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    US में 4% के पार हुई इन्फ्लेशन, इस महंगाई से भारतीय शेयर बाजार और RBI पर क्या होगा असर?

    7 hours ago

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    US inflation Effects On India: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में महंगाई एक बार फिर 4% के पार पहुंच गई है. इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की चिंता बढ़ गई है. अब सवाल यह है कि अमेरिका की बढ़ती महंगाई का असर भारत पर कितना पड़ेगा और आरबीआई को इससे क्या चुनौतियां मिल सकती हैं. इसके बारे में आप डिटेल में यहां से समझ सकते हैं. क्यों अहम है अमेरिका की महंगाई? अमेरिका की अर्थव्यवस्था का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ता है. जब वहां महंगाई बढ़ती है तो फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है. इससे वैश्विक निवेशकों की रणनीति बदल जाती है और उभरते बाजारों, जैसे भारत, पर भी असर पड़ता है. लोन लेने में कौन आगे, Gen Z, मिलेनियल्स या बुजुर्ग? रिपोर्ट में भारत के सबसे बड़े कर्जदारों का खुलासा भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर? अगर अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. खासकर बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है. रुपये पर भी बढ़ सकता है दबाव अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों का एक असर डॉलर पर भी पड़ता है. डॉलर मजबूत होने पर भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है. कमजोर रुपये से कच्चे तेल समेत कई आयातित सामान महंगे हो जाते हैं, जिससे भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. RBI के लिए क्यों बढ़ेगी चुनौती? अगर अमेरिका में महंगाई ऊंची बनी रहती है और डॉलर मजबूत होता है तो RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान नहीं होगा. केंद्रीय बैंक को महंगाई और रुपये दोनों पर नजर रखनी पड़ेगी. यानी अगर भारत में महंगाई नियंत्रण में भी रहे, तब भी वैश्विक परिस्थितियां RBI के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं. खुशखबरी! पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, जानें 1 लीटर पर आपको होगा कितने रुपये का फायदा आम लोगों पर क्या होगा असर? अमेरिकी महंगाई का असर सीधे भारतीय उपभोक्ताओं पर नहीं दिखता, लेकिन इसके प्रभाव जरूर पड़ सकते हैं. रुपये में कमजोरी आने पर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं. वहीं शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने से निवेशकों की चिंता भी बढ़ सकती है. निवेशकों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है. मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि का निवेश जारी रखना बेहतर रणनीति हो सकती है. अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर अमेरिका में महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो फेड ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है. इसका असर दुनिया भर के बाजारों, विदेशी निवेश और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा.
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