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    Explained: निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसा रहा मुनीर का सिपहसालार मलिक! PoJK में पुलिसिया कार्रवाई पर क्यों उठे सवाल?

    12 hours ago

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    जून 2026 के पहले हफ्ते में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) में ऐसा तांडव मचा कि पूरी दुनिया की नजरें वहां टिक गईं. जिन सड़कों पर कभी 'चीनी-नूडल्स' के लिए लोग लाइनें लगाते थे, वहीं अब लाखों की तादाद में उतरे लोग चीख रहे थे- बस, बस और बस. पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स, पंजाब पुलिस और स्थानीय पुलिस ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसा दीं. करीब 30 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए. इसके बाद डेढ़ लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए. आखिर इतना बड़ा विद्रोह क्यों हुआ? इस खूनी कार्रवाई का चेहरा कौन है और क्यों पूरी दुनिया इस हाल से परेशान है? एक साल पहले से पनप रहा था विद्रोह का बीज यह विद्रोह भड़कने की तत्काल वजह बनी, PoJK में होने वाले चुनाव. 27 जुलाई 2026 को यहां चुनाव होने वाले थे, लेकिन विवाद था 12 सीटों को लेकर. ये 12 सीटें 'शरणार्थियों' यानी 1947 में भारतीय कश्मीर से पलायन करने वालों के लिए रिजर्व थीं. जो लोग खुद PoJK में नहीं रहते, वे यहां की सीटों पर चुनाव लड़ सकते थे. संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने इसे 'स्थानीय प्रतिनिधित्व का हनन' बताकर पूर्ण बहिष्कार की मांग की. पाकिस्तान सरकार ने JAAC से बात करने के बजाय 5 जून 2026 को इस संगठन पर एंटी टेररिज्म एक्ट के तहत प्रतिबंध लगा दिया, उसके नेताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया और पूरे इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया. इस कदम ने गुस्से में आग लगा दी. 9 जून 2026: वह दिन जब सड़कों पर खून बहा 9 जून को JAAC के विरोध मार्च के दिन हालात बेकाबू हो गए. सैकड़ों की जगह लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. रावलाकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, डडियाल, मीरपुर और भिंबर हर जगह जलसा था. एक दिन पहले यानी 8 जून को ही हालात चरम पर पहुंच गए थे, जब प्रदर्शनकारियों ने रावलाकोट के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) को घेर लिया था. पुलिस प्रशासन के मुताबिक, 6 जून से अब तक हिंसक तत्वों की गोलीबारी में चार सुरक्षाकर्मियों (तीन पुलिसकर्मी और एक फ्रंटियर कांस्टेबुलरी का जवान) ने जान गंवा दी. इसके जवाब में पुलिस ने लाइव गोला-बारूद और आंसू गैस के गोले दागे. 8 जून को रातों-रात कार्रवाई में कम से कम 14 से 22 लोगों की मौत की खबरें थीं. लियाकत अली मलिक: इस हिंसा का चेहरा कौन? सबसे बड़ा सवाल है कि इस पूरे खूनी खेल का सेनापति कौन है और जवाब है- रिटायर्ड कैप्टन लियाकत अली मलिक. मलिक PoJK के 47वें पुलिस महानिदेशक (IGP) हैं. फरवरी 2026 में ही उन्हें इस पद पर बिठाया गया था. यह नियुक्ति बेहद विवादास्पद थी क्योंकि वे पंजाब पुलिस में 'BPS-20' के जूनियर अधिकारी थे, जबकि उनसे सीनियर और योग्य कश्मीरी अफसर (BPS-21) मौजूद थे. पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों ने अपनी 'अनदेखी' पर गुस्सा जाहिर किया था. रिटायर्ड कैप्टन लियाकत अली मलिक लाहौर हॉस्पिटल विवाद: एक ऐसा केस जिसने बयान कर दी इंसानियत मलिक सिर्फ इस घटना से पहले से ही विवादों में थे. दिसंबर 2023 की बात है, जब उनके पिता लाहौर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती थे. कहा जाता है कि रिपोर्ट में देरी और बिल को लेकर उनका डॉक्टरों से झगड़ा हो गया. अगली खबर यह आई कि उन्होंने अपनी CIA पुलिस की पूरी टीम हॉस्पिटल में झोंक दी. पुलिस ने वहां मौजूद डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, मरीजों को बंधक बनाकर पीटा, जर्नलिस्टों के कैमरे और मोबाइल छीन लिए और CCTV VCR जब्त कर लिया. हंगामा बढ़ने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने तुरंत एक्शन लिया और उन्हें पद से हटाकर ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) कर दिया. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिना कोई जांच कराए, महज 10-12 दिनों में ही उन्हें बहाल कर दिया गया. यानी इतना बड़ा जुर्म करने के बाद भी उनपर कोई FIR तक दर्ज नहीं हुई. सत्ता का सिपहसालार: सेना और सरकार के पसंदीदा अफसर मलिक सिर्फ एक पुलिस अफसर नहीं हैं, वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सियासी विरोध को कुचलने का चेहरा रहे हैं. जब जेल में बंद इमरान की पार्टी PTI ने 2025 में विरोध प्रदर्शन किए, तो मलिक की अगुआई में पंजाब पुलिस ने बेरहमी से क्रैकडाउन किया. 800 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और 11 MP को जेल में डाल दिया गया. मानवाधिकार आयोग पाकिस्तान (HRCP) के मुताबिक, 2025 में अकेले पंजाब में 400 से ज्यादा संदिग्ध 'पुलिस मुठभेड़ों' में मौतें हुईं. विपक्ष ने आरोप लगाया कि ये 'एनकाउंटर' न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प बन गए थे. निहत्थों पर गोलियां: एक नरसंहार या कुछ और? मानवाधिकार आोग पाकिस्तान (HRCP) और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस नरसंहार पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, 'प्रदर्शनकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों दोनों की जानें जा रही हैं. सरकार को फौरन डी-एस्किलेट होना चाहिए और एक निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. HRCP ने JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध को 'लोकतांत्रिक जगह को सीमित करने वाला' बताते हुए कड़ी आलोचना की. यूके में 40 से ज्यादा सांसदों ने मामले में दखल देने की मांग की. भारत ने भी पाकिस्तान को लताड़ा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन मानवाधिकार हनन पर ध्यान देने की गुजारिश की है.
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