भारतीय रुपये में हालिया कमजोरी के बावजूद अब राहत की उम्मीद दिखाई दे रही है. Goldman Sachs का मानना है कि RBI और सरकार के नए कदमों से विदेशी निवेश बढ़ सकता है, जिससे रुपये पर दबाव कम होगा. बैंक का अनुमान है कि भारत में करीब 50 अरब डॉलर तक की फॉरेन कैपिटल आ सकता है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया मौजूदा स्तरों के आसपास स्थिर रह सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में बड़ी मजबूती की संभावना कम है, लेकिन आगे इसकी गिरावट पर काफी हद तक रोक लग सकती है.
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