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    हर साल क्यों कम होती जाती है सोलर पैनल की एफिशिएंसी, किन चीजों से पड़ता है असर? जानें

    23 hours ago

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    Solar Panel Degradation: सोलर पैनल आसानी से 20-25 साल तक चल जाते हैं, लेकिन इनकी परफॉर्मेंस लगातार एक जैसी नहीं रहती. हर प्रकार के पैनल की एफिशिएंसी हर साल कम होती जाती है. इसे सोलर पैनल डिग्रेडेशन कहा जाता है और इसका सीधा असर आपकी छत पर लगे सोलर सिस्टम पर पड़ता है. जैसे-जैसे पैनल पुराने होते जाते हैं, इनसे जनरेट होने वाली बिजली कम होती जाती है. आज हम जानेंगे कि इसके पीछे क्या कारण होते हैं और समय के साथ सोलर पैनल की एफिशिएंसी कितनी कम हो जाती है. क्यों होता है Solar Panel Degradation? सेमीकंडक्टर में हीट बिल्ड-अप होना- सोलर पैनल में सेमीकंडक्टर सेल्स लगी होती हैं, जिनसे इलेक्ट्रिक चार्ज फ्लो होता है. करंट गुजरने के दौरान इनमें हीट पैदा होती है. लगातार हीट जनरेट होने के कारण सनलाइट से बिजली बनाने की इनकी क्षमता कमजोर हो जाती है.मैटेरियल डिग्रेडेशन- सोलर पैनल के कंपोनेंट लगातार धूप में रहते हैं और इनमें इलेक्ट्रिक एक्टिविटीज चलती रहती है. इस कारण मैटेरियल भी खराब होने लगता है, जिसका असर एफिशिएंसी पर पड़ता है.हैंडलिंग और इंस्टॉलेशन- सोलर पैनल को हैंडल और इंस्टॉल करने के तरीका का भी एफिशिएंसी पर असर पड़ता है. खराब हैंडलिंग, लूज कनेक्शन और माउंटिंग में गड़बड़ आदि के कारण पैनल डैमेज हो सकते हैं, जिससे एफिशिएंसी कम हो जाती है.सफाई न होना- सोलर पैनल की सफाई करना जरूरी है. अगर पैनल पर धूल-मिट्टी जम जाए तो यह सनलाइट को ब्लॉक कर सकती है, जिससे पावर जनरेशन कम होने लगता है. पहले साल होता है सबसे ज्यादा डिग्रेडेशन अगर आप सोच रहे हैं कि पैनल पुराने होने पर 15-20 सालों बार पैनल डिग्रेडेशन सबसे ज्यादा होता है तो ऐसा नहीं है. सबसे ज्यादा पैनल डिग्रेडेशन पहले साल ही हो जाता है, जब पैनल लैब टेस्टिंग से बाहर आकर असल दुनिया की परिस्थितियों का सामना करते हैं. पहले साल इसमें करीब 0.7-0.8 प्रतिशत डिग्रेडेशन हो सकता है. समय के साथ कितनी कम हो जाती है एफिशिएंसी? पहले साल के बाद हर साल 0.5-0.8 प्रतिशत डिग्रेडेशन होता है. इस कारण 10वें साल तक एफिशिएंसी में 5-8 प्रतिशत तक और 25वें साल तक 12-20 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. इसका मतलब है कि पैनल पहले साल जहां 99 प्रतिशत एफिशिएंसी के साथ काम करता है, वह 25वें साल तक कम होकर 80-87 प्रतिशत तक रह जाती है. रेगुलर मैंटेनेंस, सही अर्थिंग जैसी सावधानियां अपनाकर डिग्रेडेशन की स्पीड पर थोड़ी लगाम लगाई जा सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह नहीं रोका जा सकता. ये भी पढ़ें- "पैसे की वैल्यू ही खत्म हो जाएगी...", दुनिया के पहले ट्रिलेनियर Elon Musk ने क्यों कही यह बात?
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