Explained: तीन दिन में तीन जहाज स्वाहा! ईरान से जंग में भारतीय टैंकर क्यों डुबा रहा अमेरिका, भारत के लिए मुश्किल कैसे?
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ओमान तट से लेकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज तक समुद्री इलाका इन दिनों खून से लाल हो गया है. पिछले तीन दिनों में भारतीय नाविकों वाले तीन अलग-अलग जहाजों पर एक के बाद एक हमले हुए हैं. पहले अमेरिकी सेना ने एक टैंकर को निशाना बनाया, फिर दूसरे पर हमला किया और अब तीसरे जहाज में भी आग लग गई. इन हमलों में अब तक तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. भारत सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए अमेरिकी राजनयिक को तलब कर नाराजगी जताई. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, क्या यह अमेरिका-ईरान जंग का असर है और भारत के लिए यह मुश्किल कितनी बड़ी है? पहला हमला (8 जून): MT मारिवेक्स पर सटीक प्रहार सबसे पहला हमला 8 जून को हुआ. पलाऊ द्वीप के झंडे वाले टैंकर MT मारिवेक्स पर अमेरिकी सेना ने हमला किया. इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने यह हमला इसलिए किया क्योंकि जहाज अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरान की तरफ जा रहा था. इस हमले में किसी भारतीय नाविक की मौत नहीं हुई. ओमानी अधिकारियों की मदद से सभी 24 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया. सेंट्रल कमांड के मुताबिक, एक F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने जहाज के इंजन और स्टीयरिंग हिस्से पर सटीक मिसाइल दागी. जहाज अब ईरान नहीं जा पाएगा. दूसरा हमला (9-10 जून): MT सेटेबेलो पर जानलेवा हमला सबसे खतरनाक और दर्दनाक हमला 9-10 जून की दरम्यानी रात को हुआ. पलाऊ के झंडे वाले टैंकर MT सेटेबेलो पर अमेरिकी सेना ने फिर से हमला किया. इस बार हालात और गंभीर थे. जहाज पर कुल 24 भारतीय नाविक थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बार फिर यही कहा कि जहाज ने अमेरिकी आदेशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जा रहा था. अमेरिकी लड़ाकू विमान ने जहाज के इंजन रूम में सटीक मिसाइल दागी. इस हमले के बाद भगदड़ मच गई. जहाज में आग लग गई और वह डूबने लगा. 21 भारतीय नाविकों को ओमानी अधिकारियों ने बचा लिया, लेकिन तीन नाविक लापता हो गए. बाद में भारतीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की कि वे तीनों मारे गए और उनके शव बरामद कर लिए गए हैं. सेंट्रल कमांड ने X पर पोस्ट किया, 'अमेरिकी विमान ने सटीक हथियार दागे, क्योंकि चालक दल ने बार-बार अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया.' इस हमले को अमेरिकी नाकाबंदी के तहत पहली बार नाविकों की मौत का मामला बताया जा रहा है. तीसरा हमला (11 जून): MT जलवीर में आग 11 जून को गिनी-बिसाउ के झंडे वाला टैंकर MT जलवीर ओमान के शिनास बंदरगाह के पास घिर गया. इस जहाज पर करीब 20 भारतीय नाविक सवार थे. आधिकारिक तौर पर यह साफ नहीं हुआ है कि यह हमला था या कोई और घटना, लेकिन जहाज के इंजन रूम में आग लग गई. भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है और ओमानी अधिकारियों से संपर्क किया है. इस घटना के बाद भारतीय नाविकों के लिए समुद्री रास्ता और भी खतरनाक हो गया है. भारतीय जहाजों पर ये हमले क्यों हो रहे हैं? इन हमलों की असली वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में छिपी है. आइए, समझते हैं पूरा गणित: 28 फरवरी 2026: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला करके युद्ध शुरू शुरू कर दिया. ईरान की कार्रवाई: ईरान ने फौरन हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. यह रास्ता दुनिया के 20% तेल और गैस की सप्लाई का मुख्य