Bank Rules: बैंक अकाउंट, EPF या इंश्योरेंस में पड़ा है आपका भूला-बिसरा पैसा? चुटकियों में ऐसे लगाएं पता
8 hours ago
Forgotten Unclaimed Money News: ज़्यादातर लोग अपना बैंक का हिसाब जानते है और मानते हैं कि उन्हें अच्छे से पता है कि उनका पैसा कहां है. सबसे महत्वपूर्ण चीज यह कि गुजरते समय के साथ, लोग पुराने बैंक खाते भूल जाते हैं, इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में याद नहीं रहता, शेयर बिना इस्तेमाल के पड़े रह जाते हैं, और पिछली नौकरियों के प्रोविडेंट फंड (PF)अकाउंट कागज़ी कार्रवाई में कहीं खो जाते हैं. कभी-कभी परिवार के सदस्यों को यह पता भी नहीं होता कि ऐसी कोई संपत्ति मौजूद है. इसका परिणाम साफ है कि पूरे भारत में बिना दावे वाली फाइनेंशियल एसेट्स की संख्या बढ़ती जा रही है. रेगुलेटर और फाइनेंशियल संस्थानों के सर्वे के अनुसार, अभी बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, EPF अकाउंट और इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड में हज़ारों करोड़ रुपये बिना किसी दावे के पड़े हैं. इस में खास अच्छी बात यह है कि इस पैसे को खोजना और वापस पाना कुछ साल पहले के मुकाबले में अब काफी सरल और आरामदायक हो गया है. इस तरह कर सकते है जांच. पिछली नौकरियों के पुराने EPF अकाउंट्स की जांचें अक्सर होता क्या है कि कई सैलरी पाने वाले कर्मचारियों ने अपने करियर में एक से ज़्यादा कंपनी के साथ काम किया है. यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) सिस्टम के आने से पहले, कर्मचारियों के पास अक्सर कई EPF अकाउंट हो जाते थे और वे उनमें मौजूद बैलेंस को ठीक से ट्रांसफर नहीं कर पाते थे. बताते चलें आज के समय में PF का कुछ पुराना बैलेंस बिना क्लेम किए पड़ा रहता है क्योंकि कर्मचारियों ने नौकरी बदल ली, विदेश चले गए या उन्हें अपने पुराने अकाउंट्स के बारे में जानकारी नहीं रही. EPFO पोर्टल पर लॉग इन करके और अपने UAN से जुड़े अकाउंट्स की जांच करके आप उन पुराने बैलेंस का पता लगा सकते हैं जिन्हें अभी भी निकाला या ट्रांसफर किया जा सकता है. क्यों $5 ट्रिलियन GDP का टारगेट नहीं छू पाया देश, किसने तोड़ा भारत का सपना? समझें कारण भूली हुई इंश्योरेंस पॉलिसी का पता लगाएं अक्सर लोग अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी कराते है. ऐसे में बिना दावे वाले फंड का एक और बड़ा ज़रिया इंश्योरेंस पॉलिसी हो सकता है. हाला कि कभी-कभी मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम अदा यानी भुगतान इसलिए नहीं हो पाता क्योंकि कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपडेट नहीं की गई होती हैं. कुछ मामलों में, परिवार के सदस्यों को पॉलिसी के बारे में कोई जानकारी ही नहीं होती है. दिलचस्प बात यह है कि कई लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनियां बिना दावे वाली रकम का पता लगाने के लिए ऑनलाइन खोज की सुविधा देती हैं. पॉलिसी होल्डर कंपनी की वेबसाइट पर पॉलिसी की जानकारी, PAN या पहचान से जुड़ी दूसरी जानकारी का इस्तेमाल करके भी इसे चेक कर सकते हैं. ऐसी स्थिती में अगर पॉलिसी होल्डर की मौत हो गई है, तो कानूनी वारिस ज़रूरी दस्तावेज़ देकर क्लेम का तरीका शुरू कर सकते हैं. अमेरिका के बाद दुनिया में कहां हैं सबसे ज्यादा अरबपति? जानें लिस्ट में भारत कितने नंबर पर
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