Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    परिमल नथवानी की एंट्री से झारखंड राज्यसभा चुनाव में बढ़ी हलचल, दूसरी सीट पर दिलचस्प हुआ मुकाबला

    4 hours ago

    1

    0

    झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह उद्योगपति और वर्तमान में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी की चुनावी मैदान में संभावित एंट्री है. नथवानी के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद दूसरी सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. झामुमो ने अपने पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को मैदान में उतारा है. दूसरी ओर भाजपा नेता गौरव बल्लभ ने भी नामांकन पत्र खरीदा है, लेकिन भाजपा ने अब तक आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिमल नथवानी की एंट्री के बाद भाजपा का रुख क्या होगा और दूसरी सीट का समीकरण किस दिशा में जाएगा. इस बीच दूसरी सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की है. इस बैठक को राज्यसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. नथवानी का झारखंड से पुराना नाता परिमल नथवानी का झारखंड की राजनीति से पुराना और गहरा रिश्ता रहा है. वह वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं. खास बात यह है कि 2008 में जब उन्होंने पहली बार चुनाव जीता था, तब राज्य में मधु कोड़ा की सरकार थी, जबकि 2014 में उनकी जीत के समय हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री थे. राज्यसभा चुनाव के जटिल गणित और राजनीतिक प्रबंधन का लंबा अनुभव नथवानी के पक्ष में माना जाता है. झारखंड में राज्यसभा चुनाव का इतिहास हमेशा से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं से जुड़ा रहा है. ऐसे में इंडिया गठबंधन की एकजुटता कितनी मजबूत रहेगी. ये चुनाव का सबसे अहम सवाल बन सकता है. ये भी पढ़ें- झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस का बड़ा फैसला, किन नेताओं को सौंपी सीट जिताने की जिम्मेदारी? हेमंत सोरेन ने बैद्यनाथ राम को बनाया उम्मीदवार हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. पार्टी के भीतर से परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठ रही थी, लेकिन बैद्यनाथ राम के नाम पर मुहर लगाकर हेमंत सोरेन ने न केवल आंतरिक दबाव को शांत किया बल्कि दलित सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है. झारखंड में क्या है सियासी गणित? संख्याबल के लिहाज़ झारखंड विधानसभा 81 विधानसभा सीटें हैं. झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक हैं. इस तरह इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. वहीं भाजपा के 21, जदयू के 1, आजसू के 1 और लोजपा (रामविलास) के 1 विधायक सहित एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं. एक विधायक जेएलकेएम के जयराम कुमार महतो हैं. बैद्यनाथ राम की जीत तय! राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को पहली वरीयता के 28 वोटों की आवश्यकता होती है. मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है. असली मुकाबला दूसरी सीट पर है, जहां परिमल नथवानी, कांग्रेस और भाजपा की रणनीति चुनाव को अप्रत्याशित मोड़ दे सकती है. अब सभी की निगाहें भाजपा के अगले कदम, परिमल नथवानी के अंतिम निर्णय और इंडिया गठबंधन के भीतर की एकजुटता पर टिकी हैं. झारखंड की दूसरी राज्यसभा सीट फिलहाल राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा सस्पेंस बन चुकी है. ये भी पढ़ें- Exclusive: कांग्रेस का संगठन पर फोकस, आलाकमान ने सचिवों और संयुक्त सचिवों से मांगा 6 महीने का रिपोर्ट कार्ड
    Click here to Read more
    Prev Article
    क्या ममता बनर्जी ने यूसुफ पठान से बहरामपुर सीट छोड़ने को कहा? पूर्व क्रिकेटर ने खुद सामने आकर बताई सच्चाई
    Next Article
    बांग्लादेशी घुसपैठियों पर लगाम लगाने के लिए गृहमंत्री शाह का मास्टर प्लान, ऐसे लगेगी रोक

    Related भारत Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment