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    वर्ल्ड अपडेट्स:जयशंकर बोले- अमेरिका ने खुद रूसी तेल खरीदने को कहा, बाद में टैरिफ लगा दिया

    6 hours ago

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    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने खुद भारत से रूसी तेल खरीदने की अपील की थी ताकि वैश्विक तेल बाजार स्थिर रहे और कीमतों में बेतहाशा उछाल न आए। फिनलैंड में एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा कि रूस पर बैन लगाए जाने के बाद यूरोपीय देशों ने रूसी तेल से दूरी बना ली और पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया। पश्चिम एशिया लंबे समय से भारत के लिए तेल का प्रमुख स्रोत रहा है। ऐसे में बाजार की स्थिति बदल गई। जयशंकर ने कहा, "उस समय अमेरिका ने खास तौर पर भारत से कहा था कि वह रूसी तेल खरीदे ताकि तेल बाजार स्थिर रह सके।" उन्होंने कहा कि भारत ने हालात को देखते हुए व्यावहारिक फैसला लिया और सस्ता तेल खरीदा। जयशंकर ने पश्चिमी देशों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका ने भारत से बाजार को स्थिर करने में मदद मांगी, बाद में टैरिफ लगाए और फिर उन्हें वापस भी ले लिया। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में फैसले हमेशा आदर्शों, नैतिकता या सिद्धांतों के आधार पर फैसले नहीं लिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे नरसंहार बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। 3 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहीं थाई राजकुमारी बज्रकिटियाभा का निधन थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकिटियाभा का 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं। थाई शाही परिवार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि लगातार चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती रही और गुरुवार शाम बैंकॉक के चुलालॉन्गकॉर्न अस्पताल में उनका निधन हो गया। राजकुमारी बज्रकिटियाभा दिसंबर 2022 में अपने कुत्तों के साथ व्यायाम कर रही थीं, तभी अचानक बेहोश हो गई थीं। डॉक्टरों ने बाद में बताया कि उनके हृदय में मायकोप्लाज्मा संक्रमण हुआ था, जिससे गंभीर अनियमित धड़कन की समस्या पैदा हुई और वह कोमा में चली गईं। 7 दिसंबर 1978 को जन्मीं बज्रकिटियाभा, थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी संतान थीं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से दो स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल कीं। संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के साथ काम करने के बाद उन्होंने थाईलैंड में अटॉर्नी जनरल कार्यालय में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 से 2014 तक वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। बाद में वह संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की ‘रूल ऑफ लॉ’ एम्बेसडर भी रहीं। 2021 में राजा वजिरालोंगकोर्न ने उन्हें अपनी निजी सुरक्षा इकाई का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया और जनरल का दर्जा दिया। उनकी प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक छवि के कारण उन्हें थाई राजशाही के संभावित उत्तराधिकारियों में भी देखा जाता था। उ. कोरिया में ड्रोन भेजने पर द. कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 30 साल अतिरिक्त जेल दक्षिण कोरिया की सियोल जिला अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजकर तनाव भड़काने के मामले में 30 साल अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि इस अभियान का मकसद उत्तर कोरिया को उकसाकर आपात स्थिति पैदा करना और बाद में मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल तैयार करना था। अदालत ने यून सुक योल, पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून, डिफेंस काउंटर इंटेलिजेंस कमांड के पूर्व प्रमुख यो इन-ह्युंग और ड्रोन ऑपरेशन कमांड के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों ने सैन्य अभियान की आड़ में उत्तर कोरिया को उकसाया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ गया। फैसले में कहा गया कि अक्टूबर 2024 में प्योंगयांग में प्रचार सामग्री गिराने के लिए ड्रोन भेजे गए थे। अदालत के अनुसार यह कार्रवाई यून सुक योल के निर्देश पर हुई थी और उन्हें उम्मीद थी कि उत्तर कोरिया जवाबी प्रतिक्रिया देगा। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह अभियान दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की तैयारी का हिस्सा था। यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करते हुए कहा था कि देश को "राष्ट्र-विरोधी ताकतों" से बचाने की जरूरत है, लेकिन भारी जनविरोध के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। यून सुक योल पहले ही विद्रोह के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसके अलावा उन्हें सत्ता के दुरुपयोग और गिरफ्तारी में बाधा डालने के मामले में पांच साल की अलग सजा भी मिल चुकी है। यूरोप में नाटो अभियानों के लिए लड़ाकू विमान और युद्धपोत घटाएगा अमेरिका अमेरिका यूरोप में नाटो अभियानों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले लड़ाकू विमानों, टोही विमानों और युद्धपोतों की संख्या में बड़ी कटौती की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम से नाटो की लंबी दूरी के हमले और निगरानी क्षमता प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका नाटो अभियानों के लिए उपलब्ध F-16 और F-15E लड़ाकू विमानों की संख्या लगभग 150 से घटाकर 100 करने की योजना बना रहा है। समुद्री निगरानी में इस्तेमाल होने वाले विमानों की संख्या भी 26 से घटाकर 15 किए जाने का प्रस्ताव है। योजना के तहत यूरोप के लिए उपलब्ध कराए गए सभी आठ एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर विमानों को हटाया जा सकता है। इसके अलावा एक मिसाइल-सक्षम पनडुब्बी, एक विमानवाहक पोत और उससे जुड़े कई युद्धपोतों को अन्य क्षेत्रों में पुनः तैनात किए जाने की संभावना है। विमानवाहक पोत के साथ अभियान में शामिल होने वाले दर्जनों लड़ाकू विमानों को भी हटाया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोप की सुरक्षा के लिए निर्धारित दो बमवर्षक समूहों में से एक को किसी अन्य क्षेत्र में भेजा जा सकता है। इससे नाटो की रणनीतिक और निगरानी क्षमताओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, इस संबंध में नाटो और अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। चीन ने रेगिस्तानी इलाकों में ‘अत्यधिक बाढ़’ की चेतावनी दी चीन ने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग और आसपास के इलाकों में इस गर्मी अत्यधिक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों के मुताबिक सामान्य से अधिक तापमान, भारी बारिश और तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सरकारी प्रसारक CCTV के अनुसार, चीन के सबसे बड़े तकलामकान रेगिस्तान में जून की शुरुआत में इस साल की पहली बाढ़ दर्ज की गई। आमतौर पर ऐसे हालात अगस्त में देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मौसम में असामान्य बदलाव के कारण बाढ़ अपेक्षा से पहले आ गई। चीन मौसम विज्ञान प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बाढ़ से सड़क, रेलवे तथा तेल और गैस अवसंरचना को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पोलैंड ने यूक्रेन से सड़क का नाम बदलने की मांग की पोलैंड ने यूक्रेन के विनित्सिया शहर में स्टेपन बांदेरा के नाम पर रखी गई सड़क का नाम बदलने की मांग की है। पोलिश अधिकारियों का कहना है कि बांदेरा और उनके संगठन की विरासत पोलैंड में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जुड़ी मानी जाती है और ऐसे प्रतीक दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचाते हैं। विनित्सिया में जिस सड़क का नाम पहले रूसी लेखक लियो टॉल्स्टॉय के नाम पर था, उसका नाम 2022 में बदलकर स्टेपन बांदेरा के नाम पर रखा गया था। यह कदम यूक्रेन द्वारा रूसी प्रभाव से जुड़े नामों को हटाने के अभियान का हिस्सा था। स्टेपन बांदेरा यूक्रेनी राष्ट्रवादी नेता थे। यूक्रेन में उन्हें राष्ट्रवादी प्रतीक के रूप में सम्मान मिलता है, जबकि पोलैंड उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जोड़ता है और उन्हें युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार मानता है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने हाल में चेतावनी दी थी कि यदि यूक्रेन ऐतिहासिक विवादों पर पोलैंड की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेता, तो वारसॉ भविष्य में अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए अधिक व्यावहारिक नीति अपना सकता है। ‘पोकेमॉन गो’ का डेटा सैन्य मैपिंग में इस्तेमाल हुआ हो सकता है: व्हिसलब्लोअर का दावा गूगल के पूर्व कर्मचारी और व्हिसलब्लोअर जैक वोरहीस ने दावा किया है कि लोकप्रिय मोबाइल गेम ‘पोकेमॉन गो’ के खिलाड़ियों द्वारा वर्षों में जुटाया गया लोकेशन और विजुअल डेटा अमेरिकी सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वोरहीस ने एक साक्षात्कार में कहा कि अधिकांश खिलाड़ियों को यह अंदाजा नहीं था कि उनके स्मार्टफोन कैमरा और GPS के जरिए एकत्र की गई जानकारी भविष्य में सैन्य उपयोग के लिए भी काम आ सकती है। उनके अनुसार यह डेटा दुनिया भर के स्थानों की जमीनी स्तर की जानकारी उपलब्ध कराता है। पोकेमॉन गो को 2016 में अमेरिकी कंपनी नायंटिक ने लॉन्च किया था। ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक पर आधारित यह गेम खिलाड़ियों को वास्तविक दुनिया के स्थानों पर जाकर डिजिटल पात्रों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित करता है। वोरहीस का दावा है कि जमीनी स्तर से जुटाई गई तस्वीरें और स्थान संबंधी जानकारी सैटेलाइट इमेजरी को और अधिक प्रभावी बना सकती हैं। उनके अनुसार इस प्रकार का डेटा किसी क्षेत्र की त्रि-आयामी संरचना तैयार करने और भू-भाग की विस्तृत समझ विकसित करने में सहायक हो सकता है। NATO लक्ष्यों की फंडिंग को लेकर ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली का इस्तीफा ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हीली ने आरोप लगाया कि सरकार और वित्त मंत्रालय सेना के आधुनिकीकरण तथा NATO प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं। उनका इस्तीफा लेबर सरकार के लिए एक नए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। अपने खुले पत्र में हीली ने कहा कि वह लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार और रक्षा खर्च को 2030 तक GDP के 3% तक ले जाने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार इस दिशा में स्पष्ट वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं दिखा सकी। उन्होंने सोमवार को जारी रक्षा बजट की भी आलोचना की और कहा कि यह सेना की वास्तविक जरूरतों से काफी कम है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार पहले से कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हालिया स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को नुकसान हुआ था और सरकार की कुछ नियुक्तियों को लेकर भी विवाद सामने आए थे। हीली के इस्तीफे से अब स्टार्मर सरकार पर रक्षा नीति और सैन्य निवेश को लेकर दबाव और बढ़ सकता है। चीन ने फिलीपींस के रक्षा मंत्री और उनके परिवार पर लगाया प्रवेश प्रतिबंध दक्षिण चीन सागर को लेकर जारी विवाद के बीच चीन ने फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो टियोदोरो और उनके परिवार पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन ने उन्हें, उनकी पत्नी और बच्चों को देश, हांगकांग तथा मकाऊ में प्रवेश से रोक दिया है। मनीला ने इस कदम को "अमित्रतापूर्ण कार्रवाई" बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों पर चिंता जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि टियोदोरो ने बार-बार चीन के खिलाफ गलत टिप्पणियां की हैं, जिससे चीन के वैध हितों और चीन-फिलीपींस संबंधों को नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय ने कहा कि चीन के संगठन और नागरिक भी टियोदोरो तथा उनके परिवार के साथ किसी प्रकार का लेनदेन या सहयोग नहीं कर सकेंगे। प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए टियोदोरो ने कहा कि वह अपना कर्तव्य निभाना जारी रखेंगे और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन आलोचकों को दबाने की कोशिश कर रहा है। फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास निर्माण और रचनात्मक संवाद की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा। विदेश मंत्री मारिया थेरेसा लाजारो ने बताया कि मनीला इस मुद्दे पर चीन के साथ बातचीत करेगा और कूटनीतिक समाधान तलाशेगा। खैबर पख्तूनख्वा में 2 पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शुक्रवार को दो अलग-अलग लक्षित हमलों में दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों घटनाएं बन्नू जिले में हुईं, जहां हाल के महीनों में आतंकवादी हिंसा और सुरक्षा बलों पर हमलों में बढ़ोतरी हुई है। पुलिस के अनुसार पहला हमला सेदगी बकाखेल इलाके में हुआ। अज्ञात बंदूकधारियों ने पुलिस कांस्टेबल मोहम्मद रोशन पर उनके घर के बाहर गोलीबारी कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर घटना के बाद फरार हो गए। दूसरी घटना आजाद मंडी क्षेत्र के पास हुई। पुलिस अधिकारी मिश्कवत उल्लाह आमिर बकाखेल तबलीगी मरकज में नमाज अदा कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया। गोलीबारी में उनकी मौत हो गई। पिछले महीने हुए एक आत्मघाती हमले में 15 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ती हिंसा पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।
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