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    PM मोदी फ्रांस पहुंचे, आज राष्ट्रपति मैक्रों से मिलेंगे:G7 समिट के दौरान 17 जून को ट्रम्प के साथ मीटिंग, 16 महीने बाद पहली मुलाकात

    17 hours ago

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस पहुंच गए हैं। वे आज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। मोदी और मैक्रों के बीच भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर हैं। पीएम बनने के बाद मोदी की यह 7वीं फ्रांस यात्रा है। उनका फ्रांस दौरा दो फेज में होगा। पहले फेज में 13-14 जून तक नीस में रहेंगे। दूसरे फेज में 16 से 18 जून के बीच एवियन में G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 17 जून को G7 समिट के दौरान PM मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। व्हाइट हाउस ने शनिवार को इसकी पुष्टि की है। दोनों नेताओं में 16 महीने बाद आमने-सामने की मुलाकात होगी। दोनों आखिरी बार फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे। मोदी 14 जून की शाम फ्रांस से स्लोवाकिया जाएंगे और 15 जून तक रुकेंगे। इस दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा है। 15 जून को फ्रांस जाएंगे ट्रम्प, मैक्रों-जेलेंस्की से मिलेंगे व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, ट्रम्प सोमवार सुबह अमेरिका से रवाना होंगे। दोपहर में G7 समिट में हिस्सा लेने के लिए पहुंचेंगे। फ्रांस में ट्रम्प की पहली द्विपक्षीय बैठक फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ होगी। इसके बाद वे G7 नेताओं के साथ स्वागत समारोह और डिनर में शामिल होंगे। 16 जून की सुबह ट्रम्प G7 नेताओं और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके बाद उनकी कतर के अमीर (शासक) के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। फिर वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। 17 जून को ट्रम्प मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। फिर वे प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? भारत इनोवेट्स क्या है, जिसका उद्घाटन करेंगे PM 'भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की नया ग्लोबल इनोशिएटिव है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन साल के उद्घाटन के दौरान की थी। इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, IITs, IISc, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संगठनों से जोड़ना है। यह कार्यक्रम 14 से 16 जून तक नीस शहर में पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स (Palais des Expositions) में होगा। इस मेगा समिट का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों करेंगे। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं। इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है। भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था।
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