युवा कर्मचारी अकेलापन, 36-45वर्ष के कर्मचारी दबाव महसूस कर रहे:इप्सोस जेनरेशन रिपोर्ट; कार्यस्थलों में अलग-अलग पीढ़ियों की मानसिकता पर सर्वे
3 weeks ago
नौकरी और करिअर का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। ग्लोबल मार्केट रिसर्च फर्म इप्सोस की जेनरेशन रिपोर्ट 2026 के मुताबिक आज के दौर में नौकरी की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ पैसा कमाना नहीं रह गई है। मानसिक थकान, लगातार उपलब्ध रहने का दबाव, अकेलापन और निजी जीवन के लिए समय की कमी नए वर्क कल्चर की सबसे गंभीर समस्याएं हैं। रिपोर्ट में कार्यस्थल पर की प्राथमिकताओं, मानसिक स्थिति और जीवन के पड़ाव के आधार पर कर्मचारियों को पांच समूहों में बांटा गया है। 16-25 वर्ष - उत्साह भरपूर, लेकिन अकेलेपन का शिकार युवा पीढ़ी में काम को लेकर उत्साह है। लेकिन ये कार्यस्थल पर सबसे ज्यादा अकेलापन और भावनात्मक जुड़ाव की कमी महसूस कर रहे हैं। डिजिटल रूप से लगातार ऑनलाइन रहने के बावजूद, पारंपरिक ऑफिस संस्कृति इन्हें उबाऊ लगती है। 26-35 वर्ष - काम में माहिर लेकिन जिम्मेदारियों का बोझ इस वर्ग के 60% कर्मचारी एआई और नए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल आसानी से करते हैं। यही वजह है कि कंपनियां इन्हें सबसे ज्यादा इनोवेटिव, सहयोगी और भरोसेमंद मानती हैं। पर इसी उम्र में घरेलू जिम्मेदारियां शुरू होने से इनका उत्साह स्थिरता में बदलने लगता है। 36-45 वर्ष - दोतरफा मोर्चों पर सबसे ज्यादा तनाव में संस्थागत अनुभव और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता वाले ये कर्मचारी वफादार और स्थिर माने जाते हैं। लेकिन, लंबे काम के दबाव ने इन्हें थका दिया है। डिजिटल दुनिया और नए तकनीकी अपग्रेड्स के साथ लगातार तालमेल बनाए रखना इस पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती है। 46-55 वर्ष - अनुभव मजबूत, लेकिन बदलाव की चुनौती करियर और परिवार की दोहरी जिम्मेदारियों के बीच फंसे इस वर्ग के करीब 51% कर्मचारी वर्क-लाइफ बैलेंस चाहते हैं। लेकिन वे ऑफिस के बाद भी ईमेल्स का जवाब देते हैं, अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठाते हैं, जो इन्हें लगातार क्रॉनिक थकान की ओर धकेल रहा है। 56-65 वर्ष - सम्मान की कमी महसूस कर रहे इस वर्ग के करीब 40% कर्मचारियों का मानना है कि दफ्तरों में उन्हें अन्य आयु समूहों से वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। रिपोर्ट कार्यस्थल पर बढ़ते उम्र आधारित भेदभाव की ओर इशारा करती है। कई वरिष्ठ पेशेवरों को लगता है कि कंपनियां अब युवाओं और नई तकनीकों पर ही फोकस कर रही हैं, जबकि उनके समृद्ध अनुभव को कम करके आंका जा रहा है।
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