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    उत्तराखंड के शूटर जसपाल राणा का निधन:जर्मनी से लौटते वक्त फ्लाइट में तबियत बिगड़ी; देहरादून पहुंचा पार्थिव शरीर

    12 hours ago

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    पद्मश्री से सम्मानित दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का पार्थिव शरीर देहरादून स्थित उनके आवास पहुंच गया है। अंतिम दर्शन के लिए उनके शिष्य, खिलाड़ी, राजनीतिक हस्तियां और बड़ी संख्या में लोग वहां लगातार पहुंच रहे हैं। जौनसार-बावर क्षेत्र से भी लोगों के देहरादून पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। 49 वर्षीय जसपाल राणा का शुक्रवार सुबह दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में निधन हो गया था। जर्मनी से लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से खेल जगत और उत्तराखंड में शोक की लहर है। कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में 23 पदक जीतने वाले राणा भारतीय निशानेबाजी की सबसे बड़ी हस्तियों में गिने जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई नेताओं और खिलाड़ियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। देहरादून में अंतिम दर्शन के बाद उनके पार्थिव शरीर को कल वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। तस्वीरें देखिए- पिता ITBP में रहे, बचपन में राणा को थमाई पिस्टल जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी में हुआ था। हालांकि मूल रूप से वह टिहरी के रहने वाले थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, यानी ITBP में तैनात थे। बाद में वे उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। शूटिंग के प्रति उनका विशेष लगाव था और उन्होंने ही बेटे को महज 10 साल की उम्र में पिस्टल पकड़ा दी थी। परिवार में खेल का माहौल इतना मजबूत था कि उनकी बहन सुषमा सिंह और भाई सुभाष राणा भी राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज बने। कम उम्र से ही जसपाल का अधिकांश समय शूटिंग रेंज में बीतने लगा और यहीं से उस सफर की शुरुआत हुई जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों की कतार में खड़ा कर दिया। 12 साल की उम्र में पहला मेडल, 18 साल में अर्जुन पुरस्कार 1988 में अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में 12 साल के जसपाल राणा ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने लगातार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग का नया चेहरा बनकर उभरे। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 18 साल की उम्र में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उस दौर में इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी गई। राणा के घर से पल-पल के अपडेट्स जानने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
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