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    Family Relationships: पार्टनर से ज्यादा अटैच है बच्चा तो न लें टेंशन, एक्सपर्ट के ये पैरेंटिंग टिप्स आएंगे आपके काम

    1 week ago

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    Why Children Prefer One Parent Over Another: कई माता-पिता शायद खुलकर यह स्वीकार नहीं करते, लेकिन अपने ही बच्चे को पार्टनर के ज्यादा करीब देखकर जलन महसूस होना बेहद सामान्य बात है. यह भावना अक्सर अचानक आती है और भीतर तक चुभ सकती है. जब बच्चा हर छोटी मदद के लिए एक ही पैरेंट को पुकारे, उनके साथ ज्यादा खुश दिखे या हर बार उन्हीं की गोद में जाना चाहे, तो दूसरे पैरेंट के मन में अनदेखा किए जाने का एहसास पैदा हो सकता है. क्यों होता है ऐसा रिएक्शन? असल में यह भावना सिर्फ बच्चे की पसंद तक सीमित नहीं होती. कई बार इसके पीछे थकान, इमोशनल असुरक्षा, तुलना या खुद को कम महत्वपूर्ण महसूस करने का डर छिपा होता है. पँरेंटिंग को हमेशा निस्वार्थ और संतुलित रूप में दिखाया जाता है, इसलिए ऐसे भाव आने पर लोग खुद को दोष देने लगते हैं. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि यह किसी बुरे माता-पिता की निशानी नहीं, बल्कि एक इमोशनल प्रतिक्रिया है. इसे भी पढ़ें -Parenting Tips: क्या आप भी बच्चों पर थोप रहे हैं नियम? सानिया मिर्जा की यह बात खोल देगी आपकी आंखें! क्यों एक पैरेंट को चुनते हैं? बच्चे अक्सर किसी एक पैरेंट को इसलिए ज्यादा चुनते हैं क्योंकि उस समय वह उन्हें ज्यादा खेलते हुए, शांत, उपलब्ध या मजेदार लग रहा होता है. कई बार जिस पैरेंट के साथ बच्चा कम समय बिताता है, उसकी ओर अट्रैक्शन ज्यादा हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि दूसरा पैरेंट कम प्यार करता है या बच्चा उससे दूर हो रहा है. बच्चों की भावनाएं लगातार बदलती रहती हैं और उनका लगाव भी समय के साथ अलग-अलग रूप लेता है. यह स्थिति खासतौर पर तब ज्यादा तकलीफ देती है जब एक पैरेंट घर की जिम्मेदारियों, स्कूल, खाने और अनुशासन जैसी अदृश्य मेहनत में लगा रहता है, जबकि दूसरे को बच्चे की मुस्कान और प्यार ज्यादा मिलता दिखाई देता है. ऐसे में जलन केवल रिश्ते से नहीं, बल्कि मेहनत और भावनात्मक थकान से भी जुड़ जाती है. भावनाओं को समझना क्यों जरूरी? एक्सपर्ट का मानना है कि इस भावना को दबाने के बजाय समझना जरूरी है. खुद से यह सवाल पूछना मददगार हो सकता है कि आखिर सबसे ज्यादा चोट किस बात से लग रही है कि बच्चे से दूरी, पार्टनर से तुलना या खुद को कम पसंद किया जाना? जब भावना स्पष्ट होने लगती है, तो उसे संभालना आसान हो जाता है. ऐसे समय में बच्चे का प्यार जीतने की प्रतियोगिता शुरू करना उल्टा असर डाल सकता है. जरूरत इस बात की होती है कि रिश्ता धीरे-धीरे और स्वाभाविक तरीके से मजबूत किया जाए. बच्चे के साथ छोटी-छोटी निजी आदतें बनाना, जैसे रात की कहानी, साथ टहलना या कोई छोटा खेल, रिश्ते में अपनापन बढ़ा सकता है. बच्चे परफेक्शन नहीं, भरोसेमंद मौजूदगी याद रखते हैं. अगर यह भावना बहुत गहरी हो जाए और बार-बार खुद की कीमत पर सवाल उठने लगें, तो एक्सपर्ट मेंटल हेल्थ सहायता लेने की सलाह भी देते हैं. इसे भी पढ़ें- टीनएज बेटियों के बदलते बर्ताव को न लें हल्के में, पैरेंट्स की 1 गलती पड़ सकती है भारी
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