Petrol-Diesel Price: 78 दिनों तक नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? ईंधन पर सरकार खर्च करेगी 1.23 लाख करोड़
11 hours ago
Petrol Diesel Price: पेट्रोल और डीजल के दामों में बीते महीने ही बढ़ोतरी हुई है. जिससे जनता के ऊपर काफी बोझ बढ़ गया है. ईंधन के दाम बढ़ने से ना केवल परिचालन में महंगाई आई है बल्कि रोजमर्रा के सामानों के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है. जनता को अब भी इस बात का डर है कि आने वाले दिनों में ईंधन के दाम और भी बढ़ने वाले हैं. इसी बीच सरकार ने जनता का थोड़ा सा बोझ कम करने के लिए कुछ और ही प्लान बना लिया है. ये खबर पढ़कर ही लोगों को थोड़ी राहत की सांस आएगी. सरकार कर रही मदददरअसल लोगों पर पड़ रही महंगाई की मार को रोकने के लिए अब सरकार खुद तेल कंपनियों (OMC) को करोड़ों रुपये चुका रही है. जिससे कि कई दिनों तक पेट्रोल- डीजल की कीमतें ना बढ़ सकें. न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार तेल कंपनियों को करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये दे रही है, जिससे कि 78 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई भी बदलाव ना आए. ये भी पढ़ें: Business Ideas: 20 साल के हो गए हैं? कम निवेश में शुरू करें ये 7 बिजनेस, होगी शानदार कमाई वहीं सरकारी सूत्रों ने PTI को ये भी बताया कि फर्टिलाइजर मंत्री ने वित्त वर्ष 2027 के लिए तय 1.77 लाख करोड़ रुपये की फर्टिलाइजर सब्सिडी को दोगुना करने की मांग की है. ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार अलग-अलग सेक्टर में बढ़ती सब्सिडी और ऊर्जा की लागत से जूझ रही है. सब्सिडी LPG सिलेंडर घटाएसोमवार को केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के लाभार्थियों को हर साल मिलने वाले सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी. सरकार का कहना है कि ये बदलाव परिवारों की औसत खपत के हिसाब से किया गया है. साल 2016 में शुरू की गई इस स्कीम के तहत, लाभार्थियों को शुरुआत में हर साल 14.2 किलोग्राम के 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे, लेकिन बाद में कोटा घटाकर नौ कर दिया गया और अब इसकी संख्या चार कर दी गई है. ये भी पढ़ें: क्यों $5 ट्रिलियन GDP का टारगेट नहीं छू पाया देश, किसने तोड़ा भारत का सपना? समझें कारण बता दें कि ये सब वैश्विक हालातों के मद्देनजर हो रहा है. ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से गड़बड़ा गई है. ऐसे में सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि जनता पर इसका ज्यादा बोझ नहीं आने दे. इसके तहत ही सरकार तेल कंपनियों की मदद कर रही है.
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