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    Train News: क्या रेलवे लाइन और ट्रैक एक ही हैं? सच जानकर रह जाएंगे हैरान

    10 hours ago

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    Railway Line Vs Railway Track: ट्रेन से तो लगभग हर किसी ने ही सफर किया होता है. ज्यादातर लोगों को खिड़की वाली सीट पर बैठकर बाहर के नजारे देखते हुए सफर करने में मजा आता है. लेकिन आज भी काफी लोगों को यह नहीं पता कि रेलवे लाइन और रेलवे ट्रैक दोनों अलग-अलग चीजें हैं. इन दोनों को एक ही समझना गलत है. इसलिए आज हम आपका यह कन्फयूजन खत्म करने वाले हैं. रेलवे लाइन क्या होती है? अगर बात करें रेलवे लाइन की तो रेलवे लाइन को आप एक पूरे रूट या फिर प्रोजेक्ट की तरह समझ सकते हैं. जब रेलवे यह तय करता है कि शहरों के बीच ट्रेन चलाई जाएगी, जैसे गाजियाबाद से पटना तो यह पूरा मार्ग रेलवे लाइन कहलाता है. इसमें केवल पटरी नहीं, बल्कि पूरे रूट का प्लान शामिल होता है जैसे... स्टेशन सिग्नलिंग सिस्टम ट्रैक का पूरा नेटवर्क आसान भाषा में कहें तो रेलवे लाइन एक पूरा सफर या रास्ता है, जो दो जगहों को जोड़ता है. आखिर ट्रेनों की बिजली कभी क्यों नहीं जाती? जानिए इसके पीछे की तकनीक रेलवे ट्रैक क्या होता है? अब जानते हैं कि रेलवे ट्रैक क्या होता है. रेलवे ट्रैक वह असली ढांचा होता है, जिस पर ट्रेन चलती है. यानी जमीन पर बिछाई गई पटरियों का पूरा सिस्टम रेलवे ट्रैक कहलाता है. एक रेलवे ट्रैक किन चीजों से बनता है? काफी लोगों को लगता है कि ट्रैक केवल दो लोहे की पटरियों से बनता है, लेकिन ऐसा नहीं है. एक मजबूत रेलवे ट्रैक चार मुख्य हिस्सों से मिलकर बनता है. इनमें शामिल है. रेल्स- लोहे की दो लंबी पटरियां जिन पर ट्रेन के पहिए चलते हैं. स्लीपर्स- पटरी के नीचे लगे सीमेंट या कंक्रीट के ब्लॉक, जो उसे स्थिर रखते हैं. गिट्टी- छोटे-छोटे पत्थर जो ट्रैक को मजबूती देते हैं और भार सहते हैं. फास्टनर्स- क्लिप और नट-बोल्ट जो रेल और स्लीपर को जोड़कर रखते हैं. पटरियों में जंग क्यों नहीं लगता? रेलवे की पटरियां साधारण लोहे की नहीं होती हैं. इन्हें खास मैंगनीज स्टील (हैडफील्ड स्टील) से बनाया जाता है, जिसमें लगभग 12 प्रतिशत मैंगनीज और 1 प्रतिशत कार्बन होता है. यही कारण है कि ये पटरियां जल्दी खराब नहीं होती और इनमें जंग भी काफी कम लगता है. रेलवे ट्रैक बिछाने का खर्च अगर इसके खर्च की बात करें तो रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना काफी महंगा काम होता है. भारत में केवल 1 किलोमीटर रेलवे ट्रैक बिछाने में करोड़ों रुपये तक का खर्च आ सकता है. इसमें जमीन, लेबर और मटेरियल सभी की लागत शामिल होती है. स्वच्छ यमुना के लिए बड़ा अभियान! 14 जून को सफाई अभियान में जुटेगी दिल्ली, आप भी कर सकते हैं भागीदारी
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