जरिया है. अमेरिकी नाकाबंदी: 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर जाने वाले हर जहाज पर नाकाबंदी लगा दी. अमेरिका का कहना है कि कोई भी जहाज ईरान से तेल नहीं ले जा सकता. अब तक कार्रवाई: अमेरिका ने 8 जहाजों को तबाह कर दिया है, 134 जहाजों को मोड़ दिया है और सिर्फ 42 मानवीय सहायता वाले जहाजों को जाने दिया है. जब कोई जहाज अमेरिकी नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश करता है, तो अमेरिकी सेना उस पर हमला कर देती है. यही वजह है कि भारतीय नाविकों वाले ये जहाज भी निशाने पर आ गए. भारत आखिर चाहता क्या है? भारत सरकार इस पूरे मामले में बेहद सख्त रुख अपना रही है, लेकिन बहुत सोच-समझकर. क्योंकि एक तरफ अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय नाविकों की जान भी जोखिम में है. हमले के अगले ही दिन (10 जून) भारत ने अमेरिकी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय बुलाया और कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने करीब 30 मिनट तक बातचीत की और साफ कर दिया कि भारतीय नाविकों की जान को खतरा पहुंचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारत ने UN सुरक्षा परिषद में भी यह मुद्दा उठाया. भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा, 'हम व्यापारी जहाजों पर हमलों के सख्त खिलाफ हैं. इस क्षेत्र में हमारे कई नागरिक काम करते हैं और उनकी जानें खतरे में हैं.' भारत की तीन प्रमुख मांगें: व्यापारी जहाजों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद हो. अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर आवाजाही को मुक्त और बिना रुकावट के बहाल किया जाए. इस पूरे संकट का कूटनीतिक समाधान निकाला जाए और तनाव कम किया जाए. भारत सरकार ने यह भी कहा है कि व्यापारी जहाजों पर हमले इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का ही नतीजा हैं. भारत के लिए मुश्किलें क्यों बढ़ गई हैं? भारत के लिए यह स्थिति तीन मोर्चों पर मुश्किल बन गई है: पहली मुश्किल: भारतीय नाविकों की जान दुनिया भर में भारतीय नाविकों की तादाद सबसे ज्यादा है. भारतीय शिपिंग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक व्यापारी जहाजों पर काम करने वाले नाविकों में भारतीयों का अनुपात करीब 15-20 फीसदी है. खाड़ी देशों से लेकर होर्मुज स्ट्रेट तक के समुद्री रास्तों पर हजारों भारतीय नाविक हर रोज काम करते हैं. यही वजह है कि जब अमेरिकी सेना ने 8 जून से 11 जून के बीच भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों पर हमले किए, तो यह मामला भारत के लिए सीधी चुनौती बनकर उभरा. यह सिर्फ इन तीन जहाजों तक सीमित नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कुल 10 भारतीय नागरिक मारे जा चुके हैं. फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव का कहना है कि अगर जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उन्हें डिटेन करना एक व्यवहारिक विकल्प था, न कि उन पर प्रेसिजन मिसाइल हमला करना. सवाल है कि क्या अमेरिकी सेना को नाविों की नेशनलिटी की जानकारी नहीं थी? और अगर थी, तो फिर भी सीधा मिसाइल हमला क्यों? दूसरी मुश्किल: भारत की तेल सप्लाई पर संकट होर्मुज स्ट्रेट कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है. यह दुनिया के कुल तेल और गैस ट्रांसपोर्ट का करीब 20 फीसदी रास्ता है यानी हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से गुजरता है. अब अमेरिका और ईरान के युद्ध के बीच यह रास्ता बंद हो चुका है. ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है, तो अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर जाने वाले हर जहाज पर नाकाबंदी लगा दी है. अब तक अमेरिकी सेना ने 8 जहाजों को तबाह कर दिया है, 134 जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया है और सिर्फ 42 मानवीय सहायता वाले जहाजों को गुजरने दिया है. भारत अपनी कुल एनर्जी जरूरतों का करीब 88-90 फीसदी आयात करता है. यानी हर दस में से नौ यूनिट एनर्जी विदेशों से आती है: कच्चा तेल: भारत की कुल क्रूड ऑयल जरूरतों का करीब 40-50 फीसदी होर्मुज से होकर आता है. यानी हर दो बैरल में से एक बैरल का रास्ता इसी खतरनाक स्ट्रेट से गुजरता है. LPG: यह तो और भी चिंताजनक है. भारत की कुल LPG जरूरतों का 60 फीसदी आयात होता है. इस आयात का 90 फीसदी होर्मुज से होकर आता है. यानी हर वो सिलेंडर जो आपकी रसोई में पहुंचता है, उसका रास्ता इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव डोमेस्टिक LPG कनेक्शन हैं और 10 करोड़ से ज्यादा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कनेक्शन. अगर यह सप्लाई ठप हुई, तो रसोई से लेकर राजनीति तक सब कुछ प्रभावित हो जाएगा. LNG: भारत की करीब 50 फीसदी गैस जरूरत आयात पर निर्भर है और उस आयात का 55-60 फीसदी होर्मुज से होकर आता है. तेल आयात में गिरावट: युद्ध से पहले (फरवरी 2026) भारत का तेल आयात 5.2 मिलियन बैरल प्रति दिन था. मार्च 2026 में यह गिरकर 4.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया यानी 13.5 फीसदी की गिरावट. अप्रैल में यह और गिरकर 4.4 मिलियन पर आ गया. भारत सरकार का दावा है कि देश के पास क्रूड ऑयल का करीब 76 दिनों का स्टॉक है और LPG का 25-30 दिनों का स्टॉक मौजूद है. लेकिन यह स्टॉक सिर्फ आपात स्थिति के लिए है. अगर होर्मुज का संकट महीनों तक रहता है, तो 25-30 दिनों के बाद रसोई गैस की किल्लत शुरू हो जाएगी. सरकार पहले ही घरेलू कुकिंग गैस की कीमत में 60 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर चुकी है और यह सिर्फ शुरुआत है. तीसरी मुश्किल: अमेरिका के साथ राजनयिक संकट यह सबसे नाजुक मामला है. एक तरफ अमेरिका भारत का बड़ा रणनीतिक साझेदार है और दूसरी तरफ अमेरिकी सेना के हमलों में भारतीय नाविक मर रहे हैं. भारत को एक साथ दो रस्सियों पर चलना पड़ रहा है यानी विरोध भी करना है और रिश्ते भी बचाने हैं. 10 जून 2026 को भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय में तलब किया. विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने उनसे करीब आधे घंटे तक बात की और 'स्ट्रांग प्रोटेस्ट' दर्ज कराया. भारत ने साफ कर दिया कि भारतीय नाविकों की जान को खतरे में डालने वाली कार्रवाइयां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. अमेरिकी दूतावास ने यह कहते हुए बात को शांत करने की कोशिश की कि वे भारत के संपर्क में हैं और लापता नाविकों को खोजने में मदद कर रहे हैं. लेकिन असली सवाल है कि क्या अमेरिका इन हमलों को रोकेगा? अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है. अमेरिकी CENTCOM का कहना है कि वे ईरानी नाकाबंदी को लागू कर रहे हैं और जो जहाज निर्देशों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी. अमेरिकी हमलों के बाद भारत को अपनी विदेश नीति पर दोबारा सोचना पड़ सकता है. अगर एक दोस्त देश आपके नागरिकों को निशाना बना सकता है, तो उस दोस्ती पर कितना भरोसा किया जा सकता है? यह सवाल अब भारतीय स्ट्रैटेजिक सर्किल में उठने लगा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालात बेहद नाजुक हैं. अमेरिका और ईरान के बीच फिर से एक-दूसरे पर हमले शुरू हो गए हैं. 10 जून को भी दोनों देशों के बीच हमले हुए. इस बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसका कंट्रोल है. भारत की सरकार अब नए सिरे से रणनीति बना रही है. कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है.
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