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    वर्ल्ड अपडेट्स:नेपाल बोला- भारत से सीमा विवाद में किसी तीसरे की जगह नहीं, PM के बयान पर दी सफाई

    11 hours ago

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    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का मुद्दा पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसका समाधान दोनों देश आपसी बातचीत से ही करेंगे। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। हाल ही में नेपाली पीएम बलेन शाह ने हाल ही में कहा था कि सीमा विवाद से जुड़े मुद्दे में ब्रिटेन की भूमिका हो सकती है। विदेश मंत्री खनाल ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का मकसद किसी तीसरे देश की मध्यस्थता मांगना नहीं था। खनाल ने बताया कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें सीमा निर्धारण, सीमा स्तंभों के रखरखाव और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों की संयुक्त जांच कर रही हैं। इससे पहले भारत ने भी साफ कहा था कि सीमा से जुड़े सभी मुद्दों के लिए दोनों देशों के बीच पहले से तंत्र मौजूद हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 98% भारत-नेपाल सीमा का निर्धारण हो चुका है, जबकि कुछ हिस्सों पर काम जारी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… दुनिया का सबसे छोटा गणराज्य नाउरू जल्द ही अपना सकता है नया नाम दुनिया का सबसे छोटा गणराज्य नाउरू जल्द ही अपना नाम बदल सकता है। संसद में एक प्रस्ताव पारित होने के बाद देश में जनमत संग्रह कराया जाएगा, जिसमें नागरिक तय करेंगे कि नाउरू का आधिकारिक नाम बदलकर ‘नाओएरो’ किया जाए या नहीं। राष्ट्रपति डेविड अडियांग ने संसद में कहा कि ‘नाओएरो’ नाम देश की विरासत, भाषा और पहचान का अधिक सम्मान करता है। प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पारित हुआ है। सरकार के अनुसार, स्थानीय लोग अपनी भाषा में देश को ‘नाओएरो’ कहते हैं। हालांकि, विदेशी लोगों के लिए इसका उच्चारण कठिन होने के कारण आधिकारिक रिकॉर्ड में ‘नाउरू’ नाम प्रचलित हो गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव स्थानीय लोगों की पसंद नहीं बल्कि बाहरी सुविधा के लिए किया गया था। नाउरू का नाम कई बार बदल चुका है। 1798 में एक ब्रिटिश नाविक ने इसका नाम ‘प्लेजेंट आइलैंड’ रखा था। 1888 में जर्मनी के कब्जे के बाद ‘नाउरू’ नाम आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हुआ। बाद में ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने भी यही नाम जारी रखा। देश को 1968 में स्वतंत्रता मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मूल नामों की वापसी केवल भाषाई बदलाव नहीं बल्कि सांस्कृतिक अधिकार और आत्मनिर्णय का प्रतीक है। दुनिया के कई देशों ने भी अपनी स्थानीय पहचान को मजबूत करने के लिए नाम बदले हैं। यूनेस्को नाउरू की मूल भाषा को गंभीर रूप से संकटग्रस्त मानता है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि ‘नाओएरो’ नाम अपनाने से भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक निरंतरता को बढ़ावा मिल सकता है। यूक्रेन युद्ध ने तोड़ा पहले विश्व युद्ध का रिकॉर्ड; 4 साल 3 महीने बाद भी संघर्ष जारी रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग अब पहले विश्व युद्ध से भी लंबा हो चुका है। फरवरी 2022 को शुरू हुआ यह युद्ध अब 1,569 दिन यानी 4 साल 3 महीने से ज्यादा लंबा हो गया है। जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया था, तब माना जा रहा था कि कुछ ही दिनों में यूक्रेन झुक जाएगा। लेकिन यूक्रेनी सेना के जवाबी कार्रवाई के बाद युद्ध लंबी लड़ाई में बदल गया और अब भी इसके खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ब्रिटेन और पश्चिमी देशों के अनुमान के मुताबिक अब तक इस युद्ध में करीब 5 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि दोनों पक्षों के कुल हताहतों की संख्या इससे कहीं ज्यादा मानी जाती है। शांति बातचीत फिलहाल ठप हैं और सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में यूक्रेनी नागरिकों को नहीं लगता कि यह युद्ध 2027 से पहले खत्म होगा। अल्बानिया में ट्रम्प के दामाद के रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे अल्बानिया की राजधानी तिराना में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर के लग्जरी रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। करीब 55 हजार करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का विरोध पर्यावरण की चिंता की वजह से हो रहा है। दरअसल, यह रिसॉर्ट एक संरक्षित तटीय इलाके के पास बनाया जाना है। यह क्षेत्र फ्लेमिंगो, सील और समुद्री कछुओं जैसे वन्यजीवों का आवास माना जाता है। प्रदर्शनकारियों ने ‘अल्बानिया बिकाऊ नहीं है’ जैसे पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि प्रोजेक्ट को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई और विदेशी निवेशकों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री एडी रामा ने कहा है कि प्रोजेक्ट तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाएगा। चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया। भारतीय मूल का कारोबारी अमेरिका में करोड़ों डॉलर की बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय मूल के कारोबारी महेंद्र माखिजानी को करीब 10 करोड़ डॉलर की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए रियल एस्टेट लोन को वास्तविकता से अधिक सुरक्षित दिखाकर बैंक को भारी वित्तीय जोखिम में डाल दिया। 44 वर्षीय माखिजानी न्यूपोर्ट बीच स्थित कैंटर ग्रुप को नियंत्रित करते थे। अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी का एक फेडरल इंश्योर्ड बैंक के साथ समझौता था, जिसके तहत बैंक ने रियल एस्टेट आधारित लोन उपलब्ध कराने के लिए करीब 10 करोड़ डॉलर दिए थे। समझौते की शर्त थी कि कंपनी केवल उन्हीं लोन को बैंक के पास गिरवी रखेगी, जिनमें उसके पास संबंधित संपत्ति पर ‘फर्स्ट लियन’ अधिकार होगा। ऐसे लोन अधिक सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि डिफॉल्ट की स्थिति में भुगतान का पहला अधिकार उसी ऋणदाता को मिलता है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड में बदलाव कर यह दिखाया गया कि कैंटर ग्रुप के पास फर्स्ट लियन अधिकार है, जबकि वास्तविकता में अन्य लेनदारों की प्राथमिक दावेदारी थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, दस्तावेजों में कथित हेरफेर Adobe सॉफ्टवेयर के जरिए किया गया। बदलाव छिपाने के लिए मेटाडेटा हटाने और दस्तावेजों को दोबारा स्कैन करने जैसे तरीके भी अपनाए गए। बाद में यही रिकॉर्ड बैंक को सौंपे गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बैंक द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में माखिजानी ने भ्रामक स्पष्टीकरण दिए। दिसंबर 2024 में कथित तौर पर एक ऐसी स्प्रेडशीट भी बैंक को भेजी गई, जिसमें टाइटल संबंधी विसंगतियों के गलत कारण बताए गए थे। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक दोषी साबित होने पर माखिजानी को अधिकतम 30 साल तक की जेल हो सकती है। अगस्त 2025 में संबंधित बैंक ने इस मामले में लॉस एंजिलिस सुपीरियर कोर्ट में मुकदमा भी दायर किया है। ताइवान ने चीन की दिशा में रॉकेट दागे: अमेरिकी सिस्टम से पहली बार ताइवान स्टेरेट में लाइव-फायर अभ्यास ताइवान की सेना ने बुधवार को अमेरिकी HIMARS रॉकेट सिस्टम से चीन की दिशा में रॉकेट दागकर अपनी सैन्य तैयारियों का प्रदर्शन किया। सेना के मुताबिक अभ्यास में कम दूरी वाले प्रशिक्षण रॉकेटों का इस्तेमाल किया गया, जो तट से अधिक दूर नहीं गए और समुद्र में गिर गए। यह अभ्यास ताइवान के पश्चिमी तट पर किया गया, जो सीधे चीन की ओर मुखातिब है। ताइवान सेना के सार्जेंट वांग मिंग-हुई ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए HIMARS प्रशिक्षण जारी रखा जाएगा और सेना देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। यह अभ्यास ऐसे समय हुआ है जब चीन लगातार ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और भविष्य में उसके एकीकरण की बात करता रहा है। हाल के वर्षों में उसने द्वीप के आसपास बड़े सैन्य अभ्यास भी किए हैं। HIMARS अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। यह ट्रक आधारित मोबाइल रॉकेट सिस्टम है, जो छिपे हुए स्थान से निकलकर हमला करने और तुरंत दूसरी जगह पहुंचने में सक्षम है। अमेरिका ने पिछले वर्ष दिसंबर में ताइवान को 82 अतिरिक्त HIMARS सिस्टम बेचने की योजना की घोषणा की थी। हालांकि, हालिया रिपोर्टों के अनुसार यह सौदा फिलहाल रुका हुआ दिखाई दे रहा है।
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