FD से कमाना चाहते हैं हर महीने 10000 रुपये? तो पहले जान लें कितना करना होगा इनवेस्ट और क्या है गणित
2 weeks ago
Fixed Deposit: अपने भविष्य के लिए निवेश करने के लिए कई लोग कई ऑप्शंस अपनाते हैं, जिसेमें से एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी है. FD में पैसा लगाकर कई लोग हर महीने अच्छी- खासी कमाई करना चाहते हैं. खासतौर से जब बात रिटायरमेंट की आती है तब, लोग बिना जोखिम के सटल कमाई चाहते हैं. लेकिन इसके लिए कितनी रकम चाहिए, ये सिर्फ ब्याज दर देखकर तय नहीं होता. इसमें टैक्स, ब्याज दर और FD के प्रकार का भी असर पड़ता है. FD के दो प्रकार होते हैंFD के बारे में तो हम सभी जानते हैं, तो अब इसके प्रकार के बारे में भी जान लेते हैं जिससे ये गणित आसान हो जाएगा. मुख्य रूप से एफडी 2 प्रकार की होती है. मंथली पेआउट FDइसमें ब्याज हर महीने आपके खाते में आता है. ये रिटायर लोगों और नियमित खर्च चलाने वालों के लिए अच्छा ऑप्शन होता है. क्यूम्युलेटिव FDइस एफडी में ब्याज जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है. इसमें पैसा थोड़ा तेजी से बढ़ता है क्योंकि ब्याज भी दोबारा निवेश होता रहता है. ये भी पढ़ें: Bihar PDS: फ्री राशन पर मोदी सरकार के फैसले से बिहार को क्या मिलेगा? कितने लोग ले पाएंगे योजना का लाभ? जानें कैसे मिलेंगे हर महीने 10 हजार?अगर बैंक लगभग 7% सालाना ब्याज दे रहे हैं, तो हर महीने करीब 10,000 रुपये कमाने के लिए लगभग 17–18 लाख रुपये की FD करनी पड़ेगी. क्योंकि 10,000 रुपये महीने का मतलब साल में 1.2 लाख रुपये ब्याज हुआ. 7% ब्याज पर इतनी आय पाने के लिए करीब 17 लाख रुपये निवेश चाहिए. अगर ब्याज दर 6% हो, तो ये रकम बढ़कर लगभग 20 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. यानी सुरक्षित और नियमित आय के लिए बड़ा निवेश जरूरी होता है. टैक्स कटने के बाद?FD का ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है. इसका मतलब है कि बैंक भले 10,000 रुपये महीने का ब्याज दे, लेकिन टैक्स कटने के बाद हाथ में कम पैसा आएगा. जो लोग हाई टैक्स स्लैब में आते हैं, उन्हें इसका ज्यादा असर महसूस होता है. इसलिए वित्तीय सलाहकार कहते हैं कि पहले ये सोचें कि टैक्स के बाद आपको वास्तव में कितनी रकम चाहिए. ये भी पढ़ें: Carrymen News: शॉपिंग बैग उठाने के कितने रुपए लेगा आपका हेल्पर, सर्विस से सुरक्षा तक... कैरीमेन को लेकर आपके हर सवाल का जवाब सीनियर सिटिजन को मिलेगा फायदाअधिकतर बैंक वरिष्ठ नागरिकों यानी सीनियर सिटिजन को आम लोगों से लगभग 0.5% ज्यादा ब्याज देते हैं. ये छोटा अंतर भी लंबे समय में काफी मदद करता है. इससे या तो मासिक आय बढ़ सकती है या उतनी ही आय के लिए कम निवेश करना पड़ता है.
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