Pillow of Bang Ki Rui : आजकल लोगों के सिर में दर्द और शोल्डर में परेशानी आम बात है. इसके कई कारण होते हैं लेकिन एक यह भी कारण है कि आजकल तकिया फाइबर वाला आ गया है जिससे शोल्डर के मसल्स में हार्डनेस आ जाता है. मिथलांचल में इसका तोड़ है. दरअसल, वहां एक ऐसी रूई का इस्तेमाल तकिया बनाने में किया जाता है जो बेहद शुद्ध और मेडिकेटेड होता है. इसे बांग की रूई भी कहा जाता है. बांग की रूई से जनेउ भी बनाय जाता है. मिथिलांचल के लगभग हर घर के आंगन में बांग की रुई का एक छोटा सा पौधा जरूर देखने को मिल जाता है. आम रुई का इस्तेमाल चेहरे को साफ करने, प्लास्टर करने या गद्दे-तकिए भरने में होता है, लेकिन मैथिल संस्कृति में बांग की रुई को सबसे पवित्र और शुद्ध माना जाता है. इस छोटे से पेड़ में दो साल के भीतर ही रुई आने लगती है, जिसके पकने पर घर के बुजुर्ग इसे तोड़कर धूप में सुखाते हैं. इसके बाद इसका इस्तेमाल होता है.
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