राज्यसभा नामांकन रद्द मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई से क्यों किया इनकार? जानें क्या बताई वजह
4 hours ago
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जून, 2026) को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश में मंगलवार (9 जून, 2026) को हुए राज्यसभा चुनाव के लिए उनके नामांकन पक्ष को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी. दरअसल, अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 329 चुनावी मामलों में कोर्ट के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है और ऐसे मामलों में चुनाव याचिका ही इकलौता उपाय है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एएस चंदूरकर की बेंच ने नटराजन के मामले में कोई अपवाद बनाने से इनकार कर दिया है. बेंच ने यह भी कहा कि याचिका खारिज करने का उसका आदेश नटराजन या उनकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति की तरफ से हाई कोर्ट में दाखिल की जाने वाली चुनाव याचिका में दिए जाने वाले तर्कों को प्रभावित नहीं करेगा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को क्या दिया तर्क? कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का 9 जून का आदेश, जिसमें हैदराबाद की एक कोर्ट के समन का उल्लेख न किए जाने के आधार पर नामांकन खारिज किया गया, बहुत ही विचित्र है. उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत उन मामलों का खुलासा करना जरूरी है, जिनमें किसी प्रत्याशी को दोषी ठहराया गया हो या उसके खिलाफ आरोप तय किए गए हों. उन्होंने तर्क दिया कि हैदराबाद की अदालत ने अभी तक इस मामले में शिकायत का संज्ञान नहीं लिया है और सिर्फ शुरुआती चरण में नटराजन से जवाब मांगा था. दो जजों की बेंच ने क्या सुनाया फैसला? जबकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव संबंधी मामलों में अपने पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 329 के मद्देनजर उसने रिट ज्यूरीडिकशन का इस्तेमाल करने से हमेशा परहेज किया है. बेंच ने कहा, ‘हमें आशंका है कि ऐसी कोई भी व्याख्या स्वीकार नहीं की जा सकती, जिसके तहत कुछ मामलों में अदालत गलत तरीके से खारिज किए गए नामांकन में हस्तक्षेप करे और अन्य मामलों में उम्मीदवारों को चुनाव याचिका दायर करने के लिए छोड़ दें. इसलिए याचिका खारिज की जाती है.’ यह भी पढे़ंः मीनाक्षी नटराजन केस की शिकायतकर्ता को सता रहा जान का डर, कोर्ट में धमकी और निगरानी का लगाया आरोप
Click here to Read more

