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    World Thyroid Day: मां बनने की कोशिश में आ रही है रुकावट तो थायरॉयड हो सकता है इसका कारण, तुरंत कराएं जांच

    1 week ago

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    How Hypothyroidism Affects Fertility In Women: हर महीने प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव आना किसी भी महिला के लिए इमोशनल रूप से बेहद थका देने वाला अनुभव हो सकता है. कई बार महिलाएं समझ ही नहीं पातीं कि आखिर गर्भधारण में देरी क्यों हो रही है. लगातार थकान, अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना, पीरियड्स का अनियमित होना या हमेशा ठंड महसूस होना जैसे संकेत अक्सर तनाव या खराब लाइफस्टाइल मानकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि कई मामलों में इसके पीछे थायरॉयड की समस्या छिपी हो सकती है. क्यों मां बनने वाली महिलाओं के लिए यह जरूरी है? हर साल 25 मई को वर्ल्ड थॉइराइड डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को थायरॉयड से जुड़ी बीमारियों, उनके बचाव और इलाज के प्रति जागरूक किया जा सके. इसी मौके पर फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स महिलाओं को खासतौर पर थायरॉयड हेल्थ को गंभीरता से लेने की सलाह दे रहे हैं, खासकर उन महिलाओं को जो मां बनने की कोशिश कर रही हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक थायरॉयड ग्लैंड भले ही शरीर का छोटा हिस्सा हो, लेकिन इसका असर प्रजनन क्षमता पर काफी गहरा पड़ता है. जब थायरॉयड हार्मोन कम बनने लगते हैं, तो ओव्यूलेशन और पीरियड्स को कंट्रोल करने वाले हार्मोन भी प्रभावित होने लगते हैं. इसका असर गर्भधारण में देरी, अनरेगुलर पीरियड्स और बार-बार फर्टिलिटी से जुड़ी परेशानियों के रूप में सामने आ सकता है. एक्सपर्ट क्यों दे रहे हैं चेतावनी? डॉ. आलिमिलेति झांसी रानी ने TOI को बताया कि "जो महिलाएं गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए थायरॉयड फंक्शन अक्सर सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला कारण बन जाता है." आईसीएमआर और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च भी बताती हैं कि भारत में प्रजनन आयु की महिलाओं में हाइपोथायरॉयडिज्म तेजी से बढ़ रहा है. एक्सपर्ट के अनुसार कई महिलाएं नियमित पीरियड्स होने के बावजूद सही तरीके से ओव्यूलेट नहीं कर पातीं, जिससे कंसीव करना मुश्किल हो जाता है. किन चीजों को प्रभावित करता है यह? डॉ. रानी बताती हैं कि थायरॉयड सिर्फ मेटाबॉलिज्म या वजन को नहीं, बल्कि एग डेवलपमेंट, फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो इम्प्लांटेशन जैसी प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करता है. अगर शरीर को सही हार्मोनल सिग्नल नहीं मिलते, तो ओवरी स्वस्थ अंडे तैयार नहीं कर पाती. एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि केवल नॉर्मल थायरॉयड रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होती. गर्भधारण की योजना बना रहीं महिलाओं में कई डॉक्टर टीएसएच लेवल को 2.5 mIU/L से नीचे रखना बेहतर मानते हैं, क्योंकि हल्का बढ़ा हुआ स्तर भी ओव्यूलेशन और प्रेग्नेंसी को प्रभावित कर सकता है. इसे भी पढ़ें - Mental Health Crisis: हर 8 में से 1 व्यक्ति मेंटल डिसऑर्डर का शिकार, 43 सेकंड में 1 सुसाइड, WHO के आंकड़े हैं खौफनाक लाइफस्टाल को सही रखना काफी जरूरी इलाज के साथ-साथ लाइफस्टाइल भी अहम भूमिका निभाता है. संतुलित आहार, पर्याप्त आयोडीन और सेलेनियम, अच्छी नींद, तनाव कम करना और समय पर दवा लेना थायरॉयड हेल्थ को बेहतर बना सकता है. हालांकि एक्सपर्ट बिना डॉक्टर की सलाह सोशल मीडिया पर चल रहे थायरॉयड हीलिंग ट्रेंड्स या सप्लीमेंट्स अपनाने से बचने की सलाह देते हैं. इसे भी पढ़ें - Breast Reduction Surgery: क्या है ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी, क्या स्तनों का साइज घटवाना सेफ है? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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