भाजपा की दूसरी पीढ़ी तैयार करने की रणनीति का हिस्सा माना जाता है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर अभी भी पार्टी के पास मोदी जैसा सर्वस्वीकार्य चेहरा नहीं है। अगले तीन-चार सालों में इन नेताओं का प्रदर्शन तय करेगा कि भाजपा की अगली पीढ़ी केवल राज्य स्तर तक सीमित रहती है या राष्ट्रीय राजनीति में भी जगह बना पाती है। 3. मोदी के बाद नेतृत्व: उत्तराधिकारी या सामूहिक नेतृत्व? भाजपा ने कभी प्रधानमंत्री पद के लिए औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भी नेतृत्व का चयन चरणबद्ध तरीके से हुआ था। मौजूदा दौर में अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं के नाम चर्चा में आते हैं, लेकिन पार्टी ने किसी एक चेहरे को आगे नहीं बढ़ाया है। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा फिलहाल उत्तराधिकारी तय करने की बजाय विकल्प खुले रखने की रणनीति पर चल रही है। मोदी के बाद नेतृत्व का फैसला व्यक्ति से ज्यादा संगठन और राजनीतिक परिस्थितियां तय कर सकती हैं। 4. मोदी के बाद भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी? 2014 के बाद भाजपा का राष्ट्रीय विस्तार और चुनावी सफलता काफी हद तक मोदी के नेतृत्व से जुड़ी रही है। ऐसे में भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि उसी स्तर का जनसमर्थन को बनाए रखना होगी। 2029 और उसके बाद पार्टी की असली परीक्षा यही होगी कि वह मोदी की लोकप्रियता के साथ-साथ अपने संगठन और शासन के रिकॉर्ड के दम पर कितनी मजबूती से आगे बढ़ पाती है।
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