Rupee Fall: रुपये की गिरती कीमत से टेंशन में सरकार, अब RBI चलाएगा अपना पुराना 'मास्टर स्ट्रोक'
3 weeks ago
Taper Tantrum Playbook: फरवरी से शुरू हुआ ईरान और यूएस का युद्ध, अब तक भी चल ही रहा है. जिसका असर अन्य पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है. भारत भी इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है. जिसके चलते डॉलर के सामने लगातार रुपया की कीमत घटती जा रही है. ऐसे में अब सरकार ने भी अपना पुराना 'मास्टर स्ट्रोक' खेलने की प्लानिंग कर ली है. RBI का पुराना मास्टर स्ट्रोकदरअसल रुपये की लगातार गिरती हुई कीमत को देखते हुए अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस संकट से बचने के लिए अपना पुराना दाव खेलने का मन बना लिया है. RBI अब रुपये को संभालने के लिए साल 2013 में आर्थिक संकट के दौरान अपनाए गए तरीकों को फिर से इस्तेमाल कर सकता है. इस बारे में खुद RBI के गवर्र संजय मल्होत्रा ने बताया है. ये भी पढ़ें: Petrol-Diesel News: किसी पंप पर टैंकर नहीं पहुंचा तो कहीं लग गई लिमिट... लोगों में पैनिक बढ़ा, अब सफर से पहले सावधान संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग न्यूज के साथ बातचीत में बताया है कि, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में बैंक करेंसी को स्टेबल करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि, एडिशनल करेंसी की अदला-बदली और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तरीकों पर विचार कर रहा है. क्या है टैपर टैंट्रम प्लेबुक?जब अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक जब बाजार में पैसा डालना बंद कर देता है, तब विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों में पैसा डालना बंद कर देते हैं. जिससे रुपया कमजोर हो जाता है, शेयर बाजार में गिरावट आती है, डॉलर महंगा हो जाता है, भारत पर आर्थिक दबाव बनता है. ऐसी स्थिति साल 2013 में बनी थी, तब RBI ने 'टैपर टैंट्रम प्लेबुक' नीति अपनाई थी. इसमें RBI डॉलर को बेचकर रुपया संभालता है, ब्याज दरें बढ़ा देता है. 2013 में भी अपनाई थी यही रणनीतिबता दें कि सरकार ने साल 2013 में भी यही रणनीति अपनाई थी. जब उस दौर में आर्थिक संकट से देश जूझ रहा था, तब भी टैपर टैंट्रम प्लेबुक का सहारा लेकर देश में डॉलर को बेचकर रुपये को संभाला गया था. अब RBI इस योजना के तहत अपने डॉलर बेचेगा जिससे डॉलर की कमी ना हो और रुपये में गिरावट ना आए. ये भी पढ़ें: Share Market Today: बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच संभला सेंटीमेंट, GIFT Nifty में 130 अंकों की तेजी, एशियाई बाजारों से मिला सहारा
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