NEET विवाद पर सड़कों पर उतरे युवा संगठन, पेपर लीक पर उठाया सवाल, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा
3 weeks ago
NEET यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं को लेकर देशभर में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी मुद्दे पर भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और NSUI ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास से लेकर NTA मुख्यालय तक प्रदर्शन किए गए, जहां छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई. धर्मेंद्र प्रधान के आवास के बाहर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन भारतीय युवा कांग्रेस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में युवा कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर NEET पेपर लीक और छात्रों की मौतों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए. IYC के इस विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस भी मुस्तैद थी, यही वजह है कि साउथ एवेन्यू मार्ग से शिक्षा मंत्री के आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया. इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया. लोकतंत्र को लीकतंत्र बना दिया गया- उदय भानु चिब प्रदर्शन के दौरान उदय भानु चिब ने कहा कि NEET पेपर लीक और उससे जुड़े घटनाक्रम ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. उनका आरोप था कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, जबकि मोदी सरकार लगातार चुप्पी साधे हुए है और लोकतंत्र को लीकतंत्र बना दिया है. उन्होंने कहा कि देश का युवा अपनी मेहनत और सपनों के साथ हो रहे खिलवाड़ का जवाब मांग रहा है. चिब ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार परीक्षाएं रद्द होना और पेपर लीक होना शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है. यह भी पढे़ेंः NEET पेपर लीक मामले में ताबड़तोड़ एक्शन, प्रोफेसर कुलकर्णी के अलावा CBI के निशाने पर कौन-कौन? आखिर और कितनी मौतों के बाद जवाबदेही तय होगी? युवा कांग्रेस ने छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं को बेहद गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा. संगठन ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में आ रहे हैं. उदय भानु चिब ने सवाल उठाया कि आखिर पेपर लीक के पीछे कौन लोग हैं और अब तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अब भी अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मुद्दे पर चुप हैं. NTA पर प्रतिबंध और मुआवजे की मांग भारतीय युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रभावित छात्रों के परिवारों को जल्द मुआवजा दिया जाए. साथ ही संगठन ने आरोप लगाया कि NTA परीक्षा कराने में पूरी तरह विफल साबित हुई है, इसलिए एजेंसी को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. ‘NTA हल्ला बोल’ अभियान के जरिए NSUI का बड़ा प्रदर्शन वहीं, NSUI ने भी NEET विवाद को लेकर केंद्र सरकार और NTA के खिलाफ मोर्चा खोला. NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और NEET अभ्यर्थियों ने NTA मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई. लाखों छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़- विनोद विनोद जाखड़ ने कहा कि केंद्र सरकार की लापरवाही और NTA की विफलता ने मेहनती छात्रों के सपनों को तोड़ने का काम किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों की तैयारी करने वाले छात्र आज असुरक्षा, अव्यवस्था और मानसिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि यह केवल NEET परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य का सवाल बन चुका है. NSUI ने सरकार के सामने रखीं चार बड़ी मांगें प्रदर्शन के दौरान NSUI ने केंद्र सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं. संगठन ने NTA पर तत्काल प्रतिबंध लगाने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, NEET घोटाले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. इसके साथ ही छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया. आंदोलन तेज करने की चेतावनी NSUI और युवा कांग्रेस दोनों ने साफ कहा है कि यदि छात्रों के साथ हो रहे अन्याय पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को देशभर में और तेज किया जाएगा. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. यह भी पढे़ंः NEET पेपर लीक में बड़ा धमाका! NTA के अंदर तक पहुंची जांच, प्रोफेसरों और अधिकारियों पर शिकंजा
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